By: Mala Mandal
देवघर। सावन के पावन महीने में बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु और कांवरिया 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंच रहे हैं। इस आस्था की यात्रा में आम से लेकर खास तक हर कोई बाबा के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति का परिचय दे रहा है। इसी क्रम में भोजपुरी जगत की चर्चित गायिका और भोजपुरी सुपरस्टार निशा उपाध्याय भी पैदल कांवर यात्रा करते हुए बाबा धाम पहुंच रही हैं।

निशा उपाध्याय की कांवर यात्रा इन दिनों कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। खास बात यह है कि वह केवल एक श्रद्धालु के रूप में यात्रा नहीं कर रही हैं, बल्कि कांवरियों के बीच अपनी गायकी के जरिए भक्ति और उत्साह का माहौल भी बना रही हैं। कांवरिया पथ पर चलते हुए वह श्रद्धालुओं से मुलाकात कर रही हैं, उनकी बातें सुन रही हैं और भजन-गीतों के माध्यम से बाबा भोलेनाथ की भक्ति में रंग भर रही हैं।

निशा उपाध्याय का कहना है कि सावन के महीने में कांवरिया पथ पर सेवा करने का अवसर मिलना भी बाबा बैद्यनाथ की कृपा है। उनका मानना है कि कांवरिया पथ पर आने वाला हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में सेवा कर रहा है। कोई कांवरियों को पानी पिला रहा है, कोई फल और भोजन उपलब्ध करा रहा है तो कोई चिकित्सा और विश्राम की व्यवस्था में जुटा है। इसी सेवा भाव की कड़ी में उन्हें भी बाबा ने कांवरियों के बीच अपनी गायकी के जरिए सेवा करने का अवसर दिया है।
उन्होंने कहा कि बाबा बैद्यनाथ ने उन्हें जीवन में बहुत कुछ दिया है और बाबा के प्रति उनकी गहरी आस्था है। इसी श्रद्धा के कारण वह कई वर्षों से पैदल बाबा धाम की यात्रा करती आ रही हैं। उनके लिए यह यात्रा सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि बाबा भोलेनाथ के प्रति समर्पण और आस्था का प्रतीक है।

कांवरिया पथ पर निशा उपाध्याय को देखकर श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बड़ी संख्या में कांवरिया उनके साथ बातचीत करते नजर आ रहे हैं। वहीं, जब वह भजन या गीत प्रस्तुत करती हैं तो आसपास का माहौल भक्तिमय हो जाता है। कांवरिया भी उनके साथ भक्ति गीतों में शामिल होकर बाबा भोलेनाथ के जयकारे लगाते हैं। इससे लंबी और थकाऊ पैदल यात्रा के बीच कांवरियों का उत्साह और बढ़ जाता है।
निशा उपाध्याय ने कहा कि कांवरिया पथ पर आने के बाद उन्हें यह महसूस हो रहा है कि बाबा के भक्तों की आस्था कितनी मजबूत है। तेज धूप, बारिश और लंबी दूरी की परवाह किए बिना कांवरिया लगातार बाबा धाम की ओर बढ़ रहे हैं। उनके चेहरे पर थकान जरूर दिखाई देती है, लेकिन बाबा के दर्शन की इच्छा और आस्था उन्हें आगे बढ़ने की शक्ति देती है।

उन्होंने कांवरिया पथ पर सेवा में लगे तमाम सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवकों और शिविर संचालकों की भी सराहना की। उनका कहना है कि सावन के दौरान देवघर आने वाले कांवरियों की सेवा करना अपने आप में पुण्य का कार्य है। हजारों-लाखों श्रद्धालुओं के लिए रास्ते में भोजन, पानी, चिकित्सा, विश्राम और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले सेवा भाव से जुड़े लोगों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
इसी दौरान निशा उपाध्याय कांवरिया पथ पर लगे महामंडलेश्वर के सेवा शिविर में भी पहुंचीं। यहां उन्होंने महामंडलेश्वर राजेश्वरी नंद गिरी से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। शिविर में पहुंचने पर दोनों के बीच धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर बातचीत भी हुई। निशा उपाध्याय ने महामंडलेश्वर से आशीर्वाद लेकर बाबा बैद्यनाथ की यात्रा को आगे जारी रखा।

महामंडलेश्वर के शिविर में देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले कांवरियों और श्रद्धालुओं का लगातार पहुंचना जारी है। ऐसे में निशा उपाध्याय के पहुंचने से शिविर में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच भी उत्साह देखने को मिला। उन्होंने कहा कि बाबा की नगरी में आने वाले हर श्रद्धालु की अपनी एक आस्था और अपनी एक कहानी है। कोई मनोकामना लेकर आता है तो कोई बाबा के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए यात्रा करता है।
बाबा बैद्यनाथ धाम की प्रसिद्ध कांवर यात्रा हर वर्ष देशभर के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है। सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर कांवरिया करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी करते हुए देवघर पहुंचते हैं और बाबा बैद्यनाथ मंदिर में जलार्पण करते हैं। इस दौरान पूरा कांवरिया पथ बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहता है।

इस वर्ष भी सावन के दौरान कांवरिया पथ पर आस्था और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन और जलार्पण के लिए आगे बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सामाजिक संगठन, स्वयंसेवक और विभिन्न सेवा शिविर कांवरियों की सुविधा में जुटे हैं। इसी माहौल के बीच भोजपुरी गायिका निशा उपाध्याय का पैदल कांवर यात्रा करना और अपनी गायकी के माध्यम से कांवरियों की सेवा करना श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

निशा उपाध्याय का कहना है कि बाबा की कृपा से उन्हें गायकी के क्षेत्र में पहचान मिली और अब उसी कला के माध्यम से बाबा के भक्तों की सेवा करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इससे बड़ी खुशी उनके लिए और कुछ नहीं हो सकती। बाबा बैद्यनाथ की नगरी में पैदल पहुंचना और कांवरियों के साथ भक्ति के रंग में रंगना उनके लिए आध्यात्मिक अनुभव है।

कांवरिया पथ पर उनकी मौजूदगी और भजनों की गूंज ने यात्रा के माहौल को और भक्तिमय बना दिया है। श्रद्धालुओं के बीच उनका यह रूप यह संदेश भी दे रहा है कि बाबा की भक्ति में कोई बड़ा या छोटा नहीं होता। हर व्यक्ति अपनी क्षमता और सामर्थ्य के अनुसार बाबा और उनके भक्तों की सेवा कर सकता है। निशा उपाध्याय भी अपनी गायकी और पैदल यात्रा के माध्यम से इसी सेवा और समर्पण की भावना को आगे बढ़ा रही हैं।

