By: Mala Mandal
रांची। झारखंड में नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों ने अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। सरकार के निर्णय से प्रभावित अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर कर परीक्षा रद्द करने के आदेश को चुनौती दी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की है और चयन के बाद नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन अचानक परीक्षाएं रद्द किए जाने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है।

परीक्षा रद्द करने के फैसले से नाराज अभ्यर्थी
झारखंड में हाल के दिनों में कई नियुक्ति परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आए हैं। परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं के आरोपों के बाद सरकार ने कई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार का तर्क है कि निष्पक्ष और पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। वहीं, चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि कुछ लोगों की गलती का खामियाजा सभी सफल उम्मीदवारों को भुगतना पड़ रहा है। उनका दावा है कि उन्होंने मेहनत के बल पर परीक्षा में सफलता हासिल की है और अब परीक्षा रद्द होने से उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

हाईकोर्ट में तीन याचिकाएं दायर
सरकार के फैसले के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में तीन अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि सरकार के परीक्षा रद्द करने वाले आदेश पर पुनर्विचार किया जाए और चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया जाए। अभ्यर्थियों की ओर से दलील दी जा रही है कि परीक्षा में शामिल सभी उम्मीदवारों को एक समान दोषी नहीं माना जा सकता। जिन अभ्यर्थियों ने नियमों के अनुसार परीक्षा पास की है, उनके अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।

नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल
झारखंड में सरकारी नियुक्तियों को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। कई परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, अनियमितता और धांधली के आरोप लगाए गए हैं। सरकार ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हालांकि, चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि जांच और दोषियों पर कार्रवाई अलग विषय है, लेकिन पूरी परीक्षा को रद्द करना उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय है जिन्होंने वर्षों तक तैयारी कर सफलता हासिल की है।

अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से उम्मीद
याचिका दायर करने वाले अभ्यर्थियों को अब हाईकोर्ट से राहत की उम्मीद है। उनका कहना है कि अदालत उनके पक्ष को सुनेगी और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए उचित फैसला देगी। अभ्यर्थियों का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद अचानक उसे रद्द करना उनके मौलिक अधिकारों को प्रभावित करता है। उन्होंने न्यायालय से मांग की है कि सरकार के आदेश की समीक्षा कर चयन प्रक्रिया को बहाल करने का निर्देश दिया जाए।

सरकार के फैसले पर आगे की नजर
अब सभी की निगाहें झारखंड हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत में सरकार का पक्ष और अभ्यर्थियों की दलीलें सामने आएंगी। इसके बाद ही यह साफ होगा कि रद्द की गई परीक्षाओं को लेकर आगे क्या फैसला होगा।
राज्य में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए यह मामला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाईकोर्ट के फैसले से न सिर्फ याचिकाकर्ताओं का भविष्य तय होगा, बल्कि आने वाली नियुक्ति परीक्षाओं की प्रक्रिया पर भी इसका असर पड़ सकता है।

फिलहाल चयनित अभ्यर्थी न्याय की उम्मीद में अदालत की ओर देख रहे हैं, जबकि सरकार अपने फैसले को पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने वाला कदम बता रही है।


