By: Mala Mandal
महाराष्ट्र के लातूर जिले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके और उनके साथियों के खिलाफ सरकारी स्कूल में बिना अनुमति प्रवेश करने, स्कूल की शैक्षणिक गतिविधियों में कथित तौर पर बाधा डालने और शिक्षकों को धमकाने के आरोप में FIR दर्ज की गई है। पुलिस कार्रवाई के बाद अभिजीत दीपके के चल रहे ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। मामले में दीपके समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, FIR में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके इन दिनों महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान चला रहे हैं। इसी अभियान के तहत उन्होंने लातूर जिले के औसा क्षेत्र के सरकारी और जिला परिषद स्कूलों का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की उपलब्धता, साफ-सफाई और विद्यार्थियों की स्थिति को लेकर कई सवाल उठाए थे। 20 अगस्त को लातूर के औसा क्षेत्र में एक जिला परिषद स्कूल के निरीक्षण के दौरान दीपके ने कथित तौर पर स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया था कि कुछ ऐसे बच्चे स्कूल में मौजूद थे, जिनके नाम स्कूल के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे। इसके अलावा उन्होंने स्कूल परिसर में शराब की खाली बोतलें मिलने का भी दावा किया था। इन दावों को लेकर स्कूल प्रशासन की ओर से अलग पक्ष भी सामने आया था।

FIR में क्या आरोप लगाए गए हैं?
अब इसी स्कूल दौरे को लेकर अभिजीत दीपके और उनके साथियों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज किया गया है। सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, दीपके और उनके साथियों पर सरकारी स्कूल में बिना अनुमति प्रवेश करने, स्कूल में हंगामा करने, शिक्षकों से विवाद करने और शैक्षणिक कार्य में कथित रूप से बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं। शिक्षकों को धमकाने का आरोप भी FIR से जुड़ी खबरों में सामने आया है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दीपके सरकारी स्कूलों की कमियों को सामने लाने के लिए अभियान चला रहे हैं। ऐसे में स्कूल परिसर में उनके प्रवेश और निरीक्षण के तरीके को लेकर अब कानूनी विवाद खड़ा हो गया है।

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत पहुंचे थे दीपके
अभिजीत दीपके ने हाल ही में महाराष्ट्र में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत वह सरकारी स्कूलों का दौरा कर वहां मौजूद बुनियादी सुविधाओं और व्यवस्थाओं का जायजा लेने का दावा कर रहे हैं। इससे पहले भी दीपके ने महाराष्ट्र के अलग-अलग सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्कूलों में उचित कक्षाओं, बेंच, शौचालय, पेयजल और सुरक्षित रास्तों जैसी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत पर जोर दिया है। लातूर दौरे के दौरान भी उन्होंने स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर कई आरोप लगाए थे। उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने की मांग की थी। साथ ही महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग भी की थी।

स्कूल प्रशासन ने आरोपों पर क्या कहा?
दीपके की ओर से लगाए गए कथित ‘फर्जी छात्रों’ के आरोपों पर स्कूल प्रशासन का पक्ष भी सामने आया। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल के प्रिंसिपल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एक ही इमारत में दो स्कूल संचालित होते हैं और वहां मौजूद विद्यार्थी वास्तविक छात्र थे। ऐसे में बच्चों की मौजूदगी को लेकर दीपके और स्कूल प्रशासन के दावों में अंतर दिखाई देता है। शराब की बोतलें मिलने और स्कूल की अन्य व्यवस्थाओं को लेकर लगाए गए दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। इसलिए इन आरोपों को अंतिम तथ्य के तौर पर देखना उचित नहीं होगा।

शिक्षकों से विवाद ने बढ़ाई मुश्किल
दीपके के स्कूल निरीक्षण के दौरान शिक्षकों से कथित विवाद की बात भी सामने आई है। इससे पहले उनके अभियान के दौरान एक अन्य सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों से कक्षा साफ कराने के आरोप को लेकर भी उन्होंने शिक्षकों से सवाल किए थे। उस मामले में शिक्षकों ने कथित तौर पर कहा था कि उन्होंने बच्चों को कक्षा साफ करने के लिए नहीं कहा था। अब लातूर में FIR दर्ज होने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि सरकारी स्कूलों की समस्याओं को सामने लाने के लिए चलाए जा रहे अभियान में नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किस तरह किया जाना चाहिए।

FIR के बाद आगे क्या?
FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस मामले की जांच करेगी। जांच में यह देखा जाएगा कि स्कूल परिसर में प्रवेश किस परिस्थिति में किया गया, क्या संबंधित लोगों के पास प्रवेश या निरीक्षण की अनुमति थी, शिक्षकों के साथ वास्तव में क्या हुआ और क्या शैक्षणिक गतिविधियों में कोई बाधा उत्पन्न हुई। FIR में किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में पुलिस जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।

अभियान और कानूनी कार्रवाई आमने-सामने
लातूर का यह विवाद सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति और उनके निरीक्षण के तरीके के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। एक तरफ अभिजीत दीपके सरकारी स्कूलों की कमियों को सामने लाने और सरकार से जवाब मांगने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्कूल परिसर में प्रवेश और शिक्षकों के साथ कथित व्यवहार को लेकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है।
अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या यह FIR ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को प्रभावित करती है। फिलहाल लातूर का यह मामला महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था, सरकारी स्कूलों की निगरानी और सामाजिक-राजनीतिक अभियानों के तौर-तरीकों को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
लातूर में अभिजीत दीपके समेत पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद विवाद और गहरा गया है। दीपके सरकारी स्कूलों की समस्याओं को उठाने के अपने अभियान पर कायम हैं, जबकि पुलिस अब उनके और उनके साथियों पर लगाए गए आरोपों की जांच करेगी। इस मामले में अंतिम स्थिति जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

