By: Mala Mandal
बच्चों में अचानक दौरे पड़ना माता-पिता के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति होती है। अधिकांश लोग यह मान लेते हैं कि बच्चे को दौरा पड़ने का मतलब मिर्गी (एपिलेप्सी) है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा हर बार नहीं होता। बच्चों में दौरे पड़ने के पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। कई मामलों में यह समस्या अस्थायी होती है, जबकि कुछ स्थितियों में गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है। इसलिए सही जानकारी और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है।

दौरा या सीजर उस स्थिति को कहा जाता है जब मस्तिष्क में अचानक असामान्य विद्युत गतिविधि शुरू हो जाती है। इसके कारण बच्चे के शरीर में झटके आ सकते हैं, शरीर अकड़ सकता है, आंखें ऊपर की ओर पलट सकती हैं या बच्चा कुछ समय के लिए बेहोश हो सकता है। दौरे की गंभीरता और अवधि अलग-अलग हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चों में तेज बुखार के कारण भी दौरे पड़ सकते हैं। इसे फेब्राइल सीजर कहा जाता है। यह समस्या आमतौर पर 6 महीने से 5 वर्ष तक के बच्चों में देखने को मिलती है। शरीर का तापमान तेजी से बढ़ने पर बच्चे को दौरा आ सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि उसे मिर्गी हो।

इसके अलावा मस्तिष्क में संक्रमण, सिर में गंभीर चोट, ब्लड शुगर का बहुत कम होना, शरीर में कैल्शियम या सोडियम की कमी, जन्मजात न्यूरोलॉजिकल समस्याएं और कुछ दुर्लभ आनुवंशिक रोग भी दौरे का कारण बन सकते हैं। इसलिए केवल एक बार दौरा पड़ने पर मिर्गी का निष्कर्ष निकालना सही नहीं माना जाता।
यदि बच्चे को बार-बार बिना किसी स्पष्ट कारण के दौरे पड़ते हैं, तो डॉक्टर ईईजी, एमआरआई या अन्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इन जांचों के माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि दौरे का वास्तविक कारण क्या है और क्या बच्चे को मिर्गी की समस्या है या नहीं।

दौरे के दौरान बच्चे को सुरक्षित स्थान पर लिटाना चाहिए और उसके आसपास मौजूद कठोर या नुकीली वस्तुओं को हटा देना चाहिए। बच्चे को करवट के बल लिटाना बेहतर माना जाता है ताकि सांस लेने में कोई परेशानी न हो। उसके मुंह में चम्मच, उंगली या कोई अन्य वस्तु डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। यह खतरनाक साबित हो सकता है।

यदि दौरा पांच मिनट से अधिक समय तक जारी रहे, बच्चा सांस लेने में परेशानी महसूस करे, पहली बार दौरा पड़ा हो या दौरे के बाद भी सामान्य स्थिति में न लौटे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर उपचार कई गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में दौरे पड़ने की समस्या को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। सही समय पर जांच और उपचार मिलने से अधिकांश बच्चे पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। इसलिए घबराने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। बच्चे को दौरे पड़ने या किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या की स्थिति में योग्य डॉक्टर या बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

