By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
Aaj Ka Panchang 18 August 2026: आज 18 अगस्त 2026, मंगलवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि आज शाम 5 बजकर 50 मिनट तक रहेगी, इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू हो जाएगी। आज का दिन कल्कि जयंती और तीसरे मंगला गौरी व्रत के कारण भी विशेष महत्व रखता है। पंचांग के अनुसार आज चंद्रमा तुला राशि में रहेंगे और स्वाति नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कल्कि जयंती भगवान विष्णु के भविष्य में होने वाले दसवें अवतार भगवान कल्कि के प्राकट्य से जुड़ा पर्व है। मान्यता है कि कलियुग के अंत में जब अधर्म बढ़ जाएगा, तब भगवान विष्णु कल्कि अवतार लेकर धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे। इसी आस्था के कारण कल्कि जयंती को भगवान विष्णु के कल्कि स्वरूप की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। आज के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग, करण, शुभ मुहूर्त और राहुकाल का विशेष महत्व है। आइए जानते हैं 18 अगस्त 2026 का पूरा पंचांग और आज किस समय कौन-सा काम करना शुभ या अशुभ माना जाता है।

18 अगस्त 2026 का पंचांग एक नजर में
आज मंगलवार है और हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। षष्ठी तिथि शाम 5:50 बजे तक रहेगी, इसके बाद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि शुरू होगी। आज का नक्षत्र स्वाति है और चंद्रमा तुला राशि में स्थित रहेंगे।
वार: मंगलवार
तिथि: शुक्ल पक्ष षष्ठी, शाम 5:50 बजे तक
इसके बाद: शुक्ल पक्ष सप्तमी
मास: श्रावण
पक्ष: शुक्ल पक्ष
नक्षत्र: स्वाति
चंद्र राशि: तुला
सूर्य राशि: सिंह
करण: तैतिल
योग: शुक्ल
ऋतु: वर्षा
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
पंचांग की गणना स्थान के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। इसलिए किसी विशेष पूजा या धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के समय को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है।

आज मनाई जा रही है कल्कि जयंती
18 अगस्त को कल्कि जयंती का पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान कल्कि को भगवान विष्णु का दसवां और अंतिम अवतार माना जाता है। मान्यता है कि कलियुग के अंतिम चरण में भगवान विष्णु कल्कि रूप में अवतरित होकर अधर्म का अंत करेंगे और धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे। कल्कि जयंती के अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप, ध्यान और धार्मिक पाठ करने की परंपरा है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और परिवार की सुख-शांति तथा धर्म और सदाचार की भावना के लिए प्रार्थना करते हैं।

आज है तीसरा मंगला गौरी व्रत
मंगलवार को पड़ने के कारण आज मंगला गौरी व्रत का भी विशेष महत्व है। सावन के मंगलवार को सुहागिन महिलाएं माता गौरी की पूजा और व्रत करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार मंगला गौरी व्रत वैवाहिक सुख, पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है। 18 अगस्त 2026 को कल्कि जयंती और मंगला गौरी व्रत का संयोग धार्मिक दृष्टि से दिन को और महत्वपूर्ण बना रहा है।
आज का स्वाति नक्षत्र
आज पूरे दिन स्वाति नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। पंचांग के अनुसार चंद्रमा तुला राशि में रहेंगे और स्वाति नक्षत्र से जुड़े समय में पूजा-पाठ और आध्यात्मिक गतिविधियों को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।स्वाति नक्षत्र को स्वतंत्रता, गतिशीलता और परिवर्तन से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज शांत मन से भगवान का ध्यान और मंत्र जाप करना शुभ माना जा सकता है।

आज का शुभ मुहूर्त
18 अगस्त को अभिजीत मुहूर्त लगभग दोपहर 11:58 बजे से 12:50 बजे तक बताया गया है। इस अवधि को परंपरागत रूप से शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। हालांकि मुहूर्त की सटीक गणना शहर और स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकती है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त लगभग 4:24 बजे से 5:08 बजे तक बताया गया है। यह समय ध्यान, पूजा, मंत्र जाप और आध्यात्मिक साधना के लिए उपयुक्त माना जाता है।

आज का राहुकाल
मंगलवार को राहुकाल दोपहर के बाद पड़ता है। 18 अगस्त 2026 को दिल्ली के लिए अलग-अलग पंचांग गणनाओं में राहुकाल लगभग 3:40 बजे से 5:20 बजे के बीच बताया गया है। एक स्रोत में यह समय 3:41 बजे से 5:19 बजे तक दिया गया है, जबकि अन्य गणनाओं में कुछ मिनट का अंतर है। राहुकाल को हिंदू ज्योतिषीय परंपरा में शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसलिए यदि कोई महत्वपूर्ण नया काम शुरू करना हो तो स्थानीय पंचांग के अनुसार राहुकाल समाप्त होने के बाद समय चुनना बेहतर माना जाता है।
आज का सूर्योदय और सूर्यास्त
स्थान के अनुसार सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होता है। उदाहरण के लिए शेखपुरा, बिहार के पंचांग में 18 अगस्त को सूर्योदय सुबह 5:22 बजे और सूर्यास्त शाम 6:19 बजे दिया गया है। इसलिए पूजा, संध्या वंदन या किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने शहर के स्थानीय समय को ध्यान में रखना चाहिए।

कल्कि जयंती पर कैसे करें पूजा
कल्कि जयंती के दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु का ध्यान किया जा सकता है। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके दीपक जलाएं। भगवान को पीले फूल, फल और अन्य सात्विक सामग्री अर्पित कर श्रद्धा से पूजा करें।
इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया जा सकता है। अपनी श्रद्धा के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री का दान करना भी धार्मिक परंपराओं में पुण्यकारी माना जाता है।

आज क्या करें और किन बातों से बचें
आज धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ, मंत्र जाप और ध्यान के लिए समय निकालना शुभ माना जा सकता है। किसी जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी अच्छा माना जाता है।
वहीं राहुकाल के दौरान नए और महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत करने से धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय को केवल पंचांग के आधार पर लेने के बजाय अपनी परिस्थितियों और उचित सलाह को भी ध्यान में रखना चाहिए।

आज का पंचांग क्यों है खास
18 अगस्त 2026 को एक साथ कई धार्मिक अवसर और पंचांग की महत्वपूर्ण स्थितियां बन रही हैं। श्रावण शुक्ल षष्ठी, स्वाति नक्षत्र, कल्कि जयंती और मंगला गौरी व्रत का संयोग इस दिन को धार्मिक रूप से विशेष बनाता है। पंचांग के अनुसार आज तिथि शाम 5:50 बजे तक षष्ठी रहेगी और उसके बाद सप्तमी शुरू होगी।
श्रावण मास पहले से ही भगवान शिव की आराधना और धार्मिक साधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में आज पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालुओं के लिए दिन का विशेष महत्व हो सकता है।
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध पंचांग गणनाओं पर आधारित है। शुभ-अशुभ समय और मुहूर्त शहर, सूर्योदय तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। धार्मिक अनुष्ठान या किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग और योग्य विद्वान की सलाह को प्राथमिकता दें। यह लेख किसी निश्चित धार्मिक या भविष्य संबंधी परिणाम की गारंटी नहीं देता।

