By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
Vibhuvan Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने और विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जून 2026 में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को विभुवन संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाएगा। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत रखने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में आ रही बाधाएं दूर होने लगती हैं।

विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 3 जून 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। बुधवार का दिन स्वयं भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है, इसलिए इस बार विभुवन संकष्टी चतुर्थी का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने से बुद्धि, विवेक, धन, सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही करियर, व्यापार और पारिवारिक जीवन में आ रही परेशानियों से भी राहत मिल सकती है।

संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व
हिंदू शास्त्रों में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता कहा गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणपति की पूजा करने की परंपरा है। माना जाता है कि गणेश जी अपने भक्तों के सभी विघ्न और संकट दूर करते हैं। संकष्टी चतुर्थी व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो जीवन में लगातार कठिनाइयों, आर्थिक परेशानियों, शिक्षा संबंधी बाधाओं या वैवाहिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

विभुवन संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान को साफ करके भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
गणपति को दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर और मोदक अर्पित करें।
गणेश चालीसा और गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
दिनभर व्रत रखें और भगवान गणेश का ध्यान करें।
रात्रि में चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य अर्पित करें।
इसके बाद विधिपूर्वक व्रत का पारण करें।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी की पावन कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय देवलोक और पृथ्वी लोक में अनेक प्रकार की बाधाएं और संकट उत्पन्न होने लगे। देवताओं ने इस समस्या के समाधान के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की शरण ली। तब भगवान गणेश ने अपने दिव्य प्रभाव से सभी संकटों का नाश किया और देवताओं को भयमुक्त किया। भगवान गणेश की कृपा से तीनों लोकों में पुनः सुख, शांति और समृद्धि स्थापित हुई। इसी कारण उन्हें विघ्नहर्ता और संकटमोचन कहा गया। मान्यता है कि इस घटना की स्मृति में संकष्टी चतुर्थी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।
जो भक्त इस दिन श्रद्धा से भगवान गणेश की पूजा करते हैं और कथा का श्रवण करते हैं, उनके जीवन के कष्ट धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं तथा उन्हें सुख, समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

संकष्टी चतुर्थी पर करें ये विशेष उपाय
भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।
गणेश जी को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
“ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
जरूरतमंद लोगों को भोजन या वस्त्र का दान करें।
बुध ग्रह की शांति के लिए हरी मूंग का दान करें।

क्या मिलता है इस व्रत का फल?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, करियर में उन्नति के अवसर प्राप्त होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही भगवान गणेश की कृपा से बुद्धि, ज्ञान और विवेक में वृद्धि होने की भी मान्यता है।

भगवान गणेश की आराधना और संकष्टी चतुर्थी व्रत को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इसलिए इस पावन अवसर पर विधि-विधान से पूजा कर गणपति बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त करना शुभ माना जाता है।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार पूजा विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है। Newsbag किसी भी धार्मिक दावे की पूर्ण पुष्टि नहीं करता। श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना करें।

