By: Vikash, Mala Mandal
सिंह द्वार के पास एकदिवसीय धरना, पुरोहितों ने कहा—“व्यवस्था सुधार में साथ थे, हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं”
देवघर, झारखंड: विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम की व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों के बीच चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। शुक्रवार को इस मुद्दे को लेकर तीर्थ पुरोहितों ने सिंह द्वार के समीप एकदिवसीय धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुरोहित मौजूद रहे और हस्ताक्षर अभियान चलाकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।

धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे तीर्थ पुरोहित प्रकाश शांडिल्य ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वर्षों से मंदिर व्यवस्था में तीर्थ पुरोहित और प्रशासन मिलकर श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने का कार्य करते आए हैं। लेकिन हाल के दिनों में प्रशासन द्वारा लिए जा रहे फैसले एकतरफा और “तुगलकी फरमान” जैसे प्रतीत हो रहे हैं, जिससे पुरोहितों के अधिकारों और परंपराओं में हस्तक्षेप हो रहा है।

प्रकाश शांडिल्य ने कहा, “हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधार को लेकर है। हमने हमेशा प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य किया है, लेकिन अब हमारे कार्यक्षेत्र में लगातार दखल दिया जा रहा है। संकल्प कहां और कैसे होगा, यह निर्णय तीर्थ पुरोहितों का अधिकार है, न कि प्रशासन का।”

धरना के दौरान पुरोहितों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर मंदिर परिसर में अनावश्यक नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा भवन और परिसर के ऊपर से भी हस्तक्षेप करने की कोशिश की जा रही है, जिससे परंपरागत पूजा-पाठ और धार्मिक प्रक्रियाओं में बाधा उत्पन्न हो रही है।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान पुरोहितों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अगले चार दिनों के भीतर मंदिर व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया और उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

धरना स्थल पर मौजूद अन्य तीर्थ पुरोहितों ने भी प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उनके अधिकारों का मुद्दा नहीं है, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। यदि व्यवस्था में समन्वय नहीं रहेगा, तो इसका सीधा असर श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ेगा।
धरना के दौरान चलाए गए हस्ताक्षर अभियान में कई पुरोहितों और स्थानीय लोगों ने भाग लिया। इस अभियान का उद्देश्य प्रशासन तक अपनी बात को मजबूती से पहुंचाना और यह दिखाना था कि इस मुद्दे पर व्यापक समर्थन मौजूद है।

ज्ञात हो कि बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर की व्यवस्था को लेकर किसी भी प्रकार का विवाद प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों के बीच समन्वय की आवश्यकता को दर्शाता है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, प्रशासन मंदिर परिसर में व्यवस्था को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से कुछ नए नियम लागू कर रहा है, लेकिन इन नियमों को लेकर तीर्थ पुरोहितों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जल्द ही समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।
अब देखना होगा कि अगले चार दिनों के भीतर प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों के बीच कोई सहमति बनती है या फिर यह विवाद और गहराता है। यदि समाधान नहीं निकला, तो देवघर में मंदिर व्यवस्था को लेकर बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है, जिसका असर पूरे क्षेत्र की धार्मिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।

