By: Mala Mandal
देवघर। जिले के मोहनपुर अंचल अंतर्गत सरकारी जमीन से जुड़े विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। बिवाही गांव निवासी दिनेश लाल ने जमीन से संबंधित शिकायत के बाद कथित तौर पर फोन पर गाली-गलौज, दबाव बनाने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने इस मामले में रिखिया थाना प्रभारी को लिखित आवेदन दिया, लेकिन अब तक प्राथमिकी दर्ज किए जाने की सूचना नहीं मिली है। इसके बाद उन्होंने देवघर के पुलिस अधीक्षक और संबंधित पुलिस पदाधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। दिनेश लाल ने अपने आवेदन में पूरे मामले की जांच, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा, कथित धमकी से जुड़े कॉल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों और पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सरकारी जमीन से संबंधित शिकायत से शुरू हुआ मामला
शिकायतकर्ता दिनेश लाल के अनुसार, मामला मोहनपुर अंचल के मौजा सरैया की जमीन से जुड़ा है। उन्होंने अपने आवेदन में मौजा संख्या 450, खाता संख्या 13 तथा लगभग 94 एकड़ 85 डिसमिल जमीन का उल्लेख किया है। उनका दावा है कि उक्त जमीन के संबंध में उन्होंने 14 अक्टूबर 2026 को मोहनपुर अंचलाधिकारी के कार्यालय में लिखित आवेदन देकर जांच की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने अंचल कार्यालय से जमीन की वास्तविक स्थिति, उसके उपयोग तथा संबंधित अभिलेखों की जांच कराने का अनुरोध किया था। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि जमीन पर किसी प्रकार की घेराबंदी, मिट्टी या बालू का भंडारण, निर्माण अथवा अन्य व्यावसायिक गतिविधि की जा रही है या नहीं। दिनेश लाल का कहना है कि उन्होंने संबंधित जमीन के उपयोग और उसके संबंध में कथित रूप से दिए गए आदेशों की वैधता स्पष्ट करने की मांग भी की थी। इसके बाद मामले को लेकर विवाद बढ़ने का आरोप लगाया गया है।

फोन पर धमकी देने का आरोप
दिनेश लाल ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि 17 अक्टूबर 2026 की शाम लगभग 7:41 बजे और 7:52 बजे उन्हें दो फोन कॉल आए। शिकायत में इन कॉलों को मौजा सरैया के प्रधान समीर सिकदर से संबंधित बताया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बातचीत के दौरान उनसे आवेदन वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। उन्होंने गाली-गलौज करने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दिए जाने की बात भी कही है। दिनेश लाल के अनुसार, इस घटना के बाद वह मानसिक रूप से परेशान हैं और उन्हें अपने तथा परिवार के सदस्यों की सुरक्षा को लेकर चिंता है। उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों से कथित फोन कॉल का विवरण, उपलब्ध रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में संबंधित व्यक्ति का पक्ष उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्थापित हो सकेगी।

रिखिया थाना में आवेदन देने के बाद एसपी से गुहार
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने कथित धमकी की घटना के संबंध में रिखिया थाना प्रभारी को लिखित शिकायत दी थी। इसके बावजूद प्राथमिकी दर्ज होने की सूचना नहीं मिलने पर उन्होंने पुलिस अधीक्षक, देवघर और पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। अपने आवेदन में दिनेश लाल ने अनुरोध किया है कि उनके मूल शिकायत पत्र पर तत्काल संज्ञान लिया जाए तथा प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने के कारणों की समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा है कि यदि शिकायत में संज्ञेय अपराध के तथ्य पाए जाते हैं, तो कानून के अनुसार प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष एवं समयबद्ध अनुसंधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कथित धमकी से संबंधित कॉल विवरण, रिकॉर्डिंग, संदेश और अन्य उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नियमानुसार सुरक्षित रखने की मांग भी की है। इसके अलावा, शिकायतकर्ता ने मामले की कार्रवाई की स्थिति उन्हें लिखित रूप में उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

अंचलाधिकारी से मांगी गई जांच रिपोर्ट की प्रति
दिनेश लाल ने 14 अक्टूबर 2026 को मोहनपुर अंचलाधिकारी को दिए गए आवेदन के संबंध में अलग से जानकारी भी मांगी है। दस्तावेजों के अनुसार, उन्होंने अंचल कार्यालय से संबंधित जमीन की जांच के लिए किए गए स्थल निरीक्षण की रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। आवेदन में यह जानने की मांग की गई है कि जांच के दौरान जमीन पर घेराबंदी, मिट्टी या बालू का भंडारण, निर्माण अथवा अन्य व्यावसायिक गतिविधि से संबंधित क्या तथ्य सामने आए। साथ ही, उन्होंने यह भी पूछा है कि जांच के दौरान मौजा प्रधान का बयान दर्ज किया गया था या नहीं। शिकायतकर्ता ने संबंधित जमीन के संबंध में किसी प्रकार का अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी), अनुमति अथवा आदेश जारी किए जाने की स्थिति में उसकी प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने जमीन के उपयोग के लिए किसी किराया या लाइसेंस शुल्क के निर्धारण तथा सरकारी खाते में राशि जमा किए जाने की स्थिति स्पष्ट करने का भी अनुरोध किया है। उनका कहना है कि सरकारी जमीन सार्वजनिक संपत्ति है और इसके उपयोग से जुड़े मामलों में पारदर्शिता आवश्यक है। इसलिए जमीन के राजस्व अभिलेखों, स्थल निरीक्षण और संबंधित व्यक्तियों के बयान के आधार पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग
दिनेश लाल ने अपने आवेदन में कहा है कि वह किसी व्यक्ति को बिना जांच दोषी घोषित करने की मांग नहीं कर रहे हैं। उनकी मांग है कि उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही, अनुचित दबाव या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों से सरकारी जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने, कथित धमकी की जांच करने तथा अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर उचित कदम उठाने का अनुरोध किया है। फिलहाल, इस मामले में पुलिस प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया, प्राथमिकी की वर्तमान स्थिति और संबंधित जमीन के संबंध में अंचल कार्यालय की जांच रिपोर्ट सामने आना महत्वपूर्ण होगा। इन तथ्यों के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अब देखना होगा कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर पुलिस और प्रशासन क्या कदम उठाते हैं तथा सरकारी जमीन से जुड़े विवाद की जांच में कौन-से तथ्य सामने आते हैं।



