By: Mala Mandal
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर JPSC और JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्र आंदोलन का नया रूप देखने को मिला। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और अभ्यर्थियों ने तिरंगा यात्रा निकालकर अपनी आवाज बुलंद की। छात्रों के हाथों में तिरंगा था और वे परीक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और CBI जांच की मांग को लेकर सड़क पर नजर आए। यह आंदोलन पिछले कई दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा है। छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल वर्तमान अभ्यर्थियों के भविष्य तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पारदर्शी और भरोसेमंद भर्ती व्यवस्था बनाने की भी है। इसी संदेश के साथ स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा यात्रा निकालने की घोषणा की गई थी।

तिरंगे के साथ छात्रों ने दिया बड़ा संदेश
JPSC-JSSC Reforms Manch के बैनर तले आंदोलन कर रहे छात्रों ने स्वतंत्रता दिवस को अपने आंदोलन से जोड़ते हुए तिरंगा यात्रा का आयोजन किया। इससे पहले छात्रों ने ऐलान किया था कि 15 अगस्त को तिरंगा यात्रा निकालकर सरकार तक अपनी मांग पहुंचाई जाएगी। आंदोलनकारियों का कहना था कि देश की आजादी का जश्न तभी सार्थक होगा, जब युवाओं को अपने भविष्य और मेहनत के परिणाम पर भरोसा हो। रांची में इससे पहले भी छात्र तिरंगा मार्च निकाल चुके हैं। अगस्त के शुरुआती दिनों में बारिश के बीच भी छात्रों ने तिरंगे के साथ मार्च किया था। उस दौरान प्रदर्शनकारियों ने लगभग 600 मीटर लंबे राष्ट्रीय ध्वज के साथ मार्च करने की बात कही थी। छात्रों ने इसे अपने संवैधानिक अधिकारों और एकजुटता का प्रतीक बताया था।

JPSC-JSSC परीक्षा को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी कई परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, परिणाम में देरी और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगा रहे हैं। छात्र संगठन इन मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में कथित अनियमितताओं की CBI जांच, विवादित परीक्षाओं को लेकर ठोस निर्णय और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार शामिल हैं। JPSC-JSSC Reforms Manch ने राज्य सरकार से निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरे मामले का समाधान करने की मांग की है।

विधानसभा मार्च के बाद आंदोलन हुआ तेज
छात्र आंदोलन में उस समय और तेजी आई, जब 10 अगस्त को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने विधानसभा की ओर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि JSSC-CGL 2024 परीक्षा को लेकर उठे सवालों का समाधान किया जाए और मामले की CBI जांच कराई जाए। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए और बाद में बड़ी संख्या में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। इस घटना के बाद छात्रों ने प्रशासन से अपील की कि वास्तविक और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थियों को किसी मामले में न फंसाया जाए। आंदोलनकारी नेताओं ने कहा कि अगर किसी हिंसक घटना में दोषी लोग हैं तो जांच के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

सरकार और छात्रों के बीच बातचीत भी बेनतीजा
छात्रों की मांगों को लेकर सरकार और आंदोलनकारी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके हैं। सरकार की ओर से मंत्रियों की एक समिति ने छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत की, लेकिन कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत के बाद भी छात्र CBI जांच और परीक्षा से जुड़े अपने प्रमुख मुद्दों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद आंदोलन को जारी रखने का फैसला लिया गया। छात्रों ने साफ किया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

तिरंगा यात्रा से आंदोलन को मिला नया रूप
स्वतंत्रता दिवस पर निकाली गई तिरंगा यात्रा को आंदोलनकारियों ने केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि युवाओं की आवाज के रूप में पेश किया। छात्रों का कहना है कि तिरंगा देश की एकता, संविधान और अधिकारों का प्रतीक है। इसी प्रतीक के साथ उन्होंने अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की। आंदोलन से जुड़े छात्रों ने पहले ही कहा था कि 15 अगस्त की तिरंगा यात्रा उनके आंदोलन को और मजबूती देगी। साथ ही उन्होंने प्रशासन से अपील की थी कि शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई न की जाए।

CBI जांच की मांग पर कायम छात्र
JPSC-JSSC विवाद में छात्रों की सबसे प्रमुख मांग स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच की है। आंदोलनकारियों का तर्क है कि यदि भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं तो निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले युवा वर्षों तक मेहनत करते हैं। परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने से अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित होता है। इसलिए भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, समयबद्ध परिणाम और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई जरूरी है। वहीं, सरकार की ओर से भर्ती परीक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के हित में काम करने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सरकार की प्रतिबद्धता जताई है, जबकि विपक्ष इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर लगातार निशाना साध रहा है।

आंदोलन का अगला रुख क्या होगा?
तिरंगा यात्रा के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और छात्रों के बीच आगे बातचीत होती है या आंदोलन और तेज होता है। छात्र पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वे अपनी मांगों से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। रांची में चल रहा JPSC-JSSC आंदोलन अब केवल परीक्षा विवाद तक सीमित नहीं दिख रहा है। यह युवाओं के रोजगार, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सरकारी परीक्षाओं में भरोसे से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। विधानसभा मार्च के बाद तिरंगा यात्रा ने इस आंदोलन को नया राजनीतिक और सामाजिक संदेश भी दिया है।

छात्रों की मांग है कि सरकार उनकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार करे और ऐसी व्यवस्था तैयार करे, जिसमें किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल न उठे। वहीं प्रशासन के सामने चुनौती है कि आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था भी बनी रहे और छात्रों की शिकायतों का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जाए।
फिलहाल रांची में JPSC-JSSC विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है और तिरंगे के साथ निकली यात्रा ने यह संदेश दिया है कि अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने के लिए तैयार हैं। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से लिया जाने वाला फैसला इस आंदोलन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।



