By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
Aaj Ka Panchang 4 September 2026: आज 4 सितंबर 2026, शुक्रवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है। आज देशभर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार आज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस दिन व्रत रखने और रात में निशिता काल में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष संबंध माना जाता है। ऐसे में भक्तों के लिए आज का दिन पूजा-पाठ, व्रत, भजन-कीर्तन और कान्हा की आराधना के लिहाज से विशेष है।

अगर आप भी आज कोई शुभ काम करने की योजना बना रहे हैं या जन्माष्टमी की पूजा का सही समय जानना चाहते हैं तो पंचांग में दिए गए तिथि, नक्षत्र, योग, राहुकाल और शुभ मुहूर्त पर एक नजर जरूर डालें।
4 सितंबर 2026 का पंचांग
दिन: शुक्रवार
तिथि: कृष्ण पक्ष अष्टमी
अष्टमी तिथि समाप्त: 5 सितंबर की मध्यरात्रि करीब 12:13 बजे
इसके बाद: नवमी तिथि प्रारंभ
नक्षत्र: रोहिणी
रोहिणी नक्षत्र समाप्त: रात करीब 11:04 बजे
इसके बाद: मृगशिरा नक्षत्र
चंद्र राशि: वृषभ
सूर्य राशि: सिंह
मास: भाद्रपद
पक्ष: कृष्ण पक्ष
ऋतु: वर्षा
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
पर्व: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
आज के पंचांग में अष्टमी तिथि रात तक रहने वाली है और रोहिणी नक्षत्र भी रात तक प्रभावी रहेगा। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के कारण मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर संभव है।

आज का सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय: सुबह करीब 6:00 बजे
सूर्यास्त: शाम करीब 6:39 बजे
चंद्रोदय: रात करीब 11:23 बजे
चंद्रास्त: अगले दिन दोपहर करीब 1:09 बजे
जन्माष्टमी के दिन चंद्रमा की स्थिति और रात्रि के पूजा समय को भी विशेष महत्व दिया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए निशिता काल को प्रमुख माना जाता है।

आज के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:45 बजे से 6:27 बजे तक
प्रातः संध्या: सुबह 6:06 बजे से 7:10 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 1:23 बजे से 2:16 बजे तक
विजय मुहूर्त: शाम 4:03 बजे से 4:56 बजे तक
अमृत काल: शाम 6:42 बजे से रात 8:13 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:57 बजे से देर रात 12:43 बजे तक
जन्माष्टमी पूजा के लिए निशिता काल सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इसी दौरान भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा, अभिषेक, श्रृंगार, भोग और आरती की जाती है।

जन्माष्टमी पर कब करें श्रीकृष्ण की पूजा?
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा मध्यरात्रि के समय करने की परंपरा है। इस वर्ष भी 4 सितंबर की रात निशिता काल में पूजा का विशेष समय रहेगा। शहर के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। गया के लिए उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार निशिता पूजा का समय रात 11:26 बजे से 5 सितंबर की रात 12:12 बजे तक है। इस दौरान भक्त लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाते हैं, उनका श्रृंगार करते हैं और माखन-मिश्री, फल तथा अन्य प्रसाद का भोग लगाते हैं। इसके बाद भगवान की आरती और जन्मोत्सव मनाया जाता है।

आज का राहुकाल कब है?
4 सितंबर 2026 को शुक्रवार होने के कारण राहुकाल दिन के अलग-अलग स्थानों के अनुसार बदल सकता है। दिल्ली आधारित पंचांग में राहुकाल सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक बताया गया है, जबकि अन्य स्थानीय पंचांगों में समय में कुछ अंतर मिलता है। राहुकाल के दौरान ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार किसी नए और महत्वपूर्ण काम की शुरुआत करने से बचा जाता है। हालांकि नियमित पूजा-पाठ और पहले से चल रहे धार्मिक कार्यों पर इसका समान प्रभाव नहीं माना जाता।

आज के अशुभ समय
यमगंड: सुबह करीब 7:10 बजे से 8:50 बजे तक
गुलिक काल: सुबह करीब 10:30 बजे से 12:10 बजे तक
दुर्मुहूर्त: स्थान के अनुसार समय में अंतर
वर्ज्य: स्थान और पंचांग के अनुसार समय अलग हो सकता है
इन समयों में नए शुभ कार्य शुरू करने से पहले स्थानीय पंचांग देखकर निर्णय लेना बेहतर माना जाता है। पंचांग की गणना स्थान के अनुसार बदलती है, इसलिए अपने शहर के अनुसार समय देखना अधिक सटीक रहता है।

आज क्यों खास है 4 सितंबर का दिन?
4 सितंबर 2026 को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा और व्रत का विशेष महत्व है। भक्त दिनभर उपवास रखकर भगवान का स्मरण करते हैं और रात में श्रीकृष्ण जन्म के समय पूजा-अर्चना करते हैं। कई पंचांग और ज्योतिषीय स्रोत इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग को विशेष बता रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था।

जन्माष्टमी पर क्या करें?
आज सुबह स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें।
सामर्थ्य के अनुसार व्रत या फलाहार करें।
घर के मंदिर में लड्डू गोपाल का विशेष श्रृंगार करें।
भगवान को माखन-मिश्री, फल और पंचामृत का भोग लगाएं।
दिनभर कृष्ण नाम का जाप, भजन और गीता पाठ करें।
रात में निशिता काल में विधि-विधान से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाएं।
पूजा के बाद आरती करके प्रसाद परिवार और अन्य भक्तों में बांटें।

पंचांग क्यों देखा जाता है?
हिंदू धर्म में किसी दिन की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय, सूर्यास्त और विभिन्न मुहूर्तों की जानकारी के लिए पंचांग देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में किए गए कार्यों को सकारात्मक माना जाता है, जबकि राहुकाल जैसे समय में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की परंपरा है। इसलिए पूजा-पाठ, व्रत, धार्मिक अनुष्ठान या किसी महत्वपूर्ण शुभ कार्य की योजना बनाते समय स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उपयोगी माना जाता है।

जरूरी बात
पंचांग के मुहूर्त और राहुकाल के समय अलग-अलग शहरों में सूर्योदय-सूर्यास्त के अंतर के कारण कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। इसलिए यदि आप किसी विशेष शहर में पूजा या शुभ कार्य करने जा रहे हैं, तो वहां के स्थानीय पंचांग के समय को प्राथमिकता दें।
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध पंचांग गणनाओं पर आधारित है। अलग-अलग स्थानों और पंचांगों के अनुसार तिथि एवं मुहूर्त के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में लें। किसी भी महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय विद्वान या पंडित से सलाह लेना उचित है।
