By: Vikash, Mala Mandal
रांची: महिला आरक्षण बिल को लेकर देशभर में सियासी हलचल तेज होती जा रही है, और झारखंड की राजधानी रांची भी इससे अछूती नहीं है। एक तरफ जहां केंद्र सरकार इस बिल को महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल इसे लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। रांची में कांग्रेस नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल को लागू करने में जानबूझकर देरी की जा रही है।

कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण बिल को संसद से पारित तो करवा लिया, लेकिन इसके क्रियान्वयन को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर इसे अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया है। पार्टी के प्रदेश नेताओं ने कहा कि यह केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए किया गया कदम है, जबकि वास्तविकता में महिलाओं को तत्काल आरक्षण देने की कोई ठोस मंशा नहीं दिखती।

रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है, तो उसे तुरंत इस बिल को लागू करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश की आधी आबादी को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का वादा केवल चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट समयसीमा तय करे और इसे जल्द से जल्द लागू करे।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि महिला आरक्षण बिल को पास कराना ही एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो पिछले कई दशकों से लंबित था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में इस बिल को कभी गंभीरता से नहीं लिया, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे प्राथमिकता देकर संसद में पारित कराया।
भाजपा का यह भी कहना है कि जनगणना और परिसीमन एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पार्टी नेताओं के अनुसार, इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही महिला आरक्षण को सही तरीके से लागू किया जा सकता है, ताकि सभी वर्गों को न्याय मिल सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण बिल आगामी चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। यह मुद्दा न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि राज्य स्तर पर भी राजनीतिक दलों के बीच टकराव का कारण बन रहा है। रांची में जिस तरह से इस पर बयानबाजी हो रही है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गरमाएगा।

महिला संगठनों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई संगठनों का कहना है कि वे लंबे समय से महिला आरक्षण की मांग कर रहे हैं और अब जब यह बिल पास हो चुका है, तो इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय महिलाओं के हित में काम करना चाहिए।

झारखंड की महिलाओं में भी इस मुद्दे को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि महिला आरक्षण लागू होने से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और इससे समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा।
कुल मिलाकर, रांची में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, और आने वाले समय में यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण होता जाएगा। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस बिल को कब और कैसे लागू करती है, और क्या यह वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम बन पाता है या नहीं।

