By: Mala Mandal
देवघर में हर शनिवार को शनि मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद टावर चौक पर कुछ ऐसे लोगों से मुलाकात होती है, जिनके लिए संवेदना और सहयोग की छोटी-सी पहल भी बड़ी खुशी का कारण बन जाती है। इसी क्रम में इस शनिवार एक बार फिर मानवीय संवेदना और सेवा भावना की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। पिछले शनिवार जिन देवतुल्य लोगों से मुलाकात के दौरान बारिश के मौसम में रेनकोट की जरूरत को लेकर चर्चा हुई थी, उन्हें इस शनिवार सप्रेम रेनकोट भेंट किया गया।

बताया गया कि प्रत्येक शनिवार शनि मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद टावर चौक के आसपास इन जरूरतमंद और असहाय लोगों से मुलाकात होती है। नियमित मुलाकात के दौरान न केवल उनका हालचाल जाना जाता है, बल्कि उनकी जरूरतों को समझने और यथासंभव सहयोग करने का प्रयास भी किया जाता है। इसी दौरान पिछले शनिवार बारिश के मौसम को देखते हुए रेनकोट की आवश्यकता को लेकर बातचीत हुई थी।

बारिश के मौसम में खुले आसमान के नीचे रहने वाले या सड़कों के किनारे अपना जीवन गुजारने वाले लोगों के लिए बारिश काफी मुश्किलें लेकर आती है। लगातार बारिश के कारण कपड़े भीग जाना, सामान को सुरक्षित रखना और स्वयं को बारिश से बचाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में रेनकोट जैसी छोटी लेकिन उपयोगी चीज उनके लिए काफी राहत पहुंचा सकती है।

पिछले शनिवार हुई चर्चा को याद रखते हुए इस शनिवार रेनकोट लेकर टावर चौक पहुंचे और उन लोगों को सप्रेम रेनकोट भेंट किया गया। रेनकोट मिलते ही उनके चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। इस दौरान उन्हें यह एहसास भी हुआ कि उनकी जरूरत और पिछले सप्ताह कही गई बात को याद रखा गया और उस पर अमल किया गया।

इस पहल को केवल वस्तु वितरण के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह समाज के उन लोगों के प्रति संवेदना और अपनापन व्यक्त करने का एक प्रयास है, जो अक्सर हमारी नजरों के सामने रहते हुए भी हमारी प्राथमिकताओं से दूर हो जाते हैं। जरूरतमंद लोगों के साथ नियमित रूप से मिलना, उनकी बातें सुनना और उनकी छोटी-छोटी आवश्यकताओं को समझना सामाजिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इस अवसर पर सेवा करने वाले व्यक्ति ने भावुक अंदाज में कहा कि हर शनिवार शनि मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद इन देवतुल्य लोगों से मुलाकात होती है। पिछले शनिवार उन्होंने रेनकोट के बारे में चर्चा की थी, इसलिए इस शनिवार उन्हें सप्रेम रेनकोट भेंट किया गया। उन्होंने कहा कि किसी के चेहरे पर खुशी लाने से बड़ी संतुष्टि शायद ही कुछ और हो सकती है।

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि समाज में जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाओं से ज्यादा जरूरी है कि छोटी-छोटी जरूरतों को समझकर समय पर सहयोग किया जाए। किसी को बारिश से बचाने के लिए रेनकोट देना भले ही छोटी पहल लगे, लेकिन जिसके पास बारिश से बचने का कोई साधन नहीं है, उसके लिए यह बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

यह पहल सेवा, संवेदना और इंसानियत की उस भावना को सामने लाती है, जिसमें मदद करने के लिए किसी बड़े अवसर का इंतजार नहीं किया जाता। नियमित रूप से जरूरतमंद लोगों के बीच पहुंचना और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार सहयोग करना समाज में सकारात्मक संदेश देता है।

टावर चौक पर इस शनिवार हुई यह मुलाकात भी इसी मानवीय भावना की एक मिसाल बनी। पूजा-अर्चना के साथ सेवा और जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाने का यह प्रयास निश्चित रूप से समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश है। संदेश साफ है—अगर हम किसी की छोटी-सी जरूरत को समझकर समय पर पूरा कर दें, तो वही छोटी मदद किसी के लिए बहुत बड़ी खुशी बन सकती है।


