By: Mala Mandal
देवघर। जिले की शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में शिक्षा विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले की स्कूली शिक्षा, छात्र कल्याण योजनाओं, विद्यालयों की आधारभूत संरचना, शैक्षणिक गुणवत्ता तथा प्रशासनिक कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारी केवल कागजी आंकड़ों और रिपोर्टों तक सीमित न रहें, बल्कि योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से विद्यार्थियों तक पहुंचे यह सुनिश्चित करें।

बैठक में सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई। उपायुक्त ने विद्यालयों में चल रही नियुक्ति प्रक्रियाओं, छात्रों के बीच पोशाक वितरण, मुफ्त पाठ्यपुस्तकों के वितरण तथा अन्य शैक्षणिक सुविधाओं की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाए ताकि शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री छात्रवृत्ति योजना (सीएम स्कॉलरशिप योजना) की प्रगति पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योग्य छात्रों को योजना का लाभ दिलाने में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। साथ ही उन्होंने सीएमएसओई, आदर्श विद्यालय, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय तथा मॉडल स्कूलों के संचालन की स्थिति की भी समीक्षा की। इन संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं को लेकर भी बैठक में गंभीरता से चर्चा हुई। उपायुक्त ने कहा कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए सभी विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल, शौचालय, कक्षाओं की स्थिति, भवनों की मरम्मत तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यालय में आधारभूत सुविधाओं की कमी नहीं रहनी चाहिए।

बैठक के दौरान माध्यमिक (दसवीं) और उच्च माध्यमिक (बारहवीं) परीक्षा परिणामों की समीक्षा भी की गई। इस दौरान उपायुक्त ने जिले के परीक्षा परिणामों पर असंतोष व्यक्त करते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि जिले के विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं हैं और इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार का वास्तविक आकलन विद्यार्थियों के प्रदर्शन और परीक्षा परिणामों से ही होता है। इसलिए शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विशेष रणनीति तैयार की जाए।
उपायुक्त ने सभी विद्यालयों में नियमित मूल्यांकन परीक्षा और टेस्ट आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और उनकी कमजोरियों की पहचान कर कस्टमाइज्ड लर्निंग मॉडल अपनाया जाए। प्रत्येक छात्र की जरूरत के अनुसार शिक्षण पद्धति विकसित करने से परीक्षा परिणामों में सुधार संभव होगा। उन्होंने शिक्षकों को भी बच्चों की शैक्षणिक प्रगति पर लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया।

जिले में साक्षरता दर बढ़ाने और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के मुद्दे पर भी विशेष जोर दिया गया। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ड्रॉप आउट बच्चों की पहचान प्राथमिकता के आधार पर की जाए। ऐसे बच्चों को पुनः विद्यालयों में नामांकित कर शिक्षा से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता है। शिक्षा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है और इसे सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

बैठक में शिक्षा विभाग की वित्तीय और प्रशासनिक स्थिति की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने विभागीय योजनाओं पर खर्च की स्थिति, लंबित मामलों तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी प्राप्त की। इसके अलावा शिक्षकों और कर्मचारियों से संबंधित लंबित आरोप पत्र, स्थापना संबंधी मामले, विभागीय कार्यवाही तथा निलंबन से जुड़े प्रकरणों की भी समीक्षा की गई।

उपायुक्त ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों और कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को जवाबदेही के साथ कार्य करने तथा विद्यालयों में शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए समन्वित प्रयास करने का निर्देश दिया।

बैठक में उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी, सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तथा शिक्षा विभाग के अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में लिए गए निर्णयों को जिले की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन से विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा, ड्रॉप आउट बच्चों की संख्या कम होगी तथा आने वाले वर्षों में बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम बेहतर होंगे। :::

