By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
Ashadha Purnima Vrat 2026: हिंदू धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन को व्यास पूर्णिमा और गुरु पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास का जन्म इसी दिन हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा कहा जाता है। वहीं अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए गुरु पूर्णिमा का पर्व भी इसी तिथि पर मनाया जाता है।

आषाढ़ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्रदेव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। कई श्रद्धालु इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन भी कराते हैं। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से सुख-समृद्धि, ज्ञान, सौभाग्य और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि वर्ष 2026 में आषाढ़ पूर्णिमा का व्रत 28 जुलाई को रखा जाएगा या 29 जुलाई को। आइए जानते हैं सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन का महत्व।
आषाढ़ पूर्णिमा 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई 2026 को शाम 6 बजकर 18 मिनट पर प्रारंभ होगी और 29 जुलाई 2026 को रात 8 बजकर 5 मिनट तक रहेगी।

आषाढ़ पूर्णिमा व्रत 28 या 29 जुलाई किस दिन रखा जाएगा?
सनातन परंपरा के अनुसार पूर्णिमा व्रत उदया तिथि के आधार पर रखा जाता है। चूंकि 29 जुलाई 2026 को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए आषाढ़ पूर्णिमा का व्रत, गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। इसी दिन पूजा, दान, स्नान, गुरु पूजन और सत्यनारायण भगवान की कथा करना अधिक शुभ माना जाएगा।

आषाढ़ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 28 जुलाई 2026, शाम 6:18 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त – 29 जुलाई 2026, रात 8:05 बजे
व्रत एवं पूजा – 29 जुलाई 2026 (उदया तिथि के अनुसार)

आषाढ़ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन गुरु का सम्मान करने, उनका आशीर्वाद प्राप्त करने और ज्ञान के प्रति समर्पण व्यक्त करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन किए गए दान, जप, तप और पूजा का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है, जबकि भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से जीवन की बाधाएं दूर होने की मान्यता है।

आषाढ़ पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर की सफाई कर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्रदेव का ध्यान करें। भगवान को पुष्प, अक्षत, चंदन, धूप, दीप, फल और नैवेद्य अर्पित करें। यदि संभव हो तो भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन करें। गुरु पूर्णिमा होने के कारण अपने गुरु, माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करें तथा उनका आशीर्वाद लें। दिनभर श्रद्धा और संयम के साथ व्रत रखें तथा जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करें।

आषाढ़ पूर्णिमा पर क्या करें?
इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। भगवान विष्णु, शिव और चंद्रदेव की पूजा करें। सत्यनारायण भगवान की कथा सुनें या कराएं। गुरु का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद लें। गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें। रात में चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।

आषाढ़ पूर्णिमा पर क्या न करें?
इस दिन किसी का अपमान न करें, विशेष रूप से गुरु, माता-पिता और बुजुर्गों का। क्रोध, विवाद और कटु वाणी से बचें। सात्विक भोजन करें और नशे या तामसिक भोजन का सेवन न करें। पूजा के समय मन को शांत रखें और श्रद्धा के साथ भगवान का स्मरण करें। आषाढ़ पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि गुरु के प्रति सम्मान, ज्ञान की साधना और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक है। वर्ष 2026 में पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई की शाम से शुरू होकर 29 जुलाई की रात तक रहेगी, लेकिन उदया तिथि के आधार पर आषाढ़ पूर्णिमा व्रत, गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने तथा दान-पुण्य करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आने की मान्यता है।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं, वैदिक पंचांग और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों और पंचांगों के अनुसार तिथि एवं पूजा के समय में मामूली अंतर संभव है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या व्रत का पालन करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग या योग्य विद्वान से जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

