By: Mala Mandal
Temple Parikrama Rules: सनातन धर्म में मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करने के साथ-साथ परिक्रमा (प्रदक्षिणा) करने की भी विशेष परंपरा है। माना जाता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई परिक्रमा से भगवान की कृपा प्राप्त होती है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि बहुत से लोग मंदिर में परिक्रमा तो करते हैं, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि किस देवी-देवता की कितनी बार परिक्रमा करनी चाहिए और इसका सही नियम क्या है। धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार अलग-अलग देवी-देवताओं की परिक्रमा की संख्या भी अलग मानी गई है। आइए जानते हैं मंदिर में परिक्रमा करने का सही तरीका, उसका धार्मिक महत्व और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

परिक्रमा का धार्मिक महत्व
‘परिक्रमा’ या ‘प्रदक्षिणा’ का अर्थ है भगवान को अपने दाहिने (दक्षिण) ओर रखते हुए उनके चारों ओर घूमना। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति अपने अहंकार, नकारात्मक विचार और पापों का त्याग कर ईश्वर की शरण में जाता है। यह श्रद्धा, समर्पण और आस्था का प्रतीक माना जाता है।

परिक्रमा किस दिशा में करनी चाहिए?
मंदिर में परिक्रमा हमेशा दक्षिणावर्त (Clockwise) दिशा में करनी चाहिए। यानी भगवान की मूर्ति या गर्भगृह हमेशा आपकी दाहिनी ओर रहनी चाहिए। इसे शुभ और धार्मिक रूप से सही माना गया है।
किस देवता की कितनी बार करें परिक्रमा?
भगवान गणेश
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश की 3 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। इससे बुद्धि, सफलता और विघ्नों का नाश होने की मान्यता है।

भगवान विष्णु
भगवान विष्णु की 4 बार परिक्रमा करने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है।
मां दुर्गा
मां दुर्गा की 1 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार अधिक परिक्रमा भी कर सकते हैं, लेकिन एक परिक्रमा का विशेष महत्व बताया गया है।
भगवान सूर्य
सूर्य देव की 7 बार परिक्रमा करने की मान्यता है। इससे ऊर्जा, स्वास्थ्य और आत्मबल में वृद्धि होने का विश्वास किया जाता है।

पीपल का वृक्ष
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल के वृक्ष की 7 या 108 बार परिक्रमा विशेष अवसरों पर की जाती है। अलग-अलग व्रत और परंपराओं में इसकी संख्या भिन्न हो सकती है।
भगवान शिव
भगवान शिव की परिक्रमा करते समय विशेष नियम का पालन किया जाता है। शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती। जल निकासी स्थान (सोमसूत्र) को पार नहीं किया जाता और वहीं से वापस लौटकर परिक्रमा पूरी की जाती है। इसे अर्ध परिक्रमा भी कहा जाता है और यही परंपरागत नियम माना जाता है।

परिक्रमा करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
परिक्रमा हमेशा शांत मन और श्रद्धा के साथ करें।
जल्दबाजी या दौड़कर परिक्रमा न करें।
भगवान का स्मरण करते हुए मंत्र या नाम का जाप करें।
मंदिर की मर्यादा और अनुशासन का पालन करें।
परिक्रमा के दौरान मोबाइल पर बात करने या हंसी-मजाक से बचें।
यदि मंदिर में विशेष नियम लिखे हों तो उनका पालन अवश्य करें।

क्या परिक्रमा करने से मिलते हैं आध्यात्मिक लाभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नियमित रूप से परिक्रमा करने से मन एकाग्र होता है, सकारात्मक सोच बढ़ती है और ईश्वर के प्रति श्रद्धा मजबूत होती है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि आत्मिक शांति और अनुशासन का भी प्रतीक मानी जाती है।

परिक्रमा करते समय न करें ये गलतियां
भगवान की मूर्ति की ओर पीठ करके अनावश्यक बातचीत न करें।
मंदिर परिसर में गंदगी न फैलाएं।
दूसरे श्रद्धालुओं को धक्का देकर आगे निकलने से बचें।
शिवलिंग की परिक्रमा करते समय सोमसूत्र को पार न करें।
परिक्रमा को केवल औपचारिकता न समझें, बल्कि श्रद्धा और भक्ति के साथ करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विधि-विधान से की गई परिक्रमा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन लाने में सहायक मानी जाती है। इसलिए मंदिर जाएं तो केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि सही नियमों के साथ परिक्रमा भी करें।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और उपलब्ध धार्मिक ग्रंथों में वर्णित जानकारी पर आधारित है। विभिन्न संप्रदायों, मंदिरों और क्षेत्रों में परिक्रमा से जुड़े नियम अलग-अलग हो सकते हैं। किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए संबंधित मंदिर के पुजारी या योग्य धर्माचार्य की सलाह लेना उचित रहेगा।

