By: Mala Mandal
देवघर जिले के लिए गर्व की खबर सामने आई है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर एक बेटी ने अपने सपनों को नई उड़ान दी है। जिले की होनहार छात्रा कुमकुम ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET 2026) में शानदार सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। कुमकुम की इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे देवघर जिले में खुशी का माहौल है। यह सफलता शिक्षा के क्षेत्र में मेहनत और समर्पण का बेहतरीन उदाहरण मानी जा रही है।

कुमकुम की मां पेशे से नर्स हैं और वर्षों से मरीजों की सेवा करती आ रही हैं। अपनी मां को अस्पताल में लोगों की सेवा करते हुए देखकर कुमकुम के मन में भी डॉक्टर बनने का सपना बचपन से ही आकार लेने लगा था। आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। माता-पिता ने हर परिस्थिति में उसका मनोबल बढ़ाया, जिसका परिणाम आज पूरे समाज के सामने है।

कुमकुम ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और नियमित पढ़ाई को दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया और अन्य गैरजरूरी गतिविधियों से दूरी बनाकर अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। रोजाना निर्धारित समय के अनुसार पढ़ाई करना, बार-बार रिवीजन करना और मॉक टेस्ट देना उनकी तैयारी की सबसे बड़ी रणनीति रही।

NEET परीक्षा देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में गिनी जाती है। हर वर्ष लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन सीमित सीटों के कारण केवल चुनिंदा अभ्यर्थियों को मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का अवसर मिल पाता है। ऐसे में देवघर की कुमकुम का सफलता हासिल करना जिले के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है।

कुमकुम की इस उपलब्धि के बाद उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। रिश्तेदार, पड़ोसी, शिक्षक और स्थानीय लोग उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं। परिवार में खुशी का माहौल है और सभी को विश्वास है कि आने वाले समय में कुमकुम एक सफल डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करेंगी।

कुमकुम की मां ने कहा कि बेटी बचपन से ही पढ़ाई में मेहनती रही है। उन्होंने हमेशा उसे अपने लक्ष्य पर ध्यान देने की सलाह दी। परिवार ने आर्थिक सीमाओं के बावजूद उसकी शिक्षा में कोई समझौता नहीं किया। उनका मानना है कि बेटियों को अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं।

शिक्षकों ने भी कुमकुम की मेहनत और अनुशासन की सराहना की है। उनके अनुसार वह पढ़ाई को लेकर हमेशा गंभीर रहती थीं और कठिन विषयों को भी धैर्य के साथ समझने का प्रयास करती थीं। यही निरंतर अभ्यास आज उनकी सफलता का कारण बना।
देवघर जैसे शहरों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सफलता हासिल करने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे यह संदेश मिलता है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। यदि उचित मार्गदर्शन, मेहनत और परिवार का सहयोग मिले तो छोटे शहरों के विद्यार्थी भी देशभर में अपनी पहचान बना सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन, एनसीईआरटी आधारित तैयारी और लगातार अभ्यास पर ध्यान देना चाहिए। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, बल्कि अनुशासित तैयारी ही सबसे बड़ा मंत्र है।

कुमकुम की सफलता उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो मेडिकल क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। उन्होंने यह साबित किया कि कठिन परिस्थितियां कभी भी सफलता की राह में स्थायी बाधा नहीं बनतीं। मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

पूरे देवघर जिले के लिए यह उपलब्धि गर्व का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुमकुम की सफलता से अन्य छात्र-छात्राओं का भी आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरित होंगे। आने वाले समय में उनसे जिले को एक कुशल और संवेदनशील डॉक्टर मिलने की उम्मीद है।

कुमकुम की यह सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, समर्पण और सपनों को साकार करने की प्रेरक मिसाल है। उनकी उपलब्धि ने यह संदेश दिया है कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता और दृढ़ संकल्प के साथ किया गया प्रयास निश्चित रूप से सफलता दिलाता है।

