By: Mala Mandal
मुंबई। महाराष्ट्र में शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों को उस समय बड़ा झटका लगा जब 28 जून 2026 को आयोजित होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को परीक्षा से महज एक दिन पहले रद्द कर दिया गया। परीक्षा रद्द करने का फैसला तब लिया गया जब ठाणे से प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी सामने आई। सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र वायरल होने की खबर मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई।

शिक्षा विभाग के अनुसार, परीक्षा की गोपनीयता से समझौता होने की आशंका के चलते तत्काल प्रभाव से परीक्षा स्थगित करने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। इसलिए किसी भी तरह की अनियमितता की स्थिति में परीक्षा आयोजित करना उचित नहीं माना गया।

बताया जा रहा है कि पेपर लीक की सूचना सबसे पहले ठाणे जिले से मिली, जहां कुछ व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुपों में परीक्षा से संबंधित प्रश्नपत्र और उत्तर वायरल होने लगे। सूचना मिलते ही पुलिस और शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू की। शुरुआती जांच में कई डिजिटल सबूत भी मिले हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा रद्द करने का निर्णय अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। यदि पेपर लीक की आशंका के बावजूद परीक्षा आयोजित की जाती तो लाखों ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होता। इसलिए परीक्षा को स्थगित कर नई तारीख जल्द घोषित करने की बात कही गई है।

इस फैसले के बाद राज्यभर के अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी देखने को मिली। कई उम्मीदवारों ने बताया कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए महीनों मेहनत की थी। अनेक अभ्यर्थी दूसरे जिलों और शहरों से परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की तैयारी कर चुके थे। कुछ उम्मीदवारों ने होटल बुक कर लिए थे और यात्रा टिकट भी करा लिए थे। ऐसे में परीक्षा रद्द होने से उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल उठाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। कई लोगों ने कहा कि बार-बार होने वाली पेपर लीक की घटनाएं युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं और इससे भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस साइबर सेल, अपराध शाखा और संबंधित जांच एजेंसियां पेपर लीक के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुट गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्र तक पहुंचने से पहले कैसे बाहर आया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका हो सकती है।

जांच एजेंसियां परीक्षा संचालन से जुड़े कर्मचारियों, प्रिंटिंग प्रक्रिया, परिवहन व्यवस्था और डिजिटल संचार की भी जांच कर रही हैं। यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या निजी एजेंसी की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से यह स्पष्ट होता है कि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर और अधिक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है। सुरक्षित डिजिटल एन्क्रिप्शन, प्रश्नपत्र वितरण की बेहतर निगरानी और जवाबदेही तय करने जैसे कदम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

शिक्षा विभाग ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक सूचना का ही पालन करें। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाएगी तथा सभी अभ्यर्थियों को पर्याप्त समय दिया जाएगा ताकि वे बिना किसी परेशानी के परीक्षा में शामिल हो सकें।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पेपर लीक के पीछे शामिल लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा।

अब लाखों अभ्यर्थियों की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है। सभी उम्मीदवार नई परीक्षा तिथि की घोषणा और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं यह मामला एक बार फिर देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

