By: Mala Mandal
देवघर। राजकीय श्रावणी मेला 2026 में देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच रहे हैं। मेले में उमड़ रही भारी भीड़ के बीच श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और सहायता को लेकर देवघर जिला प्रशासन लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में सूचना सह सहायता केंद्र की तत्परता और संवेदनशीलता का एक और उदाहरण सामने आया, जब माता-पिता से बिछड़े तीन वर्षीय मासूम बच्चे को कुछ ही समय में सुरक्षित उसके परिवार से मिला दिया गया। बताया गया कि मेला क्षेत्र में भ्रमण के दौरान तीन वर्षीय मासूम बच्चा अचानक अपने माता-पिता से अलग हो गया। भीड़ अधिक होने के कारण बच्चा अपने परिजनों से बिछड़ गया और अकेला होकर रोने लगा। बच्चे को रोता हुआ देखकर मेला ड्यूटी में तैनात कर्मियों की नजर उस पर पड़ी। कर्मियों ने तत्काल बच्चे को अपने संरक्षण में लिया और उसे सूचना सह सहायता केंद्र तक पहुंचाया।

रोते हुए बच्चे को कर्मियों ने संभाला
सूचना सह सहायता केंद्र में मौजूद कर्मियों ने सबसे पहले मासूम को ढांढस बंधाया। बच्चे को सुरक्षित स्थान पर बैठाकर उससे उसके माता-पिता और घर से संबंधित जानकारी लेने का प्रयास किया गया। हालांकि कम उम्र होने के कारण बच्चा अपने बारे में स्पष्ट जानकारी देने की स्थिति में नहीं था। ऐसे में प्रशासनिक टीम ने बिना समय गंवाए बच्चे के परिजनों की तलाश शुरू कर दी। बच्चे के माता-पिता तक सूचना पहुंचाने के लिए सूचना सह सहायता केंद्र से लगातार उद्घोषणा कराई गई। मेला क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर अनाउंसमेंट के माध्यम से बच्चे के परिजनों को सहायता केंद्र पहुंचने की जानकारी दी गई। प्रशासन की इस त्वरित पहल का परिणाम भी जल्द सामने आया।

बदहवास माता-पिता पहुंचे सहायता केंद्र
बच्चे के लापता होने के बाद उसके माता-पिता काफी परेशान होकर उसे जगह-जगह तलाश रहे थे। इसी दौरान उन्हें सूचना सह सहायता केंद्र से किए जा रहे उद्घोषणा की जानकारी मिली। इसके बाद वे तत्काल सहायता केंद्र पहुंचे। वहां अपने बच्चे को सुरक्षित देखकर माता-पिता की चिंता खुशी में बदल गई। प्रशासनिक कर्मियों ने आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चे को उसके माता-पिता को सुरक्षित सौंप दिया। अपने मासूम को दोबारा सही-सलामत पाकर परिजनों की आंखों में खुशी और भावुकता साफ दिखाई दी। बच्चे को अपनी गोद में लेते ही माता-पिता भावुक हो उठे और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के लिए आभार जताया।

मेला प्रशासन की तत्परता बनी सहारा
राजकीय श्रावणी मेला जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। ऐसे में बच्चों के अपने परिजनों से बिछड़ने की आशंका बनी रहती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से मेला क्षेत्र में सूचना सह सहायता केंद्रों की व्यवस्था की गई है, जहां श्रद्धालुओं को विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। मासूम बच्चे के माता-पिता से बिछड़ने की इस घटना में भी सहायता केंद्र ने महज सूचना दर्ज करने तक सीमित रहने के बजाय तत्काल कार्रवाई की। बच्चे को सुरक्षित संरक्षण में लेने, लगातार उद्घोषणा कराने और परिजनों की पहचान के बाद उसे उनके हवाले करने की पूरी प्रक्रिया तेजी से पूरी की गई।

श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा सहायता केंद्र
श्रावणी मेला के दौरान सूचना सह सहायता केंद्र श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सहायता व्यवस्था के रूप में काम कर रहा है। भीड़ के बीच रास्ता भटकने वाले श्रद्धालुओं, परिजनों से बिछड़ने वाले बच्चों और अन्य जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने में केंद्र की भूमिका अहम है। प्रशासन की ओर से लगातार श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि भारी भीड़ के दौरान छोटे बच्चों का विशेष ध्यान रखें। बच्चों को अपने साथ रखें और उनके कपड़ों अथवा जेब में परिवार के किसी सदस्य का मोबाइल नंबर या पहचान संबंधी जानकारी जरूर रखें, ताकि किसी अप्रिय स्थिति में उन्हें जल्द से जल्द परिजनों से मिलाया जा सके।

प्रशासन के मानवीय चेहरे की फिर हुई सराहना
राजकीय श्रावणी मेला 2026 के दौरान देवघर जिला प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर लगातार विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। इस घटना ने प्रशासन की व्यवस्था के साथ-साथ उसके मानवीय पक्ष को भी सामने रखा है। एक ओर जहां मेला क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और सुगम जलार्पण की व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक टीमें लगातार काम कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर किसी श्रद्धालु या बच्चे के सामने परेशानी आने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

तीन वर्षीय मासूम को सुरक्षित उसके माता-पिता तक पहुंचाए जाने की घटना से परिजनों ने राहत की सांस ली। भावुक माता-पिता ने देवघर जिला प्रशासन, सूचना सह सहायता केंद्र की पूरी टीम और मेला प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समय पर मिली सहायता के कारण उनका बच्चा सुरक्षित वापस मिल सका।

राजकीय श्रावणी मेला के दौरान सामने आई यह घटना बताती है कि भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता भी प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सूचना सह सहायता केंद्र की तत्परता से एक परिवार की चिंता कुछ ही समय में खुशी में बदल गई और मासूम बच्चा सुरक्षित अपनी मां-बाप की गोद में पहुंच गया।


