By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
Aaj Ka Panchang 9 August 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार आज 9 अगस्त 2026, रविवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है। आज सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है और इसी दिन कामिका एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी का सनातन धर्म में विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने तथा व्रत रखने से भक्तों को पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ तुलसी दल अर्पित करने, विष्णु मंत्र का जाप करने और जरूरतमंद लोगों को दान देने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी का व्रत मन और इंद्रियों पर नियंत्रण रखने तथा भगवान विष्णु के प्रति भक्ति समर्पित करने का अवसर माना जाता है।
आज का पंचांग
दिन: रविवार
तारीख: 9 अगस्त 2026
मास: सावन
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: एकादशी
व्रत: कामिका एकादशी
नक्षत्र: मृगशिरा
ऋतु: वर्षा ऋतु
अयन: दक्षिणायन
पंचांग गणना के अनुसार आज एकादशी तिथि सुबह करीब 11:04 बजे तक रहने के बाद द्वादशी तिथि शुरू होगी।

कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व
कामिका एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और व्रत करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ मिलता है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी करते हैं। कामिका एकादशी पर सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, फल, तुलसी दल और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। शाम के समय भगवान विष्णु की आरती और भजन-कीर्तन करने की भी परंपरा है।

आज का राहुकाल
9 अगस्त 2026 को रविवार होने के कारण राहुकाल शाम के समय रहेगा। पंचांग के अनुसार आज राहुकाल शाम 5:26 बजे से शाम 7:06 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार राहुकाल में नए शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
आज का अभिजीत मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में माना जाता है। इस दौरान किए गए शुभ कार्यों को विशेष फलदायी माना जाता है। हालांकि अभिजीत मुहूर्त और अन्य शुभ समय स्थान के सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार बदल सकते हैं, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित रहेगा।

कामिका एकादशी व्रत पारण कब करें?
कामिका एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण किया जाता है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार 10 अगस्त 2026 को व्रत पारण का समय सुबह के समय रहेगा। रांची, झारखंड के लिए उपलब्ध गणना में पारण का समय लगभग सुबह 5:23 बजे से 8:00 बजे तक बताया गया है। हालांकि पारण का समय शहर के अनुसार बदल सकता है। इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण का सही समय देखना चाहिए। पारण द्वादशी तिथि और निर्धारित पारण अवधि को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

कामिका एकादशी पर क्या करें?
कामिका एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान की साफ-सफाई करने के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। भगवान को पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम या भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया जा सकता है। इस दिन अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। रात के समय भगवान विष्णु का स्मरण और भजन-कीर्तन करने की भी धार्मिक परंपरा है।

कामिका एकादशी पर किन बातों का रखें ध्यान?
एकादशी व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही उपवास करना चाहिए। निर्जला व्रत हर व्यक्ति के लिए आवश्यक नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या, कमजोरी या किसी बीमारी की स्थिति में व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। एकादशी के दिन सात्विक भोजन, भगवान विष्णु का स्मरण और सकारात्मक विचारों पर ध्यान देने की धार्मिक परंपरा है। व्रत का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग करना नहीं बल्कि मन को संयमित रखना और ईश्वर की भक्ति में समय लगाना भी माना जाता है।

आज क्यों खास है 9 अगस्त?
9 अगस्त 2026 को कामिका एकादशी पड़ने के कारण आज का दिन भगवान विष्णु के भक्तों के लिए विशेष है। सावन मास में भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ एकादशी के अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालु आज व्रत, पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य के माध्यम से धार्मिक आस्था प्रकट कर सकते हैं।

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणनाओं पर आधारित है। अलग-अलग शहरों और पंचांग पद्धतियों के अनुसार तिथि, मुहूर्त, राहुकाल और पारण के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या व्रत से संबंधित निर्णय लेने से पहले स्थानीय पंचांग या विद्वान की सलाह जरूर लें।

