By: Mala Mandal
देवघर नगर निगम क्षेत्र में सफाईकर्मियों के आंदोलन और उससे जुड़े विवाद के बीच समाजसेवी बाबा बलियासे ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सफाईकर्मियों के पक्ष में खुलकर समर्थन जताया है। अपने निजी आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सफाईकर्मियों द्वारा विरोध के दौरान जो स्थिति बनी, उसकी नैतिक जिम्मेदारी वह स्वयं लेते हैं क्योंकि वे खुद को सफाईकर्मियों का संरक्षक मानते हैं।

प्रेस वार्ता के दौरान बाबा बलियासे ने कहा कि आंदोलन के दौरान शहर की सड़कों और प्रमुख स्थानों पर फैले कचरे की वजह से आम लोगों को परेशानी हो सकती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने स्वयं सड़क पर उतरकर कचरा उठाया और उसे डस्टबिन में डलवाया। उनका कहना था कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का राजनीतिक संदेश देना नहीं था, बल्कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था को बनाए रखना और नागरिकों को राहत पहुंचाना था।
उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का असर आम जनता पर नहीं पड़ना चाहिए और इसी सोच के साथ उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर सफाई अभियान में हिस्सा लिया। बाबा बलियासे ने कहा कि समाज के हर वर्ग की समस्याओं को सुनना और जरूरत पड़ने पर उनके साथ खड़ा होना सामाजिक दायित्व का हिस्सा है।

सफाईकर्मियों की मांगों को बताया महत्वपूर्ण
प्रेस वार्ता के दौरान बाबा बलियासे ने सफाईकर्मियों की समस्याओं को भी गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से कर्मचारी अपने वेतन, बकाया भुगतान और अन्य श्रम संबंधी मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। यदि कर्मचारी अपनी समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हैं तो उसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार होना चाहिए ताकि ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों। उनका मानना है कि किसी भी संस्थान की व्यवस्था उसके कर्मचारियों के संतुलित और संतुष्ट होने पर निर्भर करती है।

एफआईआर दर्ज करने के फैसले पर जताई आपत्ति
बाबा बलियासे ने प्रेस वार्ता के दौरान सफाईकर्मियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्हें मामले की पूरी कानूनी जानकारी नहीं है, लेकिन उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उन्हें नहीं लगता कि यह ऐसा मामला है जिसमें गरीब कर्मचारियों पर आपराधिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर विरोध करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और कर्मचारियों को अपनी बात रखने का अधिकार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि विरोध के तरीके पर चर्चा हो सकती है, लेकिन सीधे आपराधिक मामला दर्ज करना समाधान नहीं माना जाना चाहिए।

उनका कहना था कि प्रशासन को पूरे मामले को मानवीय दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित पक्ष आपसी संवाद से स्थिति को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
“मैंने खुद उठाया कचरा, क्योंकि शहर हमारा है”
प्रेस वार्ता के दौरान बाबा बलियासे ने कहा कि शहर की स्वच्छता केवल प्रशासन या कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के सभी लोगों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने सड़क पर कचरा फैला देखा तो उन्होंने इंतजार करने के बजाय खुद पहल करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि यदि समाज का हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे तो कई समस्याओं का समाधान आसानी से निकाला जा सकता है। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि किसी भी परिस्थिति में सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें।

प्रशासन और कर्मचारियों के बीच संवाद की जरूरत
बाबा बलियासे ने कहा कि वर्तमान स्थिति को टकराव के बजाय संवाद के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि कर्मचारियों की समस्याओं को सुनकर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए, वहीं कर्मचारियों से भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान बातचीत और आपसी समझ से ही संभव है। उनका मानना है कि यदि दोनों पक्ष सकारात्मक पहल करें तो जल्द ही स्थिति सामान्य हो सकती है।

देवघर में सफाईकर्मियों के आंदोलन के बीच बाबा बलियासे का यह बयान अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर उन्होंने सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए खुद मैदान में उतरने की बात कही, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों पर दर्ज एफआईआर का विरोध कर प्रशासन से संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील की है। आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर प्रशासन और संबंधित पक्षों का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

