By: Mala Mandal
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर उठे विवाद के बीच JPSC और JSSC से जुड़ी जांच में कई गंभीर आरोप सामने आने की चर्चा तेज हो गई है। आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी का खेल सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि OMR शीट में कथित हेरफेर, नंबरों में बदलाव और इंटरव्यू प्रक्रिया तक प्रभाव डालने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियों की पड़ताल के बाद इस मामले ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि जांच के दौरान कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। आरोपों के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए परीक्षा परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। OMR शीट में बदलाव और मूल्यांकन प्रक्रिया में छेड़छाड़ जैसे आरोपों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।

भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप
झारखंड में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए JPSC और JSSC की परीक्षाएं बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इन परीक्षाओं के जरिए हजारों पदों पर नियुक्तियां होती हैं। ऐसे में अगर भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता होती है तो इसका सीधा असर मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों पर पड़ता है। जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, कुछ मामलों में परीक्षा परिणामों को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर सिस्टम का दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि कुछ लोगों ने पैसे के बदले चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की।

OMR शीट से लेकर इंटरव्यू तक सवालों के घेरे में
मामले में सबसे बड़ा आरोप OMR शीट से जुड़ा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में OMR शीट को सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर अभ्यर्थियों के अंक तय होते हैं। अगर इसमें किसी तरह की छेड़छाड़ होती है तो पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसके अलावा इंटरव्यू प्रक्रिया को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि कुछ अभ्यर्थियों को अंतिम चरण में लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोप कितने सही हैं और किन लोगों की भूमिका रही है।

करोड़ों रुपये की उगाही के आरोप
इस मामले में करोड़ों रुपये की कथित उगाही के आरोप भी चर्चा में हैं। आरोप है कि भर्ती में चयन कराने के नाम पर पैसे की मांग की गई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और पैसे का लेन-देन किस स्तर तक हुआ। अगर जांच में आरोप साबित होते हैं तो यह झारखंड की भर्ती व्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी तेज हो सकती है।

छात्रों में बढ़ी नाराजगी
JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर पहले भी कई बार छात्र संगठनों ने सवाल उठाए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्षों तक मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन अगर चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी होती है तो उनका भविष्य प्रभावित होता है। छात्र संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए ताकि योग्य उम्मीदवारों को उनका अधिकार मिल सके।

राजनीतिक मुद्दा बना भर्ती विवाद
JPSC-JSSC भर्ती विवाद अब राजनीतिक मुद्दा भी बनता जा रहा है। विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से भी जांच के आधार पर कार्रवाई की बात कही जा रही है। राजनीतिक दलों का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। वहीं सरकार का पक्ष है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा।

जांच से खुलेगा पूरा सच
फिलहाल जांच एजेंसियां मामले के हर पहलू की जांच कर रही हैं। OMR हेरफेर, पैसे के लेन-देन और चयन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी से जुड़े सभी बिंदुओं को खंगाला जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति के साथ कई और खुलासे होने की संभावना है।
JPSC-JSSC भर्ती विवाद ने एक बार फिर सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।


