By:Vikash Kumar Raut (Vicky)
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति को लेकर मामला अब गंभीर हो गया है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से साफ तौर पर पूछा है कि आयोग में खाली पड़े पदों को कब तक भरा जाएगा। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह 10 सितंबर तक नियुक्ति की समयसीमा की जानकारी दे। JPSC जैसे संवैधानिक संस्थान में लंबे समय से पद खाली रहने को लेकर हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि आयोग के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति जल्द जरूरी है। आयोग राज्य में प्रशासनिक सेवाओं सहित कई महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन करता है, ऐसे में शीर्ष पदों पर रिक्तियां रहने से भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

JPSC की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा असर
झारखंड लोक सेवा आयोग राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में अधिकारियों की नियुक्ति के लिए परीक्षाओं का आयोजन करता है। अध्यक्ष और सदस्यों की भूमिका आयोग के निर्णयों, परीक्षा संचालन और चयन प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण होती है।
पद खाली रहने से उम्मीदवारों के बीच भी चिंता बढ़ रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग में स्थायी नेतृत्व होने से भर्ती प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता आती है।

हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से जवाब

हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि JPSC अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गई है और नियुक्ति प्रक्रिया कब तक पूरी होगी। कोर्ट ने सरकार को निर्धारित समय में स्पष्ट जानकारी देने का निर्देश दिया है। अदालत का यह रुख इस बात का संकेत है कि संवैधानिक संस्थाओं में लंबे समय तक रिक्त पदों को लेकर न्यायपालिका गंभीर है। कोर्ट ने पहले भी कहा है कि ऐसे संस्थानों को प्रभावी तरीके से काम करने के लिए पूर्ण क्षमता के साथ संचालित होना चाहिए।

नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने की तैयारी

नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से JPSC में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। नियुक्ति के लिए योग्य नामों पर विचार किया जा रहा है। सरकार के सामने चुनौती यह है कि जल्द से जल्द ऐसे अधिकारियों और विशेषज्ञों का चयन किया जाए, जो आयोग की जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से संभाल सकें।

अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता
JPSC की विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों की नजर अब सरकार के फैसले पर है। छात्रों का कहना है कि आयोग में स्थायी अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति होने से परीक्षा कैलेंडर, परिणाम और नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी आ सकती है। पिछले कुछ समय से झारखंड में सरकारी नियुक्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर युवाओं में नाराजगी भी देखने को मिली है। ऐसे में JPSC में स्थायी व्यवस्था बनाना सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

JPSC में पारदर्शिता और भरोसे की चुनौती
झारखंड लोक सेवा आयोग पहले भी विभिन्न कारणों से चर्चा में रहा है। परीक्षा प्रक्रिया, परिणाम में देरी और नियुक्तियों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के बाद आयोग के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से परीक्षाओं का संचालन करना होगी। राज्य सरकार को अब 10 सितंबर तक हाईकोर्ट को यह बताना होगा कि JPSC में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कब तक पूरी होगी।

JPSC में खाली पड़े शीर्ष पदों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सरकार पर जल्द निर्णय लेने का दबाव बढ़ गया है। 10 सितंबर तक सरकार की ओर से दी जाने वाली जानकारी पर सभी की नजरें टिकी हैं। अगर समय पर नियुक्तियां होती हैं तो आयोग की कार्यप्रणाली को मजबूती मिलेगी और राज्य में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं को भी गति मिल सकती है।


