By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
देवघर। झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संताल परगना के तीन प्रमुख जिलों—देवघर, दुमका और गोड्डा—में पिछले 20 वर्षों के दौरान खरीदी गई एम्बुलेंसों का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है।
सांसद ने सोशल मीडिया के माध्यम से कई सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि बीते दो दशकों में इन जिलों में कितनी एम्बुलेंस खरीदी गईं, उन पर कितना सरकारी धन खर्च हुआ और वर्तमान में उनमें से कितनी एम्बुलेंस सेवा देने की स्थिति में हैं।

निशिकांत दुबे ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कितनी एम्बुलेंस आज भी संचालित हो रही हैं, कितनी खराब होकर कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं और कितनी मरम्मत के अभाव में वर्षों से खड़ी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद आम लोगों को समय पर एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

सांसद ने मुख्यमंत्री से यह भी पूछा कि यदि एम्बुलेंसों की नियमित देखरेख और रखरखाव किया गया, तो फिर बड़ी संख्या में वाहन खराब क्यों पड़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को जिलेवार पूरी सूची सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि जनता के सामने वास्तविक तस्वीर आ सके।
उन्होंने कहा कि संताल परगना क्षेत्र के ग्रामीण और दूर-दराज इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए एम्बुलेंस जीवनरक्षक सेवा है। ऐसे में यदि वाहन अनुपयोगी पड़े हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

सांसद ने सरकार से मांग की कि पिछले 20 वर्षों में खरीदी गई प्रत्येक एम्बुलेंस का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए। इसमें खरीद वर्ष, लागत, वर्तमान स्थिति, संचालन की स्थिति तथा कबाड़ घोषित होने का विवरण भी शामिल होना चाहिए। उनके अनुसार इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी संसाधनों का उपयोग किस प्रकार किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि किसी जिले में बड़ी संख्या में एम्बुलेंस खराब पड़ी हैं तो उसकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि श्रावणी मेला और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सांसद का यह बयान राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषकर ऐसे समय में जब राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के दावे कर रही है और दूसरी ओर विपक्ष व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहा है।
फिलहाल मुख्यमंत्री या राज्य सरकार की ओर से सांसद द्वारा उठाए गए इन सवालों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।

स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर उठे इन सवालों के बीच अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इन आरोपों और मांगों पर क्या जवाब देती है तथा क्या वास्तव में जिलेवार एम्बुलेंसों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाएगा। यदि ऐसा होता है तो इससे स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आने में मदद मिलेगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित हो सकेगी।



