By: Mala Mandal
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देशवासियों से पेट्रोल और डीजल के संयमित इस्तेमाल की अपील करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए अब “वर्क फ्रॉम होम” संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले दो महीनों से भारत के पड़ोस में चल रहे बड़े युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ऊर्जा संकट और बढ़ती महंगाई के दौर में हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह ईंधन की बचत करे और जरूरत पड़ने पर डिजिटल वर्किंग मॉडल को अपनाए। पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “पिछले दो महीने से हमारे पड़ोस में इतना बड़ा युद्ध चल रहा है। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ा है और भारत पर इसका गंभीर प्रभाव हुआ है। हमें अब ऊर्जा बचत की दिशा में तेजी से काम करना होगा।” उन्होंने कहा कि यदि कंपनियां और संस्थान वर्क फ्रॉम होम मॉडल को बढ़ावा दें तो इससे ईंधन की खपत कम होगी, ट्रैफिक दबाव घटेगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी। पीएम मोदी ने नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने और सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने की भी अपील की।

भारत पर कैसे पड़ रहा है असर?
विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर ट्रांसपोर्ट, खेती, उद्योग और रोजमर्रा की वस्तुओं पर भी दिखाई देता है। ऊर्जा संकट बढ़ने से बिजली उत्पादन लागत भी बढ़ सकती है। ऐसे में सरकार लगातार ऊर्जा बचत और वैकल्पिक संसाधनों को अपनाने पर जोर दे रही है। पीएम मोदी का वर्क फ्रॉम होम वाला सुझाव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वर्क फ्रॉम होम क्यों हो सकता है फायदेमंद?
कोरोना महामारी के दौरान देश में वर्क फ्रॉम होम मॉडल तेजी से लोकप्रिय हुआ था। आईटी, मीडिया, शिक्षा और कई निजी क्षेत्रों में कर्मचारियों ने घर से काम करके कंपनियों की लागत कम की थी। अब ऊर्जा संकट के दौर में एक बार फिर इस मॉडल पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सप्ताह में कुछ दिन भी कर्मचारी घर से काम करें तो लाखों लीटर ईंधन की बचत हो सकती है। इससे न केवल आम लोगों का खर्च कम होगा बल्कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव घटेगा।

आम जनता पर क्या पड़ेगा असर?
यदि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है तो इसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ना तय माना जा रहा है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं। ऐसे में सरकार ऊर्जा संरक्षण को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पीएम मोदी की अपील के बाद कई कंपनियां हाइब्रिड वर्क मॉडल पर विचार कर सकती हैं। इससे ट्रैफिक जाम में कमी आने के साथ-साथ पर्यावरण को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

ऊर्जा बचत पर सरकार का फोकस
केंद्र सरकार पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर एनर्जी और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा दे रही है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में आयातित तेल पर निर्भरता कम करना है। पीएम मोदी ने कई बार “Mission LiFE” यानी Lifestyle for Environment अभियान के तहत भी लोगों से ऊर्जा बचाने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नागरिक छोटे-छोटे कदम उठाएं, जैसे अनावश्यक वाहन इस्तेमाल कम करना, कार पूलिंग अपनाना और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाना, तो ऊर्जा संकट के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

राजनीतिक और आर्थिक मायने
पीएम मोदी का यह बयान केवल ऊर्जा बचत तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भविष्य की आर्थिक चुनौतियों के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। वैश्विक युद्ध, महंगाई और सप्लाई चेन संकट के बीच भारत सरकार सतर्क नजर आ रही है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि वैश्विक हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो भारत को आयात बिल और महंगाई दोनों मोर्चों पर दबाव झेलना पड़ सकता है। ऐसे में ऊर्जा संरक्षण और डिजिटल कार्य प्रणाली भविष्य की जरूरत बन सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्क फ्रॉम होम और ईंधन बचत की अपील ऐसे समय में आई है जब दुनिया ऊर्जा संकट और युद्ध के प्रभाव से जूझ रही है। सरकार जहां वैकल्पिक ऊर्जा पर फोकस बढ़ा रही है, वहीं आम नागरिकों से भी जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा की जा रही है। आने वाले समय में ऊर्जा बचत और डिजिटल कार्य संस्कृति भारत की आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।

