By: Mala Mandal
रांची। झारखंड में छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों की आवाज दबाने का काम कर रही है। बाबूलाल मरांडी ने सरकार से छात्रों के साथ हुए व्यवहार को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड में रोजगार और परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से छात्र परेशान हैं। छात्र अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन पर कार्रवाई करने का रास्ता चुना।
उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। छात्रों की आवाज सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन जिस तरह से आंदोलनरत छात्रों के साथ व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

BJP प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड के युवा लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं, नियुक्तियों और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। युवाओं ने मेहनत करके परीक्षा की तैयारी की है, लेकिन बार-बार विवादों और अनिश्चितताओं के कारण उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को छात्रों के सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि आंदोलन को दबाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं को नजरअंदाज करना सरकार के लिए आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकता है।

वहीं, इस पूरे मामले को लेकर राज्य की राजनीति भी गर्म हो गई है। BJP लगातार सरकार को घेर रही है और छात्र हितों को लेकर आंदोलन तेज करने की बात कह रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि झारखंड के युवाओं को रोजगार और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था चाहिए।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार को छात्रों के साथ संवाद करना चाहिए था। अगर किसी मुद्दे को लेकर छात्र सड़क पर उतर रहे हैं तो सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए और समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।

इधर, सत्तारूढ़ दल की ओर से विपक्ष के आरोपों पर जवाब दिया जा सकता है। सरकार का पक्ष है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और किसी भी स्थिति में नियमों का पालन जरूरी है।
झारखंड में पिछले कुछ समय से सरकारी नियुक्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर युवाओं में नाराजगी देखने को मिली है। छात्र संगठन लगातार परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, समय पर नियुक्ति और लंबित मामलों के समाधान की मांग करते रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में छात्र मुद्दा झारखंड की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष इसे युवाओं से जुड़ा मामला बताकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
बाबूलाल मरांडी के बयान के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। BJP ने साफ संकेत दिया है कि वह छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरती रहेगी।
अब देखने वाली बात होगी कि हेमंत सोरेन सरकार इस मामले पर क्या कदम उठाती है और क्या छात्रों की मांगों को लेकर कोई नई पहल की जाती है। फिलहाल झारखंड में छात्र आंदोलन और उसके राजनीतिक असर को लेकर माहौल गरम बना हुआ है।


