By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नई दिल्ली/रांची। नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के समग्र विकास का व्यापक खाका प्रस्तुत करते हुए राज्य को खनिज संपदा आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ाकर मैन्युफैक्चरिंग हब और नॉलेज इकोनॉमी के रूप में विकसित करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा तभी सार्थक होगी जब उसे मानव पूंजी, शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जोड़ा जाएगा।

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड को केवल खनिज निकालने वाले राज्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उसे देश के विकास की मुख्यधारा में एक मजबूत भागीदार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से राज्य के संसाधनों के स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन, उद्योगों की स्थापना और रोजगार सृजन में सहयोग की अपेक्षा जताई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य झारखंड को क्रिटिकल मिनरल्स आधारित उद्योगों का केंद्र बनाना है। इसके साथ ही रिसर्च, इनोवेशन और तकनीकी विकास के लिए विशेष संस्थानों की स्थापना पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और एग्रो-फूड प्रोसेसिंग क्षेत्रों में बड़े निवेश को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि राज्य में माइनिंग और मिनरल्स सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मिनरल एक्सप्लोरेशन और सस्टेनेबल माइनिंग प्रैक्टिसेज को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे झारखंड को उद्योग और रोजगार के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग और मार्गदर्शन से राज्य की विकास गति और तेज होगी।
शिक्षा को बनाया विकास का आधार
हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार कर रही है। मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं और अब इन विद्यालयों से छात्र आईआईटी तथा मेडिकल संस्थानों में चयनित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार 5,000 उत्कृष्ट विद्यालय विकसित करने के लक्ष्य पर कार्य कर रही है। साथ ही केंद्र सरकार से पीएम श्री विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। झारखंड में एनसीईआरटी का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने की मांग भी बैठक में उठाई गई।

आंगनबाड़ी और पोषण योजनाओं पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में लगभग 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें से करीब 15 हजार केंद्रों के पास अपना भवन नहीं है। इसके बावजूद पोषण अभियान और SAAMAR जैसी योजनाओं के माध्यम से कुपोषण में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रतिदिन अंडा उपलब्ध कराया जा रहा है और राज्य सरकार अपने संसाधनों से 5,000 नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण करा रही है। इसके अलावा कृषि आधारित पोषण कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

कौशल विकास और रोजगार में नई पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड सरकार हर वर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को रोजगार से जोड़ने का कार्य कर रही है। सारथी योजना के तहत अब तक 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि युवाओं को AI, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), ड्रोन तकनीक और सोलर ऊर्जा जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके अलावा 53 हजार महिलाओं को आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार योग्य बनाया गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर
स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को पंचायत स्तर तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में 1,276 दवा दुकानें संचालित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेजों में स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) सीटों में वृद्धि का प्रस्ताव लंबित है। साथ ही राज्य सरकार AI आधारित डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार करने की दिशा में भी कार्य कर रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच दोनों में सुधार होगा।

खेलों में राष्ट्रीय पहचान बना रहा झारखंड
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के खिलाड़ी हॉकी, फुटबॉल और एथलेटिक्स जैसे खेलों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य की खेल प्रतिभाओं को बेहतर मंच देने के लिए स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की आवश्यकता है। उन्होंने खेल संघों में पारदर्शिता और सुधार की जरूरत पर बल देते हुए केंद्र सरकार से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी का अवसर झारखंड को देने की मांग की।
कृषि और पोषण के क्षेत्र में उपलब्धियां
बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाएं विकसित की जा चुकी हैं। वहीं 1.5 लाख एकड़ भूमि में फलदार पौधों का रोपण किया गया है। उन्होंने कहा कि झारखंड का आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहा है। कृषि को कुपोषण के खिलाफ लड़ाई का प्रभावी माध्यम बताते हुए उन्होंने पोषण सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया।

डिजिटल गवर्नेंस को मिल रही नई दिशा
हेमंत सोरेन ने बताया कि राज्य सरकार AI आधारित मुख्यमंत्री डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है। इसके साथ ही इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर भी तेजी से कार्य चल रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से डेटा शेयरिंग की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाने की मांग की। साथ ही DBT योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और डिजिटल धोखाधड़ी रोकने के लिए तकनीकी सहयोग का आग्रह किया।
केंद्र सरकार के समक्ष रखीं प्रमुख मांगें
मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन की शेष 6,000 करोड़ रुपये की राशि शीघ्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कोयला कंपनियों पर राज्य का 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया होने का मुद्दा भी उठाया। इसके अलावा DMFT के मानकों में संशोधन, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाने, स्कूली शिक्षा से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और निधियों के एकीकरण, PPP मॉडल पर प्रस्तावित छह मेडिकल कॉलेजों में शेष दो कॉलेजों की स्वीकृति तथा DVC, CCL और ECL कमांड एरिया में सामाजिक आधारभूत संरचना निर्माण के लिए भूमि संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की मांग भी केंद्र सरकार के समक्ष रखी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में झारखंड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग की आवश्यकता है।

