By: Vikash Kumar (Vicky)
ईरान में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। देश के कई बड़े शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शन उग्र रूप ले चुके हैं। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था के खिलाफ लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर खुलकर दिखाई दे रहा है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में अब तक 42 लोगों की मौत की खबर सामने आ चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं।

कई शहरों में भड़की हिंसा
तेहरान, मशहद, इस्फहान, तबरीज़, शीराज़ और अहवाज़ समेत कई प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी सरकारी इमारतों, बैंकों और पेट्रोल पंपों को निशाना बना रहे हैं। कई जगहों पर वाहनों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई इलाकों में सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती करनी पड़ी है। सुरक्षा बलों ने भीड़ को काबू में करने के लिए आंसू गैस, रबर बुलेट और कई स्थानों पर गोलीबारी तक का सहारा लिया।
महंगाई और बेरोजगारी बनी गुस्से की वजह
ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से गंभीर संकट से जूझ रही है। अमेरिकी प्रतिबंधों, तेल निर्यात में गिरावट और मुद्रा अवमूल्यन ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। खाद्य पदार्थों, ईंधन और दवाओं की कीमतें आसमान छू रही हैं, जबकि नौकरियों के अवसर लगातार घटते जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार महंगाई पर नियंत्रण पाने में पूरी तरह विफल रही है। न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी नहीं होने से आम लोग दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। यही वजह है कि गुस्सा अब विरोध प्रदर्शन में तब्दील हो चुका है।
इंटरनेट और फोन सेवाएं पूरी तरह बंद
हालात पर नियंत्रण पाने के लिए ईरानी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए देशभर में इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन सेवाएं बंद कर दी हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम तक पहुंच पूरी तरह रोक दी गई है। सरकार का कहना है कि यह कदम “राष्ट्रीय सुरक्षा” के तहत उठाया गया है, ताकि अफवाहों और हिंसा को फैलने से रोका जा सके। हालांकि मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन बताया है।

मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका
मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 42 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। कई शवों को गुपचुप तरीके से हटाए जाने और अस्पतालों में जानकारी छुपाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें छात्र, मजदूर और महिलाएं भी शामिल हैं। कई परिवारों का दावा है कि उनके परिजन लापता हैं और प्रशासन कोई जानकारी नहीं दे रहा।
सरकार का सख्त रुख
ईरान सरकार ने साफ कर दिया है कि वह “अराजकता फैलाने वालों” के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगी। सरकारी मीडिया में प्रदर्शनकारियों को “विदेशी ताकतों द्वारा उकसाए गए तत्व” बताया जा रहा है। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि कानून व्यवस्था भंग करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि आर्थिक हालात सुधारने के लिए कुछ राहत पैकेजों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल प्राथमिकता सुरक्षा बहाल करने की है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ईरान में बढ़ती हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और कई मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों के मानवाधिकारों का सम्मान करने की अपील की है।वहीं कुछ पश्चिमी देशों ने इंटरनेट बंद करने और बल प्रयोग की निंदा करते हुए ईरान सरकार से पारदर्शिता बरतने की मांग की है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार आर्थिक मोर्चे पर ठोस कदम नहीं उठाती, तो विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं। इंटरनेट बंद होने के बावजूद लोगों का आक्रोश थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। आने वाले दिनों में ईरान की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

