By: Vikash Kumar (Vicky)

गले में खराश, खांसी और दर्द जैसी समस्या अक्सर वायरल बुखार या सर्दी-जुकाम के बाद कुछ दिनों तक परेशान कर सकती है। बुखार ठीक होने के बाद भी कई लोगों को गले में सूखापन, जलन, निगलने में परेशानी या लगातार खांसी की शिकायत रहती है। मौसम में बदलाव, ठंडी हवा, धूल-मिट्टी और शरीर में पानी की कमी भी गले की परेशानी को बढ़ा सकती है।
ऐसे में दवाओं के साथ-साथ कुछ आसान घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय भी गले को आराम पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इन उपायों को बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। अगर गले का इंफेक्शन लगातार बढ़ रहा है, तेज बुखार दोबारा आ रहा है या सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

बुखार के बाद क्यों बनी रहती है गले की खराश और खांसी?
वायरल संक्रमण के दौरान गले और श्वसन तंत्र की अंदरूनी परत में सूजन और जलन हो सकती है। संक्रमण ठीक होने के बाद भी यह संवेदनशीलता कुछ समय तक बनी रह सकती है। इसी वजह से बुखार उतर जाने के बाद भी खांसी, गले में खराश या बार-बार गला साफ करने की इच्छा हो सकती है।
कुछ मामलों में नाक से निकलने वाला म्यूकस गले के पीछे जाने की वजह से भी खांसी बनी रह सकती है। इसे पोस्ट-नेजल ड्रिप कहा जाता है। वहीं, पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीने पर गला सूखने लगता है और खराश ज्यादा महसूस हो सकती है।

गले को राहत देने के लिए गुनगुने पानी का सेवन
गले में खराश होने पर गुनगुना पानी धीरे-धीरे पीना राहत देने वाला उपाय हो सकता है। इससे गले में नमी बनी रहती है और सूखेपन की वजह से होने वाली जलन कम महसूस हो सकती है। दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें।
बहुत ज्यादा गर्म पानी पीने से बचें, क्योंकि इससे गले की संवेदनशील त्वचा को नुकसान हो सकता है।

शहद से मिल सकती है खांसी में राहत
आयुर्वेद और पारंपरिक घरेलू देखभाल में शहद का इस्तेमाल गले को आराम देने के लिए किया जाता रहा है। एक चम्मच शहद को धीरे-धीरे लेने से गले की जलन और खांसी में कुछ लोगों को राहत मिल सकती है।
हालांकि, एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए। डायबिटीज वाले लोगों को भी शहद का सेवन करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लेना बेहतर है।
अदरक का इस्तेमाल भी हो सकता है उपयोगी
अदरक का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से सर्दी-जुकाम और गले से जुड़ी परेशानियों में किया जाता है। अदरक को पानी में उबालकर हल्का गुनगुना होने पर पी सकते हैं। चाहें तो इसमें थोड़ी मात्रा में शहद मिलाया जा सकता है।
अदरक का बहुत अधिक सेवन करने से कुछ लोगों को पेट में जलन या एसिडिटी की समस्या हो सकती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही लें।

मुलेठी से गले को मिल सकती है राहत
मुलेठी का इस्तेमाल आयुर्वेद में गले से जुड़ी कई परेशानियों में किया जाता है। गले में खराश या आवाज बैठने की स्थिति में मुलेठी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से किया जाता है। हालांकि, मुलेठी हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होती।
खासकर हाई ब्लड प्रेशर, किडनी या हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों को मुलेठी का सेवन बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान भी इसके इस्तेमाल से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।
गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करें
गले की खराश में गुनगुने नमक वाले पानी से गरारे करना एक आसान घरेलू उपाय है। इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ी मात्रा में नमक डालकर गरारे किए जा सकते हैं।
गरारे करते समय पानी को निगलने के बजाय बाहर निकाल दें। इससे गले में जमा म्यूकस को साफ करने और सूजन व जलन में राहत महसूस करने में मदद मिल सकती है।

भाप लेने से बंद नाक और गले की परेशानी में आराम
अगर गले की खराश के साथ नाक बंद है या सर्दी-जुकाम के लक्षण हैं, तो सामान्य भाप लेने से कुछ लोगों को अस्थायी राहत मिल सकती है। भाप लेते समय बहुत गर्म पानी से बचें और जलने के जोखिम को ध्यान में रखें।
छोटे बच्चों को गर्म पानी की भाप देते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। जलने का खतरा होने के कारण बच्चों के आसपास गर्म पानी का इस्तेमाल न करें।

हल्दी वाला दूध कब लें?
हल्दी का इस्तेमाल भारतीय घरों में लंबे समय से पारंपरिक घरेलू उपाय के तौर पर किया जाता रहा है। रात में हल्के गुनगुने दूध में थोड़ी हल्दी मिलाकर लिया जा सकता है। इससे शरीर को गर्माहट महसूस हो सकती है और गले में आराम मिल सकता है।
अगर दूध पीने से कफ, पेट की परेशानी या एलर्जी बढ़ती है, तो इसे लेने से बचें।
गले के इंफेक्शन में इन चीजों से बनाएं दूरी
गले में खराश और खांसी के दौरान बहुत ठंडी चीजों, धूम्रपान, शराब और धूल-धुएं से बचना बेहतर है। बहुत ज्यादा मसालेदार या तला-भुना खाना भी कुछ लोगों में गले की जलन बढ़ा सकता है।
इसके अलावा आवाज पर ज्यादा जोर देने से बचें। पर्याप्त नींद और आराम लेने से शरीर को संक्रमण से उबरने में मदद मिलती है।

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
अगर बुखार ठीक होने के बाद फिर से तेज बुखार आने लगे, गले का दर्द लगातार बढ़ता जाए, निगलने या सांस लेने में परेशानी हो, गले में ज्यादा सूजन दिखाई दे, सीने में दर्द हो या खांसी कई दिनों तक लगातार बनी रहे, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच करवाएं।
अगर खांसी के साथ खून आए, सांस फूलने लगे या व्यक्ति की हालत तेजी से बिगड़ रही हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में संक्रमण के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित रहता है।
बुखार के बाद गले में खराश, हल्की खांसी और सूखापन कुछ समय तक रह सकता है। गुनगुना पानी, नमक के पानी से गरारे, शहद, अदरक और पर्याप्त आराम जैसे आसान उपाय गले को अस्थायी राहत देने में मदद कर सकते हैं। लेकिन अगर लक्षण गंभीर हैं या लगातार बने हुए हैं, तो सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी या घरेलू नुस्खे का लंबे समय तक सेवन करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और पारंपरिक आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपायों के बारे में जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी बीमारी का चिकित्सकीय निदान या इलाज न मानें। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति, एलर्जी और चल रही दवाओं को ध्यान में रखें। गंभीर, लगातार या बढ़ते हुए लक्षणों में योग्य डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
