By: Vikash, Mala Mandal
25 अप्रैल 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। आज पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ जानकी जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। माता सीता के जन्मदिवस के रूप में इस दिन का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति भी आज कई शुभ योग बना रही है, जिससे पूजा-पाठ का महत्व और बढ़ गया है।

आज वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तिथि चल रही है। यह समय धार्मिक कार्यों, व्रत और पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। जो लोग माता जानकी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें आज के दिन व्रत रखकर विशेष पूजा करनी चाहिए। मंदिरों में भी आज विशेष आयोजन किए जा रहे हैं और भक्त बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
आज का पंचांग
तिथि: वैशाख शुक्ल पक्ष अष्टमी
वार: शनिवार
नक्षत्र: पुष्य (समय अनुसार परिवर्तन संभव)
योग: शुभ योग का निर्माण
सूर्योदय: सुबह लगभग 5 बजकर 32 मिनट
सूर्यास्त: शाम लगभग 6 बजकर 27 मिनट

पूजा का शुभ मुहूर्त
आज जानकी जन्मोत्सव की पूजा के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना गया है। विशेष रूप से प्रातःकाल में स्नान कर माता सीता और भगवान राम की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। अभिजीत मुहूर्त भी आज पूजा के लिए शुभ रहेगा, जो दोपहर के आसपास पड़ता है। इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

राहुकाल का समय
आज राहुकाल सुबह लगभग 9 बजकर 00 मिनट से 10 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। राहुकाल को अशुभ समय माना जाता है, इसलिए पूजा या नया कार्य इस समय में न करें।

जानकी जन्मोत्सव का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सीता को त्याग, समर्पण और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। खासतौर पर महिलाएं इस दिन व्रत रखकर अपने परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।

आज का विशेष उपाय
आज के दिन घर में घी का दीपक जलाकर माता जानकी और भगवान राम की आराधना करें। साथ ही रामायण का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

यह पंचांग और जानकारी सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। समय और तिथि में स्थान के अनुसार थोड़ा अंतर संभव है। किसी भी विशेष पूजा या अनुष्ठान के लिए योग्य पंडित या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

