By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
कनाडा में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी मजबूती से उठाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया ने पिछली सदी में दो विनाशकारी विश्व युद्धों का सामना किया है और करोड़ों लोगों के बलिदान के बाद विश्व समुदाय ने शांति, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाएं विकसित कीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में दुनिया कई नई चुनौतियों का सामना कर रही है। क्षेत्रीय संघर्ष, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, आतंकवाद, साइबर खतरों और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता जैसी समस्याएं अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग करती हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना होगा।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया
प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से उन भारतीय नाविकों और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया जो दुनिया के विभिन्न समुद्री क्षेत्रों में कार्यरत हैं। हाल के वर्षों में लाल सागर, अरब सागर और अन्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर बढ़ते सुरक्षा खतरों के कारण कई देशों के जहाज प्रभावित हुए हैं। इन घटनाओं ने वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय नाविक वैश्विक समुद्री व्यापार की रीढ़ हैं और दुनिया के अनेक व्यापारिक जहाजों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी देशों से समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाने की अपील की।

वैश्विक शांति के लिए सहयोग जरूरी
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली सदी के दो विश्व युद्धों ने मानवता को भारी नुकसान पहुंचाया था। लाखों लोगों की जान गई और कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं तबाह हो गईं। इन त्रासदियों से सीख लेते हुए दुनिया ने संयुक्त राष्ट्र सहित कई वैश्विक संस्थाओं और व्यवस्थाओं का निर्माण किया ताकि भविष्य में ऐसे संघर्षों को रोका जा सके।

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि विश्व समुदाय उन मूल्यों को और मजबूत करे जो शांति, संवाद और सहयोग को बढ़ावा देते हैं। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि किसी भी विवाद का समाधान युद्ध नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से खोजा जाना चाहिए।
समुद्री सुरक्षा का वैश्विक अर्थव्यवस्था से सीधा संबंध
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों के माध्यम से संचालित होता है। यदि समुद्री मार्ग असुरक्षित हो जाते हैं तो इसका असर पूरी दुनिया की आपूर्ति श्रृंखला और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऊर्जा आपूर्ति, खाद्यान्न परिवहन और औद्योगिक उत्पादों की आवाजाही सीधे तौर पर समुद्री सुरक्षा पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि समुद्री डकैती, आतंकवादी गतिविधियां और क्षेत्रीय संघर्ष अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। इसलिए सभी देशों को मिलकर समुद्री सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
जी-7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी को भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। भले ही भारत जी-7 समूह का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने और वैश्विक दक्षिण की मजबूत आवाज बनने के कारण भारत को लगातार ऐसे महत्वपूर्ण मंचों पर आमंत्रित किया जाता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाकर प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल भारत के हितों की रक्षा की है बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा के व्यापक मुद्दे को भी अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में लाने का प्रयास किया है।

ट्रंप की मौजूदगी में संदेश का विशेष महत्व
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में यह मुद्दा उठाना रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका विश्व की प्रमुख समुद्री शक्तियों में शामिल है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में भारत द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाना दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक संकेत माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में नाविकों की सुरक्षा और समुद्री मार्गों की रक्षा जैसे विषय दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े हुए हैं।

जी-7 शिखर सम्मेलन 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक शांति, स्थिरता और सहयोग का संदेश देते हुए भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा मजबूती से उठाया। उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि युद्ध और संघर्ष मानवता के लिए विनाशकारी साबित होते हैं तथा शांति और सहयोग ही स्थायी विकास का आधार हैं। समुद्री सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता पर भारत की यह स्पष्ट और सक्रिय भूमिका अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की बढ़ती प्रतिष्ठा और प्रभाव को दर्शाती है।


