By: Mala Mandal
देवघर। देशभर में शुरू हुई जनगणना प्रक्रिया को लेकर अब जनप्रतिनिधि भी सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रहे हैं। इसी क्रम में देवघर से सांसद Nishikant Dubey ने मंगलवार को स्व-जनगणना करते हुए लोगों से भी इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। उन्होंने सांख्यिकी पदाधिकारी के समक्ष डिजिटल माध्यम से अपनी जनगणना प्रक्रिया पूरी की और कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि देश के विकास की आधारशिला है।

सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुसार प्रत्येक 10 वर्षों पर जनगणना कराना आवश्यक है। हालांकि वर्ष 2020 में कोरोना महामारी जैसी वैश्विक आपदा के कारण जनगणना प्रक्रिया प्रभावित हुई और इसमें देरी हुई। अब केंद्र सरकार द्वारा आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म की सहायता से इसे फिर से शुरू किया गया है।

उन्होंने कहा कि पहले के समय में जनगणना की प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल हुआ करती थी। अधिकारियों को घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करनी पड़ती थी, जिसमें काफी समय लगता था। लेकिन अब तकनीक के इस्तेमाल से यह प्रक्रिया आसान और तेज हो गई है। आज मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोग घर बैठे कुछ ही मिनटों में स्व-जनगणना कर सकते हैं।
सांसद ने बताया कि जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहला चरण मई महीने से शुरू होकर जून के मध्य तक चलेगा। इस चरण में मकानों और घरों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि घर किस प्रकार का है — सीमेंट का, पक्का, कच्चा या मिट्टी का। साथ ही घर में उपलब्ध सुविधाओं जैसे बिजली, पानी, शौचालय, रसोई गैस और अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी आंकलन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह डेटा सरकार को यह समझने में मदद करेगा कि देश के किस क्षेत्र में किस प्रकार की सुविधाओं की कमी है और किन इलाकों में विकास कार्यों की अधिक आवश्यकता है। इसी आधार पर भविष्य की योजनाएं बनाई जाती हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाया जाता है।
सांसद निशिकांत दुबे ने जानकारी दी कि जनगणना का दूसरा चरण ऐतिहासिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1931 के बाद पहली बार जाति आधारित जनगणना की प्रक्रिया भी इस बार शामिल की जा रही है। इस चरण में विभिन्न जातियों की आबादी का आंकड़ा जुटाया जाएगा, जिससे सामाजिक और आर्थिक योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है और इसके लिए सही आंकड़ों का होना बेहद जरूरी है। जातिगत जनगणना से यह स्पष्ट होगा कि किस वर्ग की कितनी आबादी है और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति क्या है। इससे भविष्य में नीति निर्धारण और संसाधनों के वितरण में भी सहायता मिलेगी।
सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित हो। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आम लोगों को भी इसमें भाग लेने का अवसर दिया गया है। इससे समय की बचत होगी और डेटा संग्रहण भी अधिक सटीक तरीके से किया जा सकेगा।

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी नागरिक जनगणना में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें, क्योंकि यह केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कार्य है। सही और सटीक जानकारी देने से सरकार को योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी और विकास कार्यों को गति मिलेगी।

देवघर में सांसद द्वारा स्वयं जनगणना करने के बाद स्थानीय लोगों में भी इसको लेकर जागरूकता बढ़ी है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में जिले में जनगणना अभियान को और तेज किया जाएगा तथा लोगों को डिजिटल माध्यम से स्व-जनगणना करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, नागरिक अपने मोबाइल ऐप या आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से स्व-जनगणना कर सकते हैं। इसके लिए आधारभूत जानकारी और परिवार से संबंधित विवरण दर्ज करना होगा। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल इंडिया अभियान के तहत यह कदम देश में प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करेगा।
जनगणना को लेकर केंद्र सरकार की यह पहल न केवल आधुनिक भारत की तस्वीर पेश करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब सरकारी प्रक्रियाओं में तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। सांसद निशिकांत दुबे का स्व-जनगणना करना लोगों के लिए एक सकारात्मक संदेश माना जा रहा है।

