By: Mala Mandal
Aaj Ka Panchang 5 August 2026: हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, गृह प्रवेश, विवाह, वाहन खरीद, निवेश या नए कार्य की शुरुआत से पहले पंचांग देखकर शुभ और अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल, अभिजित मुहूर्त, दिशा शूल और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का विस्तृत विवरण होता है। आज बुधवार, 5 अगस्त 2026 का दिन भगवान गणेश और भगवान विष्णु की पूजा के लिए शुभ माना गया है। आइए जानते हैं आज का संपूर्ण पंचांग और दिनभर के शुभ-अशुभ मुहूर्त।

आज का पंचांग – 5 अगस्त 2026
दिन – बुधवार
माह – श्रावण
पक्ष – कृष्ण पक्ष
तिथि – सप्तमी तिथि रात 8 बजकर 42 मिनट तक, इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ
नक्षत्र – अश्विनी नक्षत्र रात 9 बजकर 18 मिनट तक, इसके बाद भरणी नक्षत्र

चंद्रमा – मेष राशि में
सूर्य – कर्क राशि में
विजय मुहूर्त – दोपहर 2 बजकर 41 मिनट से दोपहर 3 बजकर 50 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त – दोपहर लगभग 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक
राहुकाल – दोपहर 12 बजकर 27 मिनट से दोपहर 2 बजकर 8 मिनट तक
दिशा शूल – उत्तर दिशा

आज का शुभ समय
आज का विजय मुहूर्त महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत, सरकारी कार्य, इंटरव्यू, व्यापारिक निर्णय और नए समझौते के लिए शुभ माना गया है। अभिजित मुहूर्त भी अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि किसी कारणवश अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो तो इस समय में कई शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

राहुकाल में क्या न करें
राहुकाल को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है। इस अवधि में नया व्यापार शुरू करना, यात्रा आरंभ करना, निवेश करना या किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि नियमित पूजा-पाठ और भगवान का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है।

आज का धार्मिक महत्व
श्रावण मास का प्रत्येक दिन भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। बुधवार होने के कारण भगवान गणेश की पूजा का भी विशेष महत्व है। श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और गणेश जी की पूजा कर सुख, समृद्धि और विघ्नों से मुक्ति की कामना कर सकते हैं। आज सप्तमी तिथि के बाद अष्टमी तिथि का प्रारंभ भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

दिशा शूल
आज उत्तर दिशा में दिशा शूल रहेगा। यदि अत्यंत आवश्यक न हो तो इस दिशा में यात्रा करने से बचें। यदि यात्रा करना जरूरी हो तो परंपरागत मान्यताओं के अनुसार शुभ उपाय अपनाकर यात्रा प्रारंभ करें।

यह पंचांग वैदिक ज्योतिषीय गणनाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। विभिन्न स्थानों के अनुसार तिथि, मुहूर्त और समय में कुछ मिनटों का अंतर संभव है। किसी भी महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान या शुभ कार्य से पहले स्थानीय पंचांग अथवा योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य करें।


