By: Mala Mandal
भारतीय रेलवे आने वाले समय में अपनी प्रमुख ट्रेनों शताब्दी और जनशताब्दी एक्सप्रेस का बड़ा आधुनिकीकरण करने जा रहा है। रेलवे का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और आधुनिक यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है। इसी कड़ी में इन ट्रेनों के कोचों को वंदे भारत एक्सप्रेस की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी की जा रही है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार नए बदलावों के बाद यात्रियों को आरामदायक सीटें, आधुनिक इंटीरियर, बेहतर रोशनी, स्मार्ट सूचना प्रणाली और अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

रेलवे मंत्रालय का मानना है कि देशभर में शताब्दी और जनशताब्दी ट्रेनों का उपयोग बड़ी संख्या में यात्री करते हैं। ऐसे में इन ट्रेनों की गुणवत्ता और सुविधाओं को आधुनिक बनाना बेहद जरूरी हो गया है। वंदे भारत ट्रेनों को यात्रियों से शानदार प्रतिक्रिया मिलने के बाद अब रेलवे पारंपरिक ट्रेनों को भी उसी स्तर पर लाने की दिशा में काम कर रहा है।
कोचों के इंटीरियर में होगा बड़ा बदलाव
नई योजना के तहत शताब्दी और जनशताब्दी ट्रेनों के कोचों के अंदरूनी हिस्सों को पूरी तरह से नया रूप दिया जाएगा। सीटों को अधिक आरामदायक और एर्गोनॉमिक डिजाइन में बदला जाएगा ताकि लंबी दूरी की यात्रा में यात्रियों को थकान महसूस न हो। इसके अलावा कोचों में LED लाइटिंग, बेहतर एयर कंडीशनिंग सिस्टम और आकर्षक कलर थीम का इस्तेमाल किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार ट्रेनों में डिजिटल डिस्प्ले सिस्टम भी लगाया जाएगा, जिससे यात्रियों को अगला स्टेशन, ट्रेन की गति और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां आसानी से मिल सकेंगी। इसके साथ ही मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट और बेहतर लगेज स्पेस जैसी सुविधाओं को भी उन्नत किया जाएगा।

सुरक्षा और स्वच्छता पर रहेगा विशेष फोकस
रेलवे केवल सुविधाओं को ही नहीं बल्कि सुरक्षा और स्वच्छता को भी प्राथमिकता दे रहा है। आधुनिकीकरण के दौरान कोचों में आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम लगाए जाएंगे। वहीं शौचालयों को भी आधुनिक तकनीक के अनुसार अपग्रेड किया जाएगा ताकि यात्रियों को साफ-सफाई की बेहतर सुविधा मिल सके। रेलवे की योजना है कि इन ट्रेनों में बायो-वैक्यूम टॉयलेट और बेहतर वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम लगाए जाएं। इससे ट्रेनों में स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

वंदे भारत जैसी सुविधाओं पर जोर
वंदे भारत एक्सप्रेस की लोकप्रियता ने भारतीय रेलवे को नई दिशा दी है। यात्रियों ने वंदे भारत की आरामदायक सीटें, आधुनिक डिजाइन, ऑटोमेटिक दरवाजे और हाईटेक सुविधाओं को काफी पसंद किया है। अब रेलवे चाहता है कि शताब्दी और जनशताब्दी जैसी पुरानी प्रतिष्ठित ट्रेनों में भी यात्रियों को उसी तरह का अनुभव मिले। हालांकि इन ट्रेनों को पूरी तरह वंदे भारत में परिवर्तित नहीं किया जाएगा, लेकिन इनके कोचों में कई सुविधाएं उसी स्तर की दी जाएंगी। रेलवे का मानना है कि इससे यात्रियों का सफर अधिक सुविधाजनक और आकर्षक बनेगा।

यात्रियों को मिलेगा बेहतर यात्रा अनुभव
रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि इस परियोजना के बाद शताब्दी और जनशताब्दी ट्रेनों की लोकप्रियता और बढ़ सकती है। वर्तमान समय में यात्री केवल तेज गति ही नहीं बल्कि आरामदायक और आधुनिक यात्रा अनुभव भी चाहते हैं। ऐसे में रेलवे का यह कदम यात्रियों की अपेक्षाओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इसके अलावा ट्रेनों के आधुनिकीकरण से रेलवे की छवि भी बेहतर होगी। भारतीय रेलवे लगातार अपनी सेवाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है। स्टेशन पुनर्विकास, नई ट्रेनों की शुरुआत और डिजिटल सुविधाओं के विस्तार के बाद अब पुरानी ट्रेनों के कोचों को आधुनिक बनाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

चरणबद्ध तरीके से होगा काम
रेलवे सूत्रों के मुताबिक यह काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। शुरुआत में कुछ प्रमुख रूट्स पर चलने वाली शताब्दी और जनशताब्दी ट्रेनों के कोचों को अपग्रेड किया जाएगा। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य ट्रेनों में भी यह सुविधा लागू की जाएगी।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की प्रतिक्रिया और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन और सुविधाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य भारतीय रेलवे को विश्वस्तरीय परिवहन प्रणाली के रूप में विकसित करना है और यह परियोजना उसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
आने वाले वर्षों में भारतीय रेलवे में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। शताब्दी और जनशताब्दी ट्रेनों के आधुनिकीकरण की योजना यात्रियों को आधुनिक, सुरक्षित और आरामदायक सफर देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

