By: Mala Mandal
झारखंड के देवघर जिले के प्रतिभाशाली बालक अंश राज ने अपनी असाधारण गणितीय क्षमता और मानसिक गणना कौशल से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। महज 10 वर्ष की उम्र में अंश ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसे विशेषज्ञ भी बेहद कठिन और लगभग असंभव मानते हैं। अपनी अद्भुत प्रतिभा के दम पर अंश ने एक साथ चार नए कठिन विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया है। इसी उपलब्धि के साथ अंश का नाम अब अमेजिंग वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और इंस्पिरेशन वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है।

देवघर जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित हो चुके अंश राज को लोग अब “कैलकुलेटर बॉय” के नाम से पहचानने लगे हैं। अंश ने इस बार जो उपलब्धि हासिल की है, वह न केवल देवघर और झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गई है।
बताया जा रहा है कि अंश ने पहली बार दुनिया में 2^1 से लेकर 2^350 तक की विशाल संख्याओं को बाइनरी डिजिटल नोटेशन में व्यवस्थित, क्रमबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से लिखकर नया इतिहास बनाया है। खास बात यह है कि इन संख्याओं का मान 100 या उससे अधिक अंकों तक पहुंच जाता है। उदाहरण के तौर पर 2^328 का मान 99 अंकों तक पहुंचता है जबकि 2^350 का मान 106 अंकों से अधिक होता है।

इतनी बड़ी संख्याओं की गणना करना किसी सामान्य व्यक्ति के लिए लगभग असंभव माना जाता है। यही नहीं, आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले साधारण कैलकुलेटर भी इतनी लंबी गणनाएं नहीं कर पाते। दावा किया गया है कि अधिकांश सामान्य कैलकुलेटर अधिकतम 20 अंकों तक की गणना करने में सक्षम होते हैं, जबकि अंश ने 100 से अधिक अंकों वाली संख्याओं को मानसिक रूप से हल कर दिखाया।
इस चुनौती के दौरान अंश को 2^1 से लेकर 2^350 तक के बीच से कोई भी 24 यादृच्छिक घातांक दिए गए। इन सभी संख्याओं का मान अत्यंत विशाल था। अंश ने इन कठिन संख्याओं को मानसिक गणना के माध्यम से बाइनरी डिजिटल नोटेशन में परिवर्तित करते हुए केवल 1 मिनट के भीतर उत्तर लिख दिया। यही उपलब्धि उसके 13वें और 14वें विश्व रिकॉर्ड का आधार बनी।

अंश ने न केवल इन विशाल संख्याओं का उत्तर निकाला बल्कि उन्हें डिजिटल यूनिट जैसे केबी, एमबी, जीबी, टीबी, पीबी और उससे आगे के स्वरूप में भी परिवर्तित किया। विशेषज्ञों के अनुसार इतनी तेज गति और सटीकता के साथ गणना करना किसी साधारण बच्चे के लिए संभव नहीं माना जाता।
अंश की इस उपलब्धि पर रिकॉर्ड्स जूरी ने भी आश्चर्य व्यक्त करते हुए उसे बधाई दी है। जूरी का कहना है कि इतनी कम उम्र में इस स्तर की मानसिक गणना और पैटर्न पहचानने की क्षमता बेहद दुर्लभ है। अंश ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती।

अंश ने अपनी कॉपी में 40 से अधिक पन्नों पर 2^1 से लेकर 2^350 तक की संख्याओं को क्रमबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से लिखा है। यह कार्य न केवल कठिन बल्कि अत्यंत धैर्य, अभ्यास और गहरी गणितीय समझ की मांग करता है।
इसके अलावा अंश ने दो अन्य रिकॉर्ड भी बनाए हैं। 11वें और 12वें विश्व रिकॉर्ड के तहत उसने लॉग 1 से लेकर लॉग 20 तक के मान दशमलव के बाद तीन अंकों तक केवल 42 सेकंड में निकाल दिए। वहीं उल्टा एबीसीडी और पाई का मान दशमलव के बाद 11 अंकों तक केवल 30 सेकंड में बताकर नया रिकॉर्ड कायम किया। इन उपलब्धियों को अमेजिंग वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और फोर्ब्स बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्याओं की मानसिक गणना के लिए केवल तेज दिमाग ही नहीं बल्कि असाधारण स्मरण शक्ति, पैटर्न पहचानने की क्षमता और उच्च स्तर की मानसिक प्रोसेसिंग की आवश्यकता होती है। यह क्षमता सामान्यतः बहुत कम बच्चों में देखने को मिलती है।
अंश की उपलब्धियों को देखते हुए देवघर जिला प्रशासन पहले भी उसे गणतंत्र दिवस समारोह में सम्मानित कर चुका है। इसके अलावा कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों द्वारा उसे “देवघर रत्न”, “गूगल बॉय”, “बेस्ट बॉय” और “कैलकुलेटर बॉय” जैसे सम्मान दिए जा चुके हैं।

अंश राज आज केवल एक नाम नहीं बल्कि नई पीढ़ी की प्रतिभा, मेहनत और संभावनाओं का प्रतीक बन चुके हैं। उसने यह साबित कर दिया है कि यदि लगन, अनुशासन और निरंतर अभ्यास हो तो कोई भी बच्चा असंभव को संभव बना सकता है।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि अंश जैसी प्रतिभा को विशेष प्रशिक्षण और राष्ट्रीय स्तर पर मंच मिलना चाहिए ताकि उसकी क्षमता का सही उपयोग देशहित में किया जा सके। अंश की यह सफलता देशभर के बच्चों के लिए प्रेरणा बन गई है और यह संदेश देती है कि कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

