By: Mala Mandal
रांची: झारखंड में JPSC (Jharkhand Public Service Commission) और JSSC (Jharkhand Staff Selection Commission) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब एक नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों को अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का भी समर्थन मिल गया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना और उनकी मांगों का समर्थन करने की बात कही।

छात्रों का आरोप है कि राज्य में आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी रही है। उनका कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया, परिणाम और चयन प्रणाली को लेकर कई सवाल उठे हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। इसी मांग को लेकर छात्र लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे हैं।
छात्रों से मिले अभिजीत दिपके
रांची में आंदोलन स्थल पर पहुंचे CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शनकारी छात्रों से विस्तार से बातचीत की। उन्होंने छात्रों की समस्याओं और आरोपों को ध्यान से सुना। इसके बाद उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा नहीं रहेगा तो यह राज्य के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अभिजीत दिपके ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि योग्य उम्मीदवारों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।

क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित भर्ती अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, विवादित परीक्षाओं की समीक्षा, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और भविष्य की भर्ती परीक्षाओं के लिए मजबूत व्यवस्था लागू करने की मांग शामिल है। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरियों की तैयारी में वे कई वर्षों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में यदि भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो उनकी मेहनत और भविष्य दोनों प्रभावित होते हैं। इसलिए सरकार को समय रहते इस मामले का समाधान निकालना चाहिए।

आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन
रांची में चल रहे इस आंदोलन को अब विभिन्न संगठनों और सामाजिक समूहों का समर्थन मिलने लगा है। CJP के समर्थन के बाद आंदोलन को राजनीतिक चर्चा भी मिलने लगी है। हालांकि अब तक राज्य सरकार की ओर से इस नए समर्थन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी छात्र आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने से उसकी चर्चा और प्रभाव बढ़ सकता है। वहीं दूसरी ओर सरकार पर भी मामले को लेकर शीघ्र निर्णय लेने का दबाव बढ़ता है।

भर्ती प्रक्रिया पर लगातार उठते रहे हैं सवाल
झारखंड में समय-समय पर विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। कई बार परीक्षा प्रक्रिया, प्रश्नपत्र, परिणाम और चयन प्रणाली को लेकर अभ्यर्थियों ने आपत्ति दर्ज कराई है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग लगातार उठती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध हो तो विवादों की संभावना काफी कम हो सकती है। इसके अलावा शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए स्वतंत्र व्यवस्था भी जरूरी मानी जाती है।

सरकार के सामने बड़ी चुनौती
राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती युवाओं का भरोसा बनाए रखना है। यदि भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार विवाद होते रहेंगे तो सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। इसलिए सरकार के लिए आवश्यक है कि वह छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से सुने और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे।

छात्रों का कहना
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं बल्कि अपने भविष्य और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के लिए है। उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि योग्य अभ्यर्थियों को न्याय मिले और भविष्य में किसी भी उम्मीदवार को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर रांची में जारी छात्र आंदोलन को अब CJP का समर्थन मिलना इस पूरे घटनाक्रम को नया राजनीतिक आयाम देता है। अभिजीत दिपके द्वारा छात्रों की मांगों का समर्थन किए जाने के बाद इस मुद्दे पर चर्चा और तेज होने की संभावना है। अब सभी की नजर राज्य सरकार की अगली प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि सरकार छात्रों की मांगों पर सकारात्मक पहल करती है तो इससे युवाओं का विश्वास मजबूत हो सकता है। वहीं यदि विवाद लंबा खिंचता है तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।


