By: Mala Mandal
देवघर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जिला कार्यालय, देवघर में सोमवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर स्मरण पर्व के तहत भव्य कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिला अध्यक्ष सचिन रवानी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी उपस्थित रहे। सम्मेलन में जिले के बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर तथा उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर उपस्थित नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने दोनों महापुरुषों के राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को स्मरण करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
मुख्य अतिथि बाबूलाल मरांडी ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद, शिक्षा और राष्ट्रीय एकता के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने कहा कि 6 जुलाई को उनकी जयंती पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। उनके विचार आज भी देशवासियों और भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रसेवा, त्याग और समर्पण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें।

मरांडी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद परिवार से आते थे। उनके पिता भी शिक्षा जगत की प्रतिष्ठित हस्ती थे। विदेश से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे कम उम्र में ही कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। वे चाहते तो अपना पूरा जीवन सुख-सुविधाओं में व्यतीत कर सकते थे, लेकिन उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए सार्वजनिक जीवन का मार्ग चुना और देश सेवा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में डॉ. मुखर्जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे संविधान सभा के सदस्य भी रहे तथा वर्ष 1947 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री बनाए गए। मंत्री बनने के बाद उन्होंने देश की पहली औद्योगिक नीति को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से चित्तरंजन रेल इंजन कारखाना तथा सिंदरी उर्वरक कारखाने जैसी महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजनाओं की स्थापना हुई, जिसने देश के औद्योगिक विकास को नई दिशा दी।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वर्ष 1950 में लियाकत-नेहरू समझौते का विरोध करते हुए डॉ. मुखर्जी ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वर्ष 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना कर राष्ट्रवादी राजनीति की मजबूत नींव रखी। उन्होंने कांग्रेस की नीतियों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया और राष्ट्रीय एकता के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने कश्मीर मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉ. मुखर्जी ने “एक देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान नहीं चलेंगे” का नारा दिया था। जम्मू-कश्मीर में परमिट व्यवस्था के विरोध में उन्होंने आंदोलन किया और कश्मीर की यात्रा के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में 23 जून 1953 को जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में उनका निधन हो गया। मरांडी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का बलिदान देश की एकता और अखंडता के लिए सदैव याद रखा जाएगा तथा उनके संकल्पों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साकार किया जा रहा है।

अपने संबोधन में बाबूलाल मरांडी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा की तथा झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर विभिन्न जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही है और विकास कार्यों में पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री रणधीर सिंह ने कहा कि यदि आज पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर भारत के अभिन्न अंग हैं तो इसमें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संघर्ष और बलिदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित के लिए उनके द्वारा किया गया त्याग सदैव प्रेरणादायी रहेगा। रणधीर सिंह ने देवघर जिले में विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि बालू और गिट्टी के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भाजपा जिलाध्यक्ष सचिन रवानी ने सभी अतिथियों एवं कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि भाजपा अपने महापुरुषों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को संगठन की मजबूती और समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

सम्मेलन में पूर्व मंत्री रणधीर सिंह, रीता चौरसिया, संजीव जजवाड़े, विशाखा सिंह, सुनीता सिंह, अभयानंद झा, नवल राय, अधीर चंद्र भैया, पप्पू यादव, पंकज सिंह भदोरिया, विजया सिंह, मुकेश पाठक, संतोष मुर्मू, मनोज मिश्रा, जयकांत मंडल, अलका सोनी, सचिन सुल्तानिया, संतोष उपाध्याय, दिनेश सोनी, महेश राय, संजय यादव, विपिन देव, धनंजय तिवारी, अमनदीप गोलू सहित सभी मंडल अध्यक्ष, जिला पदाधिकारी, मोर्चा पदाधिकारी, पूर्व पदाधिकारी तथा सैकड़ों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण, संगठन सुदृढ़ीकरण तथा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के संकल्प के साथ किया गया। सम्मेलन के दौरान कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला तथा संगठन को और अधिक मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।


