By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
Aaj Ka Panchang 17 September 2026: आज 17 सितंबर 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ कन्या संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। सूर्य आज सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश कर रहे हैं। पंचांग के अनुसार आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि सुबह तक रहेगी और इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू हो जाएगी। आज अनुराधा नक्षत्र के बाद ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। आज का दिन भगवान विष्णु की पूजा, गुरुवार व्रत, स्नान-दान और धार्मिक कार्यों के लिए भी विशेष माना जा रहा है। विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर कारखानों, दुकानों, प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों में मशीनों, औजारों और उपकरणों की पूजा करने की परंपरा है।

17 सितंबर 2026 का पंचांग एक नजर में
दिन: गुरुवार
तारीख: 17 सितंबर 2026
मास: भाद्रपद
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: षष्ठी सुबह लगभग 10:48 बजे तक, इसके बाद सप्तमी
नक्षत्र: अनुराधा, इसके बाद ज्येष्ठा
चंद्र राशि: वृश्चिक
सूर्य राशि: कन्या
पर्व: विश्वकर्मा पूजा, कन्या संक्रांति
व्रत: गुरुवार व्रत
सूर्योदय: लगभग 6:17 बजे
सूर्यास्त: लगभग 6:25 बजे
चंद्रोदय: लगभग 11:47 बजे
चंद्रास्त: लगभग 10:28 बजे

आज है विश्वकर्मा पूजा
17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को दिव्य वास्तुकार और निर्माण-कौशल से जुड़ा देवता माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से इंजीनियर, कारीगर, मिस्त्री, मैकेनिक, फैक्ट्री कर्मचारी, मशीनरी से जुड़े लोग और व्यवसायी अपने औजारों तथा मशीनों की पूजा करते हैं। पूजा के लिए सबसे पहले कार्यस्थल या दुकान की अच्छी तरह सफाई करें। भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके दीपक जलाएं। इसके बाद फूल, अक्षत, फल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। मशीनों और औजारों की भी विधिवत पूजा की जाती है।

आज मनाई जा रही है कन्या संक्रांति
आज सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश कर रहे हैं। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को कन्या संक्रांति कहा जाता है। संक्रांति के दिन स्नान, दान और धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करने से पुण्य प्राप्त होता है। नदी, तालाब या किसी पवित्र स्थान पर स्नान करने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है।

गुरुवार व्रत और भगवान विष्णु की पूजा
आज गुरुवार होने के कारण भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। गुरुवार व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले फल, चने की दाल, गुड़ और केले आदि अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद विष्णु मंत्र का जाप और आरती की जा सकती है।
आज का शुभ मुहूर्त
17 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त लगभग 11:57 बजे से 12:45 बजे तक बताया गया है। इस समय को कई पंचांगों में शुभ कार्यों के लिए उपयोगी माना जाता है। विश्वकर्मा पूजा के लिए अलग-अलग स्थानों और पंचांग पद्धतियों के अनुसार शुभ समय में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए पूजा करने वाले लोग स्थानीय सूर्योदय और अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार समय का मिलान कर सकते हैं।

सर्वार्थ सिद्धि योग कब है?
पंचांग गणना के अनुसार आज अनुराधा नक्षत्र से संबंधित सर्वार्थ सिद्धि योग का समय सुबह से शाम तक बताया गया है। एक प्रकाशित पंचांग के अनुसार यह योग लगभग सुबह 6:17 बजे से शाम 7:53 बजे तक रहने का उल्लेख है। सर्वार्थ सिद्धि योग को धार्मिक मान्यताओं में शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। हालांकि किसी विशेष संस्कार, विवाह, गृह प्रवेश या बड़े मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग और ज्योतिषीय गणना देखना उचित रहता है।
आज का राहुकाल
17 सितंबर 2026 को राहुकाल के समय को लेकर अलग-अलग पंचांगों में कुछ मिनटों का अंतर दिखाई देता है। एक गणना में दोपहर 1:52 बजे से 3:23 बजे तक, जबकि अन्य गणना में करीब 1:47 बजे से 3:19 बजे तक राहुकाल बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में नए और महत्वपूर्ण शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। नियमित पूजा-पाठ और पहले से चल रहे कार्यों पर इसका प्रभाव अलग-अलग परंपराओं में अलग माना जाता है।

आज का दिशाशूल
गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा का दिशाशूल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि आज दक्षिण दिशा की ओर लंबी यात्रा करनी हो तो यात्रा से पहले उचित उपाय करने की परंपरा है। कई लोग यात्रा से पहले भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं और शुभ वस्तु का सेवन करके यात्रा शुरू करते हैं। दिशाशूल से जुड़े उपाय अलग-अलग परंपराओं में अलग बताए गए हैं।
आज के दिन क्या करें?
आज सुबह स्नान करके सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु और भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करें। विश्वकर्मा पूजा करने वाले लोग अपने कार्यस्थल, दुकान या मशीनरी की सफाई करके विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं। कन्या संक्रांति के अवसर पर जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान किया जा सकता है। गुरुवार व्रत रखने वाले श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा करके पीले रंग की वस्तुओं का दान कर सकते हैं।

आज क्या न करें?
राहुकाल में नए और महत्वपूर्ण शुभ कार्य शुरू करने से बचने की धार्मिक मान्यता है। बिना पूरी जानकारी के कोई बड़ा आर्थिक निर्णय लेने से भी बचना बेहतर है। पूजा-पाठ में जल्दबाजी न करें और अपनी परंपरा तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार विधि का पालन करें।
आज का पंचांग क्यों है खास?
17 सितंबर 2026 को एक ही दिन विश्वकर्मा पूजा, कन्या संक्रांति और गुरुवार का संयोग बन रहा है। सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश के कारण आज संक्रांति का धार्मिक महत्व बढ़ जाता है, वहीं विश्वकर्मा पूजा के कारण यह दिन मशीनरी, औजारों, निर्माण और तकनीकी कार्यों से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है।

धार्मिक मान्यता: पंचांग में बताए गए शुभ-अशुभ समय ज्योतिषीय और धार्मिक गणनाओं पर आधारित होते हैं। अलग-अलग शहरों, सूर्योदय के समय और पंचांग पद्धति के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। महत्वपूर्ण धार्मिक संस्कार या विशेष पूजा के लिए स्थानीय पंचांग/पुरोहित से समय की पुष्टि करना उचित है।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पंचांग गणनाओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। इसे किसी वैज्ञानिक तथ्य या निश्चित भविष्यवाणी के रूप में न लें। पूजा-व्रत और धार्मिक अनुष्ठान अपनी श्रद्धा, परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार करें।

