By: Mala Mandal
भारतीय क्रिकेट टीम इस समय ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां लगातार मिल रही हार ने खिलाड़ियों, टीम प्रबंधन और करोड़ों क्रिकेट प्रशंसकों की चिंता बढ़ा दी है। टेस्ट क्रिकेट में घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब टी20 क्रिकेट में भी टीम इंडिया की लय पूरी तरह बिगड़ती दिखाई दे रही है।

इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर भारतीय टीम को लगातार छह मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा है। यह सिलसिला केवल हार तक सीमित नहीं है, बल्कि टीम के प्रदर्शन, रणनीति, बल्लेबाजी, गेंदबाजी और नेतृत्व को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

टीम इंडिया लंबे समय से विश्व क्रिकेट की सबसे मजबूत टीमों में गिनी जाती रही है। घरेलू मैदान पर उसका रिकॉर्ड शानदार रहा है, जबकि सीमित ओवरों के क्रिकेट में भी भारत लगातार अच्छा प्रदर्शन करता आया है। लेकिन हाल के महीनों में तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आ रही है।

गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद टीम से नई ऊर्जा और आक्रामक क्रिकेट की उम्मीद की जा रही थी। हालांकि शुरुआती कुछ मुकाबलों को छोड़ दें तो टीम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। टेस्ट क्रिकेट में न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज में मिली हार ने पहले ही आलोचनाओं को जन्म दिया था। अब इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर टी20 में लगातार छह हार ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बल्लेबाजी क्रम लगातार स्थिर नहीं रह पाया है। सलामी जोड़ी से लेकर मध्यक्रम तक किसी भी बल्लेबाज ने निरंतर प्रदर्शन नहीं किया। कई मुकाबलों में अच्छी शुरुआत मिलने के बावजूद टीम बड़े स्कोर तक नहीं पहुंच सकी, जबकि लक्ष्य का पीछा करते समय दबाव में बल्लेबाजी बिखरती नजर आई।
गेंदबाजी विभाग भी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। शुरुआती ओवरों में विकेट लेने में नाकामी और डेथ ओवरों में लगातार रन लुटाना टीम की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर सामने आया। कई मैच ऐसे रहे, जहां जीत की स्थिति में होने के बावजूद भारतीय गेंदबाज अंतिम ओवरों में मुकाबला गंवा बैठे।

फील्डिंग भी टीम इंडिया की चिंता बढ़ाने वाली रही। आसान कैच छूटना, रन आउट के मौके गंवाना और मैदान पर खराब समन्वय ने विपक्षी टीमों को अतिरिक्त मौके दिए। आधुनिक क्रिकेट में फील्डिंग को जीत और हार का बड़ा कारण माना जाता है और भारत इस विभाग में भी पिछड़ता नजर आया।
इंग्लैंड और आयरलैंड जैसी टीमों ने भारतीय खिलाड़ियों की कमजोरियों का पूरा फायदा उठाया। तेज गेंदबाजों के सामने भारतीय बल्लेबाज संघर्ष करते दिखाई दिए, जबकि स्पिनरों के खिलाफ भी रन गति बनाए रखने में मुश्किल हुई। दूसरी ओर विपक्षी टीमों ने दबाव की परिस्थितियों में कहीं अधिक परिपक्व खेल दिखाया।

लगातार हार के बाद अब चयन नीति भी चर्चा का विषय बन गई है। युवा खिलाड़ियों को अवसर देना भविष्य के लिए जरूरी माना जाता है, लेकिन अनुभवी खिलाड़ियों की कमी कई मौकों पर साफ दिखाई दी। क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित टीम संयोजन तैयार करना आने वाले बड़े टूर्नामेंटों के लिए बेहद जरूरी होगा।
कप्तानी और रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। मैच के दौरान गेंदबाजों में बदलाव, फील्ड प्लेसमेंट और बल्लेबाजी क्रम को लेकर लिए गए कई फैसलों पर पूर्व खिलाड़ियों ने भी अपनी राय रखी है। हालांकि टीम प्रबंधन का कहना है कि यह बदलाव का दौर है और खिलाड़ियों को समय देना चाहिए।

क्रिकेट इतिहास गवाह है कि हर बड़ी टीम खराब दौर से गुजरती है। भारत ने भी पहले ऐसे कई दौर देखे हैं और मजबूत वापसी की है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि टीम पूरी तरह संकट में है, लेकिन लगातार मिल रही हार यह जरूर संकेत दे रही है कि कई क्षेत्रों में तत्काल सुधार की आवश्यकता है।

आने वाले महीनों में भारतीय टीम के सामने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुकाबले हैं। यदि बल्लेबाजी, गेंदबाजी, फील्डिंग और टीम संयोजन में जल्द सुधार नहीं हुआ तो बड़े टूर्नामेंटों में टीम को और कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या टीम इंडिया इस खराब दौर से जल्दी बाहर निकल पाएगी, या फिर लगातार हार का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। क्रिकेट प्रेमियों की नजर अब अगले मुकाबलों पर टिकी है, जहां भारतीय टीम के पास अपनी खोई हुई लय वापस पाने और आलोचकों को जवाब देने का सुनहरा अवसर होगा।

