By: Mala Mandal
रांची: झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ी योजना का ऐलान किया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा है कि राज्य में करीब 900 करोड़ रुपये की लागत से AYUSH मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा। इस प्रस्तावित संस्थान के जरिए आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करने की योजना है। स्वास्थ्य मंत्री के इस ऐलान के बाद झारखंड में AYUSH चिकित्सा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सरकार की योजना यदि निर्धारित रूप में आगे बढ़ती है तो इससे राज्य में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी शिक्षा, प्रशिक्षण और उपचार की सुविधाओं को विस्तार मिल सकता है।

900 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा मेडिकल कॉलेज
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के अनुसार, झारखंड में AYUSH मेडिकल कॉलेज के निर्माण पर करीब 900 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है। इतने बड़े निवेश के जरिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त संस्थान विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। AYUSH का अर्थ आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी चिकित्सा पद्धतियों से है। देश में इन पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को संस्थागत रूप से बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग स्तर पर मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और शोध संस्थान विकसित किए जा रहे हैं। झारखंड में प्रस्तावित AYUSH मेडिकल कॉलेज भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मेडिकल शिक्षा को मिलेगा नया प्लेटफॉर्म
झारखंड में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में लगातार विस्तार देखने को मिला है। ऐसे में AYUSH मेडिकल कॉलेज की स्थापना से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में उच्च शिक्षा हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए नया विकल्प उपलब्ध हो सकता है। कॉलेज में अलग-अलग AYUSH पद्धतियों से संबंधित शिक्षा और प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित किए जाने की संभावना है। इससे राज्य के विद्यार्थियों को अपने ही राज्य में इन चिकित्सा प्रणालियों से संबंधित उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है। इसके अलावा ऐसे संस्थान से शिक्षकों, चिकित्सकों, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा
AYUSH चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग देश में लंबे समय से होता रहा है। आयुर्वेद और योग जैसी प्रणालियों को लेकर लोगों की रुचि भी लगातार बनी हुई है। सरकार की ओर से इन पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। झारखंड में AYUSH मेडिकल कॉलेज बनने के बाद आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी से जुड़ी चिकित्सा व्यवस्था को संस्थागत आधार मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किसी भी बड़े मेडिकल संस्थान की सफलता के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रशिक्षित चिकित्सक, आधुनिक प्रयोगशालाएं, पर्याप्त अस्पताल सुविधाएं और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।

स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की उम्मीद
झारखंड में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। ऐसे में राज्य में नए मेडिकल संस्थानों का विस्तार स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर सकता है। AYUSH मेडिकल कॉलेज के साथ यदि अस्पताल और क्लीनिकल प्रशिक्षण की बेहतर व्यवस्था विकसित होती है, तो विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव मिलने के साथ मरीजों को भी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में AYUSH सेवाओं का विस्तार करने की दिशा में भी यह संस्थान भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रोजगार और शोध के अवसर भी बढ़ सकते हैं
900 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश से बनने वाले संस्थान का प्रभाव केवल मेडिकल शिक्षा तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। मेडिकल कॉलेज के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बन सकते हैं। इसके साथ ही आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में शोध को बढ़ावा मिलने की संभावना है। झारखंड की स्थानीय औषधीय वनस्पतियों और पारंपरिक उपचार संबंधी ज्ञान पर भी वैज्ञानिक अध्ययन की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं। यदि शोध, शिक्षा और उपचार को एक ही संस्थान के स्तर पर विकसित किया जाता है तो यह झारखंड में AYUSH क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकता है।

सरकार के सामने बड़ी जिम्मेदारी
AYUSH मेडिकल कॉलेज की घोषणा के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण चरण इसके क्रियान्वयन का होगा। करीब 900 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए भूमि, वित्तीय स्वीकृति, निर्माण, संस्थागत ढांचा, पाठ्यक्रम, मान्यता, फैकल्टी और अस्पताल संबंधी व्यवस्थाओं को निर्धारित नियमों के अनुसार पूरा करना होगा। साथ ही यह भी जरूरी होगा कि मेडिकल कॉलेज में विद्यार्थियों और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध हों। सरकार की योजना जमीन पर किस गति से उतरती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए अहम घोषणा
कुल मिलाकर, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी द्वारा झारखंड में करीब 900 करोड़ रुपये की लागत से AYUSH मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का ऐलान राज्य की स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी घोषणा है। इससे AYUSH चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने, मेडिकल शिक्षा के नए अवसर पैदा करने, रोजगार बढ़ाने और शोध को प्रोत्साहन देने की संभावनाएं बन सकती हैं।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित AYUSH मेडिकल कॉलेज की परियोजना किस स्थान पर विकसित होती है, इसका विस्तृत स्वरूप क्या होगा और निर्माण कार्य कब शुरू होता है। आने वाले चरणों में इन पहलुओं की जानकारी सामने आने के साथ परियोजना की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

