By: Mala Mandal
देवघर। निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया और मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों को लेकर देवघर जिला कांग्रेस कमेटी ने सोमवार को शहर में पैदल मार्च निकाला। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की। इस दौरान निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची की समीक्षा और निर्वाचन आयोग की आईटी प्रणाली एवं डेटा प्रबंधन की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई गई।

सोमवार, 28 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 12 बजे गांधी प्रतिमा के समक्ष टावर चौक से पैदल मार्च शुरू हुआ। कांग्रेस कार्यकर्ता अंबेडकर चौक होते हुए समाहरणालय तक पहुंचे। कार्यक्रम की अध्यक्षता देवघर जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष राजेंद्र दास ने की। मार्च के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

SIR प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा की मांग
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया सीधे नागरिकों के मताधिकार से जुड़ी हुई है। ऐसे में इस पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र, पारदर्शी और व्यापक समीक्षा जरूरी है। कांग्रेस की ओर से मांग की गई कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और उचित सत्यापन के बिना मतदाता सूची से प्रभावित न हो। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए नाम हटाने, जोड़ने या संशोधित करने से पहले संबंधित नागरिकों को प्रभावी आपत्ति और सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए।

निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल
पैदल मार्च के दौरान कांग्रेस की ओर से निर्वाचन आयोग की संस्थागत कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए गए। कांग्रेस द्वारा उपलब्ध कराए गए AICC परिपत्र में उल्लेखित जानकारी का हवाला देते हुए कहा गया कि पिछले दस महीनों के दौरान दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त से संबंधित निर्णयों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज किए जाने का उल्लेख है। कांग्रेस ने कहा कि इस तरह की आपत्तियों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर उत्पन्न सवालों का समाधान हो सके। पार्टी ने निर्वाचन आयोग की संस्थागत कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने की मांग की।

IT प्रणाली और डेटा प्रबंधन की जांच की मांग
कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की आईटी प्रणाली और डेटा प्रबंधन के केंद्रीकरण को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी की ओर से कहा गया कि निर्वाचन संबंधी आईटी प्रणाली, मतदाता डेटा के प्रबंधन और उसके केंद्रीकरण की स्वतंत्र तकनीकी एवं संस्थागत समीक्षा कराई जानी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े डिजिटल डेटा की सुरक्षा, पारदर्शिता और प्रबंधन लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए इस व्यवस्था की स्वतंत्र समीक्षा से संबंधित आशंकाओं और सवालों को स्पष्ट किया जा सकता है।

मतदाता सूची में बदलावों की व्यापक समीक्षा की मांग
कांग्रेस ने मतदाता सूची में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों की व्यापक और स्वतंत्र समीक्षा की भी मांग की। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने अथवा संशोधन की प्रत्येक कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया, आवश्यक सत्यापन और प्रभावित नागरिकों को उचित अवसर प्रदान करने के बाद ही की जानी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची की शुचिता लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता है। किसी भी पात्र नागरिक का मताधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए और किसी भी अपात्र नाम को हटाने की प्रक्रिया भी निर्धारित नियमों के तहत होनी चाहिए।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ जांच की मांग
देवघर जिला कांग्रेस कमेटी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की। कांग्रेस ने उनके पद से हटाए जाने और उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की व्यापक समीक्षा की मांग भी रखी। इसके साथ ही कांग्रेस ने SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा, निर्वाचन आयोग की आईटी प्रणाली एवं डेटा प्रबंधन के केंद्रीकरण की स्वतंत्र तकनीकी जांच तथा मतदाताओं को आपत्ति और सुनवाई का प्रभावी अवसर सुनिश्चित करने की मांग की।

सात सूत्री मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
देवघर जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से महामहिम के समक्ष सात प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच, उनके कार्यकाल में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की व्यापक समीक्षा, SIR प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा, निर्वाचन आयोग की आईटी प्रणाली एवं डेटा प्रबंधन के केंद्रीकरण की तकनीकी एवं संस्थागत जांच और मतदाता सूची में बदलाव से पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन प्रमुख है। इसके अलावा कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की संस्थागत कार्यप्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही मजबूत करने और पूरे मामले की समीक्षा के बाद निष्कर्ष तथा आवश्यक कार्रवाई को सार्वजनिक करने की मांग की।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भारत का लोकतंत्र स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय निर्वाचन प्रक्रिया पर आधारित है। मतदाता सूची की शुचिता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा इस व्यवस्था का मूल आधार है। इसलिए निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े इन मुद्दों पर आवश्यक संवैधानिक एवं संस्थागत हस्तक्षेप होना चाहिए।
पैदल मार्च के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। टावर चौक से शुरू हुआ मार्च अंबेडकर चौक होते हुए समाहरणालय पहुंचा, जहां कांग्रेस की ओर से अपनी मांगों को सामने रखा गया।

