By: Mala Mandal
जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत को संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखा जाता है। इस व्रत में महिलाएं निर्जला उपवास करती हैं और अगले दिन विधि-विधान से पूजा करने के बाद पारण करती हैं। साल 2026 में जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर को किया जाएगा। निर्जला व्रत के बाद पारण के समय क्या खाना चाहिए, इसे लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी-अपनी परंपराएं हैं। खासकर झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में पारण की थाली में पारंपरिक खाद्य पदार्थों को विशेष महत्व दिया जाता है। इनमें नोनी साग समेत कुछ चीजों को शुभ माना जाता है।

नोनी साग को क्यों माना जाता है खास?
जितिया पारण की पारंपरिक थाली में नोनी साग का विशेष उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसे व्रत के बाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है। कई जगहों पर महिलाएं पारण के भोजन में इसे जरूर शामिल करती हैं। नोनी साग को स्थानीय परंपराओं में शुद्ध और पौष्टिक भोजन का हिस्सा माना जाता है। हालांकि इसे खाने से संतान की आयु बढ़ने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसका महत्व मुख्य रूप से धार्मिक आस्था और पारंपरिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है।
1. नोनी साग
जितिया पारण की थाली में सबसे पहले नोनी साग को शामिल किया जाता है। इसे हल्के मसालों के साथ पकाकर खाया जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार नोनी साग को पारण के दिन खाना शुभ माना जाता है। निर्जला व्रत के बाद बहुत ज्यादा मसालेदार या तेल वाला भोजन करने के बजाय हल्के तरीके से तैयार साग लेना पेट के लिए भी अपेक्षाकृत बेहतर हो सकता है।

2. चूड़ा या हल्का अनाज
कई परिवारों में जितिया पारण के दौरान चूड़ा या हल्के अनाज से बने भोजन को शामिल करने की परंपरा है। इसे दही या हल्के व्यंजन के साथ लिया जा सकता है। हालांकि निर्जला व्रत के तुरंत बाद बहुत ज्यादा मात्रा में भोजन करने से बचना चाहिए। शुरुआत थोड़ी मात्रा से करना बेहतर रहता है।
3. दही
जितिया पारण की थाली में दही को भी शामिल किया जाता है। धार्मिक रूप से दही को शुभ और सात्विक भोजन माना जाता है। व्रत के बाद दही शरीर को ठंडक देने वाले भोजन के रूप में भी कई घरों में लिया जाता है। अगर किसी व्यक्ति को दूध या डेयरी उत्पादों से परेशानी होती है, तो पारण के समय दही लेने से पहले अपनी सहनशीलता का ध्यान रखना चाहिए।
4. मौसमी फल
पारण के बाद थाली में मौसमी फल शामिल करना भी अच्छा विकल्प हो सकता है। केला, सेब, पपीता या स्थानीय रूप से उपलब्ध अन्य फल लिए जा सकते हैं। लंबे समय तक उपवास के बाद फल शरीर को ऊर्जा और कुछ जरूरी पोषक तत्व देने में मदद कर सकते हैं। हालांकि बहुत अधिक मात्रा में एक साथ फल खाने से भी बचना चाहिए।
5. हल्का और सात्विक भोजन
जितिया पारण में घर की परंपरा के अनुसार चावल, दाल, सब्जी या अन्य सात्विक भोजन भी शामिल किया जा सकता है। कोशिश करें कि भोजन कम तेल और कम मसाले में तैयार किया गया हो। निर्जला व्रत के बाद शरीर को अचानक भारी भोजन देने के बजाय धीरे-धीरे सामान्य भोजन की ओर लौटना ज्यादा आरामदायक हो सकता है।

पारण के समय इन बातों का रखें ध्यान
जितिया व्रत के दौरान लंबे समय तक पानी और भोजन न लेने के बाद पारण करते समय जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। सबसे पहले पूजा और अपनी पारंपरिक विधि पूरी करें। इसके बाद पानी या उपयुक्त तरल पदार्थ थोड़ी मात्रा में लेकर शरीर को हाइड्रेट करना शुरू किया जा सकता है। इसके बाद हल्का भोजन लें और बहुत अधिक तला-भुना, मसालेदार या अत्यधिक भारी भोजन तुरंत न करें। अगर व्रत के दौरान चक्कर, कमजोरी या तबीयत खराब महसूस हुई हो तो विशेष सावधानी रखें।
क्या पारण में बहुत ज्यादा मीठा खाना चाहिए?
पारण के समय मिठाई या बहुत ज्यादा मीठा खाने से बचना बेहतर है। लंबे उपवास के बाद एक साथ अधिक चीनी वाला भोजन लेने से कुछ लोगों को पेट में परेशानी हो सकती है। अगर परिवार की परंपरा में प्रसाद या मिठाई शामिल है तो थोड़ी मात्रा में ग्रहण किया जा सकता है।

जितिया पारण की धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यता है कि जीवित्पुत्रिका व्रत संतान की लंबी आयु और उसके सुखी जीवन की कामना से रखा जाता है। व्रत के बाद पारण करके महिलाएं अपने संकल्प को पूरा करती हैं और भगवान जीमूतवाहन का स्मरण करती हैं। नोनी साग और अन्य पारंपरिक व्यंजनों को पारण की थाली में शामिल करने की परंपरा कई क्षेत्रों में पीढ़ियों से चली आ रही है। हालांकि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में पारण की विधि और भोजन अलग हो सकता है।
जितिया पारण में क्या न खाएं?
पारण के तुरंत बाद बहुत अधिक तला-भुना भोजन, अत्यधिक मसालेदार व्यंजन, बहुत ज्यादा मिठाई और भारी भोजन लेने से बचना बेहतर है। शराब या अन्य स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों से पूरी तरह दूरी रखें। अगर आपको पहले से गैस, एसिडिटी या पाचन संबंधी परेशानी रहती है तो पारण के भोजन को और हल्का रखना उचित रहेगा।

संतान की लंबी उम्र से जुड़ी मान्यता क्या है?
जितिया व्रत को लेकर धार्मिक मान्यता है कि माताएं संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से यह कठिन व्रत करती हैं। व्रत और पारण श्रद्धा तथा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाता है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी विशेष भोजन को खाने से संतान की आयु बढ़ने का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। भोजन का महत्व यहां मुख्य रूप से धार्मिक परंपरा और स्थानीय आस्था से जुड़ा है।
पारण की थाली में क्या-क्या रखें?
जितिया पारण के लिए आप अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार थाली में नोनी साग, चूड़ा या हल्का अनाज, दही, मौसमी फल और हल्का सात्विक भोजन शामिल कर सकती हैं। इसके साथ पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लेना भी जरूरी है।

अगर आपके घर में पारण को लेकर कोई विशेष परंपरा चली आ रही है, तो उसे प्राथमिकता दें क्योंकि जितिया व्रत की विधि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकती है।
जितिया व्रत का पारण महिलाओं के लिए धार्मिक और भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार पारण की थाली में नोनी साग समेत कई चीजों को विशेष स्थान दिया जाता है। हालांकि निर्जला व्रत के बाद भोजन करते समय धार्मिक परंपरा के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना जरूरी है। हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन लेकर पारण करना शरीर के लिए बेहतर हो सकता है।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक खान-पान और सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में जितिया व्रत तथा पारण की विधि अलग हो सकती है। किसी भोजन को संतान की लंबी उम्र का वैज्ञानिक कारण न मानें। यदि आपको कोई बीमारी है, गर्भावस्था है या व्रत के दौरान कमजोरी, चक्कर, उल्टी या अन्य परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।

