By: Mala Mandal
रांची/सिमडेगा: झारखंड की पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वरिष्ठ नेत्री विमला प्रधान का शुक्रवार को निधन हो गया। उन्होंने रांची स्थित सैमफोर्ड अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। विमला प्रधान सिमडेगा विधानसभा क्षेत्र से दो बार भाजपा की विधायक रह चुकी थीं और झारखंड सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी थीं। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद सिमडेगा समेत पूरे झारखंड में शोक की लहर है। भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और उनके परिचितों ने उनके निधन पर दुख जताया है।

सिमडेगा से दो बार चुनी गईं विधायक
विमला प्रधान का राजनीतिक जीवन सिमडेगा विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा रहा। वर्ष 2009 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर सिमडेगा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा पहुंचीं। इसके बाद वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने सिमडेगा सीट से जीत हासिल की और लगातार दूसरी बार विधायक बनीं। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों को विधानसभा में उठाया। वर्ष 2017 में उन्हें झारखंड विधानसभा की ओर से उत्कृष्ट विधायक के सम्मान के लिए भी चुना गया था। दो बार विधायक रहने के दौरान सिमडेगा क्षेत्र से जुड़े ग्रामीण और सामाजिक मुद्दे उनके सार्वजनिक जीवन का हिस्सा रहे।

सामाजिक कार्य से शुरू हुआ था सफर
विमला प्रधान ने सक्रिय राजनीति में आने से पहले सामाजिक कार्यों के जरिए सार्वजनिक जीवन में कदम रखा था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 1989 से सामाजिक क्षेत्र में काम करना शुरू किया। इसके बाद वर्ष 1994 में वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़ीं और संगठनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सिमडेगा क्षेत्र में सक्रिय रहीं। सामाजिक कार्यों से राजनीति तक पहुंचने के बाद उन्होंने चुनावी राजनीति में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2009 में पहली बार विधायक बनने के बाद उनका राजनीतिक सफर और आगे बढ़ा और उन्हें राज्य सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी मिली।

झारखंड सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी
विमला प्रधान ने झारखंड सरकार में मंत्री के तौर पर भी काम किया। उनके पास समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास और पर्यटन जैसे विभागों की जिम्मेदारी रही। इन विभागों के जरिए सामाजिक कल्याण, महिला एवं बाल विकास और पर्यटन से जुड़े विषय उनके कार्यक्षेत्र का हिस्सा रहे। मंत्री और विधायक के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान सिमडेगा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में रहे। उनके राजनीतिक सफर में सामाजिक सरोकार और क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर सक्रियता प्रमुख रही।

विधानसभा में उठाया भूमिहीन परिवारों का मुद्दा
विमला प्रधान के निधन के बाद उनके विधानसभा कार्यकाल से जुड़े कई कार्यों को याद किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने सिमडेगा क्षेत्र के भूमिहीन मलहार परिवारों के लिए जमीन बंदोबस्ती का मुद्दा विधानसभा में उठाया था। उनके सवाल के बाद सिमडेगा सदर और केरसई प्रखंड में रहने वाले भूमिहीन मलहार परिवारों से जुड़े जमीन बंदोबस्ती के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। यह मुद्दा उनके क्षेत्रीय सरोकारों से जुड़ी राजनीतिक सक्रियता का एक उदाहरण माना जा रहा है। उनके निधन के बाद स्थानीय स्तर पर लोग उनके द्वारा उठाए गए ऐसे मुद्दों को याद कर रहे हैं।

राजनीति से बाहर रहने के बाद भी क्षेत्र से जुड़ाव
वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद विमला प्रधान विधानसभा की राजनीति से बाहर हो गईं, लेकिन सिमडेगा क्षेत्र से उनका जुड़ाव बना रहा। वह सामाजिक गतिविधियों और स्थानीय समस्याओं को लेकर सक्रिय नजर आती थीं। ग्रामीण इलाकों में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुनने का सिलसिला भी जारी रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2026 में भी विमला प्रधान सिमडेगा के जलडेगा प्रखंड स्थित टिकरा गांव पहुंची थीं। वहां उन्होंने ग्रामीणों के बीच बैठकर बिजली, सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी समस्याओं के बारे में जानकारी ली थी। इससे उनके राजनीतिक पद से दूर रहने के बाद भी क्षेत्र के लोगों से संपर्क बने रहने की तस्वीर सामने आती है।

भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक
विमला प्रधान के निधन की खबर से भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक का माहौल है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने विमला प्रधान के निधन को भाजपा और झारखंड के लिए क्षति बताते हुए उनके सार्वजनिक जीवन में योगदान को याद किया। विमला प्रधान के निधन से सिमडेगा की राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर सार्वजनिक जीवन शुरू करने के बाद विधायक और फिर मंत्री तक का सफर तय करने वाली विमला प्रधान ने लंबे समय तक क्षेत्र की राजनीति में अपनी भूमिका निभाई।

सिमडेगा की राजनीति में छोड़ी पहचान
विमला प्रधान का राजनीतिक सफर कई वर्षों तक सिमडेगा से जुड़ा रहा। दो बार विधानसभा चुनाव जीतने, राज्य सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभालने और सामाजिक मुद्दों को लेकर सक्रिय रहने के कारण उनका नाम सिमडेगा की राजनीति से जुड़ा रहा। उनके निधन की खबर के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ क्षेत्र के लोगों में भी शोक है। सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान, ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ाव और विधानसभा में उठाए गए स्थानीय मुद्दों को उनके राजनीतिक सफर के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में याद किया जा रहा है।

रांची के अस्पताल में उनके निधन के साथ झारखंड भाजपा की एक वरिष्ठ नेत्री और सिमडेगा की पूर्व विधायक एवं मंत्री का लंबा सार्वजनिक जीवन समाप्त हो गया। उनके निधन से परिवार, समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच शोक का माहौल है।

