By: Vikash Kumar Raut(Vicky)
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सख्त संदेश के महज 24 घंटे के भीतर रेजीनगर और शक्तिपुर थाना पुलिस की संयुक्त टीम पूर्व विधायक हुमायूं कबीर के शक्तिपुर स्थित आवास पर पहुंची। हालांकि पुलिस जब उनके घर पहुंची, तब हुमायूं कबीर और उनके बेटे गुलाम नबी आजाद रॉबिन दोनों घर पर मौजूद नहीं थे। ऐसे में पुलिस अधिकारियों ने कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस उनकी पत्नी मीरा सुल्ताना को सौंप दिया।

इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में नए सिरे से चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। विपक्ष इस कार्रवाई को सरकार की सख्ती बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और पुलिस अपने दायित्व का निर्वहन कर रही है।

जानकारी के अनुसार, रेजीनगर और शक्तिपुर थाना की पुलिस टीम निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुमायूं कबीर के शक्तिपुर स्थित आवास पर पहुंची थी। पुलिस अधिकारियों ने घर पर मौजूद परिवार के सदस्यों से बातचीत की और हुमायूं कबीर के बारे में जानकारी ली। जब यह स्पष्ट हुआ कि वह और उनके बेटे गुलाम नबी आजाद रॉबिन घर पर नहीं हैं, तब पुलिस ने नोटिस उनकी पत्नी मीरा सुल्ताना को सौंपते हुए आवश्यक जानकारी दी।

सूत्रों के मुताबिक यह नोटिस एक चल रही कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किया गया है। पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित पक्ष को निर्धारित समय पर उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा। हालांकि पुलिस ने नोटिस की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के हालिया सख्त संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में कानून व्यवस्था को लेकर स्पष्ट संकेत दिया था कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ यदि कानूनी कार्रवाई आवश्यक होगी तो बिना किसी भेदभाव के की जाएगी। इसके अगले ही दिन पुलिस की यह कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई।
हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक चर्चित चेहरा रहे हैं और समय-समय पर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। उनके खिलाफ पहले भी विभिन्न मामलों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में पुलिस द्वारा उनके आवास पर पहुंचकर नोटिस सौंपे जाने को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार पुलिस टीम कुछ समय तक आवास पर रही और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की गई। इस दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। पुलिस अधिकारियों ने आवश्यक दस्तावेज सौंपने के बाद वहां से वापसी कर ली।
हुमायूं कबीर या उनके बेटे की ओर से इस कार्रवाई पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं परिवार की ओर से भी नोटिस प्राप्त होने की पुष्टि के अलावा कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। यदि पुलिस द्वारा जारी नोटिस के अनुसार संबंधित पक्ष निर्धारित समय पर उपस्थित होता है तो जांच आगे बढ़ेगी। वहीं यदि आवश्यक हुआ तो पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है।

विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार से पारदर्शिता बनाए रखने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी कार्रवाई में कानून का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। दूसरी ओर सत्तापक्ष का कहना है कि पुलिस पूरी तरह कानून के अनुसार कार्य कर रही है और इसमें किसी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है।

फिलहाल पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर के घर पुलिस द्वारा नोटिस सौंपे जाने का मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि हुमायूं कबीर पुलिस के नोटिस पर क्या कदम उठाते हैं और आगे इस मामले में क्या कानूनी कार्रवाई होती है।

