By: Mala Mandal
देवघर: धर्म, अध्यात्म और सांस्कृतिक पहचान के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध बाबा नगरी देवघर में गुरुवार को एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली जिसने शहरवासियों के बीच स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी का नया संदेश दिया। बीते दिनों सफाई कर्मियों के विरोध प्रदर्शन के दौरान शहर की कई सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा बिखर गया था, जिससे आम नागरिकों के साथ-साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे माहौल में समाजसेवी बाबा बलियासे ने पहल करते हुए स्वयं सड़क पर उतरकर शहर की सफाई का जिम्मा उठाया।

इस अभियान में उनके साथ सैकड़ों की संख्या में निजी सफाई कर्मी भी शामिल हुए। सुबह से शुरू हुए इस विशेष सफाई अभियान के दौरान शहर के कई प्रमुख चौक-चौराहों और गलियों को साफ किया गया। सफाई के बाद सड़कों पर पानी का छिड़काव किया गया तथा संक्रमण और दुर्गंध को रोकने के उद्देश्य से ब्लीचिंग पाउडर भी डाला गया।
प्रमुख चौक और गलियों में चला सफाई अभियान
सफाई अभियान के तहत देवघर के लक्ष्मीपुर चौक, टावर चौक, आजाद चौक समेत कई प्रमुख मार्गों और आसपास की गलियों को साफ किया गया। बड़ी मात्रा में जमा कचरे को हटाने के बाद पूरे क्षेत्र को व्यवस्थित किया गया ताकि यातायात सामान्य रूप से संचालित हो सके और आम लोगों को राहत मिल सके। स्थानीय लोगों ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि शहर को साफ रखने के लिए केवल प्रशासन ही नहीं बल्कि नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। लोगों ने माना कि इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक संदेश देने का काम करती है।

“देवघर हम सबका है, इसे स्वच्छ रखना भी हमारी जिम्मेदारी” — बाबा बलियासे
अभियान के दौरान समाजसेवी बाबा बलियासे ने कहा कि देवघर केवल एक शहर नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इसकी स्वच्छता और सुंदरता बनाए रखना हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान जिस प्रकार शहर की सड़कों पर कचरा फैल गया था, उसे देखकर उन्होंने स्वयं सफाई करने का संकल्प लिया। इसी संकल्प के तहत निजी स्तर पर लोगों को जोड़ा गया और सफाई अभियान शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि 18 और 19 जून तक नगर निगम से समय मांगा गया है, जिसके बाद शहर को व्यवस्थित रूप से साफ कर पुनः नगर निगम को सौंप दिया जाएगा।

नगर निगम की भूमिका पर भी उठाए सवाल
बाबा बलियासे ने कहा कि यदि एक व्यक्ति और कुछ स्वयंसेवकों की टीम शहर की सफाई के लिए इतनी बड़ी पहल कर सकती है तो नगर निगम जैसे बड़े विभाग के लिए नियमित स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखना कठिन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहर को स्वच्छ रखना किसी एक संस्था की नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि प्रशासन और जनता मिलकर काम करें तो देवघर को देश के सबसे स्वच्छ धार्मिक शहरों में शामिल किया जा सकता है।

श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए स्वच्छ शहर बनाने की अपील
देवघर हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों का स्वागत करता है। विशेष रूप से श्रावणी मेला और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में शहर की स्वच्छता सीधे तौर पर यहां की छवि से जुड़ी हुई है। बाबा बलियासे ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि देवघर बाबा की नगरी है और इसकी साफ-सफाई बनाए रखने में हर नागरिक अपनी भूमिका निभाए। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाएं और आसपास के लोगों को भी जागरूक करें। उन्होंने कहा कि जब बाहर से आने वाले श्रद्धालु एक स्वच्छ और व्यवस्थित देवघर देखेंगे तो इससे शहर की सकारात्मक पहचान बनेगी और इसका संदेश देशभर तक पहुंचेगा।

सामाजिक भागीदारी से बदलेगी शहर की तस्वीर
इस पूरे अभियान ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि शहर की स्वच्छता केवल सरकारी व्यवस्था पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। यदि नागरिक जागरूक होकर आगे आएं तो किसी भी शहर को बेहतर और सुंदर बनाया जा सकता है।

देवघर में चलाया गया यह अभियान अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे सामाजिक सहभागिता और जनजागरूकता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।



