By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
विश्वकर्मा पूजा 2026 कब है?
हर साल कन्या संक्रांति के अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। वर्ष 2026 में विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर, गुरुवार को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के दिव्य वास्तुकार, शिल्पकार और निर्माणकर्ता के रूप में पूजा जाता है। खास बात यह है कि इस पर्व पर केवल भगवान विश्वकर्मा की पूजा ही नहीं होती, बल्कि मशीनों, औजारों, वाहनों और काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का भी पूजन किया जाता है।

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त
2026 में विश्वकर्मा पूजा के लिए सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। इस दौरान पूजा-पाठ और भगवान विश्वकर्मा का स्मरण किया जा सकता है। कुछ पंचांगों में अभिजीत मुहूर्त लगभग 11:57 बजे से 12:45 बजे तक बताया गया है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर संभव है, इसलिए अपने शहर के पंचांग को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।

आखिर मशीनों और औजारों की पूजा क्यों होती है?
विश्वकर्मा पूजा की सबसे खास परंपरा मशीनों और औजारों का पूजन है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और शिल्पकला का देवता माना जाता है। उनसे जुड़ी कथाओं में सोने की लंका, द्वारका नगरी, इंद्रपुरी और पुष्पक विमान जैसे दिव्य निर्माणों का उल्लेख मिलता है। इसी धार्मिक मान्यता के कारण निर्माण कार्य, शिल्प, इंजीनियरिंग, तकनीक और मशीनों से जुड़े उपकरणों को भगवान विश्वकर्मा से प्रतीकात्मक रूप से जोड़ा जाता है। इसलिए विश्वकर्मा पूजा के दिन जिन औजारों और मशीनों से रोजी-रोटी चलती है, उन्हें साफ करके सम्मानपूर्वक पूजा करने की परंपरा बनी।

औजारों की पूजा का क्या संदेश है?
विश्वकर्मा पूजा को केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में ही नहीं देखा जाता, बल्कि यह मेहनत, हुनर और काम के साधनों के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है। कारीगर अपने औजारों के माध्यम से अपनी कला और कौशल को काम में बदलते हैं। इसी वजह से इस दिन हथौड़े, आरी, छेनी, ड्रिल मशीन, वेल्डिंग उपकरण और अन्य कार्यकारी साधनों को साफ करके उनका पूजन किया जाता है। आधुनिक समय में इस परंपरा का दायरा भी काफी बढ़ गया है। कारखानों, वर्कशॉप, गैराज, निर्माण स्थलों, दुकानों और तकनीकी संस्थानों में अलग-अलग प्रकार की मशीनों और उपकरणों की पूजा की जाती है।

मशीनों को एक दिन आराम देने की भी है परंपरा
कई जगह विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मशीनों को बंद रखकर उन्हें एक दिन का विश्राम देने की परंपरा भी देखने को मिलती है। इसके पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह विचार भी जुड़ा है कि जिन मशीनों और उपकरणों से लगातार काम लिया जाता है, उनकी साफ-सफाई, देखभाल और रखरखाव पर भी ध्यान दिया जाए।

किन लोगों के लिए खास है विश्वकर्मा पूजा?
विश्वकर्मा पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है जिनका काम निर्माण, मशीनरी, तकनीक और शिल्प से जुड़ा है। इंजीनियर, मैकेनिक, कारीगर, बढ़ई, लोहार, वेल्डर, तकनीशियन, फैक्ट्री कर्मचारी, वाहन व्यवसाय से जुड़े लोग, बिल्डर और मशीनरी से जुड़े कारोबारी इस दिन विशेष रूप से पूजा करते हैं। इसके अलावा कई दुकानदार और छोटे-बड़े व्यवसायी भी अपने प्रतिष्ठान में भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं और अपने काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को पूजन में शामिल करते हैं।

विश्वकर्मा पूजा में क्या किया जाता है?
विश्वकर्मा पूजा के दिन सबसे पहले कार्यस्थल, दुकान, फैक्ट्री या वर्कशॉप की साफ-सफाई की जाती है। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके पूजा की जाती है। मशीनों और औजारों को भी अच्छी तरह साफ किया जाता है। इसके बाद रोली, अक्षत, फूल, माला, धूप और दीप आदि से पूजा की जाती है। कई स्थानों पर मशीनों या वाहनों पर स्वस्तिक का चिह्न भी बनाया जाता है। भारतीय धार्मिक परंपरा में स्वस्तिक को मंगल और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

विश्वकर्मा पूजा का आधुनिक महत्व
आज के दौर में जब तकनीक और मशीनें लगभग हर क्षेत्र का हिस्सा बन चुकी हैं, विश्वकर्मा पूजा का महत्व और व्यापक हो गया है। फैक्ट्रियों से लेकर छोटे गैराज, इलेक्ट्रॉनिक वर्कशॉप, निर्माण कंपनियों और तकनीकी संस्थानों तक इस दिन अपने काम के साधनों की पूजा की जाती है। यह पर्व लोगों को यह याद दिलाने का अवसर भी देता है कि किसी भी काम की सफलता में केवल मशीन ही नहीं, बल्कि उसे चलाने वाले व्यक्ति का कौशल, मेहनत, अनुशासन और जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होती है।

पूजा के दौरान सुरक्षा का भी रखें ध्यान
मशीनों और औजारों की पूजा करते समय सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। भारी मशीनरी को साफ करते समय बिजली का कनेक्शन सुरक्षित तरीके से बंद करना चाहिए। चलती मशीन, खुले विद्युत तार या गर्म उपकरण के पास पूजा सामग्री रखने से बचना चाहिए। धार्मिक अनुष्ठान के साथ कार्यस्थल की वास्तविक सुरक्षा और मशीनों का उचित रखरखाव भी जरूरी है।

विश्वकर्मा पूजा क्यों है खास?
विश्वकर्मा पूजा में धर्म, मेहनत, हुनर और तकनीक का अनोखा मेल देखने को मिलता है। भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ औजारों और मशीनों का सम्मान यह दर्शाता है कि मनुष्य के काम और उसकी आजीविका में योगदान देने वाले साधनों को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
यही वजह है कि 17 सितंबर का दिन विशेष रूप से कारीगरों, तकनीकी कर्मचारियों, इंजीनियरों, फैक्ट्री वर्कर्स और कारोबारियों के बीच महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विश्वकर्मा से कार्य में सफलता, समृद्धि और सुरक्षित वातावरण की प्रार्थना की जाती है।
इस लेख में दी गई पूजा, मुहूर्त और धार्मिक मान्यताएं विभिन्न पंचांगों एवं प्रचलित धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग शहरों और पंचांग पद्धतियों के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। पूजा से जुड़े किसी विशेष अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंडित या विद्वान से सलाह लेना उचित है।

