By: Mala Mandal
Adhik Maas Pradosh Katha: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने वाला सबसे पवित्र व्रत माना जाता है। जब प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस बार 28 मई 2026 को अधिक मास का पहला प्रदोष व्रत रखा जा रहा है, जिसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। मान्यता है कि अधिक मास में किए गए व्रत, पूजा और दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। खासतौर पर प्रदोष काल में पूजा और व्रत कथा का पाठ करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। कहा जाता है कि गुरु प्रदोष व्रत की कथा सुनने और पढ़ने से हर मनोकामना पूरी हो सकती है।
अधिक मास में गुरु प्रदोष व्रत का महत्व
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है, लेकिन इस दौरान भगवान शिव की उपासना का भी विशेष महत्व बताया गया है। गुरु प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की आराधना करने से करियर, विवाह, संतान, धन और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से राहत मिलने की मान्यता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में विराजमान रहते हैं और भक्तों की प्रार्थना शीघ्र स्वीकार करते हैं। इसलिए इस दिन व्रत रखकर कथा सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है।

गुरु प्रदोष व्रत की पावन कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक नगर में एक गरीब ब्राह्मण परिवार रहता था। उस परिवार में पति-पत्नी और उनका एक पुत्र था। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी और कई दिनों तक उन्हें भोजन भी नसीब नहीं होता था। एक दिन ब्राह्मण की पत्नी ने एक संत से अपनी परेशानियों का कारण पूछा। तब संत ने उन्हें गुरु प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने की सलाह दी।
संत की बात मानकर ब्राह्मण दंपति ने पूरे श्रद्धा भाव से प्रदोष व्रत रखना शुरू किया। वे हर गुरुवार प्रदोष काल में भगवान शिव का जलाभिषेक करते, दीपक जलाते और व्रत कथा का पाठ करते थे। कुछ ही समय बाद उनके जीवन में चमत्कारी बदलाव आने लगे। घर की आर्थिक स्थिति सुधर गई, पुत्र को शिक्षा में सफलता मिलने लगी और परिवार में सुख-शांति लौट आई।

कहा जाता है कि भगवान शिव की कृपा से उस परिवार की सभी परेशानियां दूर हो गईं। तभी से गुरु प्रदोष व्रत और उसकी कथा का महत्व और अधिक बढ़ गया। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक यह व्रत करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
गुरु प्रदोष व्रत पूजा विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें।
प्रदोष काल में दीपक जलाकर शिव चालीसा और मंत्रों का जाप करें।
गुरु प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
अंत में भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद बांटें।

प्रदोष व्रत में क्या करें
महादेव का रुद्राभिषेक करना शुभ माना जाता है।
जरूरतमंद लोगों को दान करें।
पीले वस्त्र धारण करें और केले का दान करें।
ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।

प्रदोष व्रत में क्या न करें
क्रोध और विवाद से दूर रहें।
तामसिक भोजन का सेवन न करें।
किसी का अपमान करने से बचें।
व्रत के नियमों को अनदेखा न करें।

गुरु प्रदोष व्रत का शुभ फल
धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को धन, सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। साथ ही भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। इसकी सत्यता और सटीकता की पुष्टि नहीं की जाती है। किसी भी पूजा या व्रत को करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ या विद्वान की सलाह अवश्य लें।

