By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर केंद्र सरकार बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने संकेत दिया है कि अगले वर्ष से NEET परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित किया जा सकता है। सरकार का कहना है कि यह कदम परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

हाल के महीनों में NEET परीक्षा को लेकर पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया पर सवालों ने राष्ट्रीय स्तर पर बहस को जन्म दिया। इसी पृष्ठभूमि में शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा व्यवस्था में बदलाव का संकेत दिया है। मंत्री ने कहा कि सरकार की नीति “जीरो टॉलरेंस” की है और किसी भी कीमत पर छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं किया जाएगा।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि मौजूदा OMR आधारित प्रणाली में कुछ कमजोरियां सामने आई हैं और CBT मॉडल परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद कर सकता है। सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यम से निगरानी और नियंत्रण बेहतर तरीके से संभव हो सकेगा।

इसी बीच शिक्षा मंत्री ने विपक्ष के नेता Rahul Gandhi पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक बयान छात्रों के बीच अनावश्यक डर और भ्रम पैदा कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि परीक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर जिम्मेदारी के साथ बयान दिए जाने चाहिए ताकि छात्रों का मनोबल प्रभावित न हो।

वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी लगातार परीक्षा प्रणाली और छात्रों की चिंताओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। हाल के दिनों में उन्होंने कहा था कि शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है और छात्रों की आशंकाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता मजबूत करनी चाहिए।

NEET को लेकर विवाद तब और बढ़ गया जब परीक्षा प्रक्रिया और कथित पेपर लीक मामलों को लेकर कई राज्यों में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ी। सरकार ने बाद में जांच एजेंसियों के माध्यम से कार्रवाई और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि CBT मोड लागू होने पर परीक्षा संचालन में पारदर्शिता बढ़ सकती है, लेकिन इसके साथ तकनीकी पहुंच, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल ढांचे और परीक्षा केंद्रों की तैयारी भी महत्वपूर्ण होगी। बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों को देखते हुए यह बदलाव प्रशासनिक दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक स्तर पर यह मुद्दा सरकार बनाम विपक्ष के आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया है, लेकिन छात्रों और अभिभावकों की प्रमुख चिंता निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली बनी हुई है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि CBT मॉडल को किस रूप में लागू किया जाएगा और इससे परीक्षा व्यवस्था में कितना सुधार आता है।

फिलहाल सरकार का संदेश स्पष्ट है—पेपर लीक में शामिल तत्वों पर सख्त कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार। वहीं विपक्ष शिक्षा सुधार और छात्रों के विश्वास की बहाली को प्राथमिक मुद्दा बना रहा है।

