By: Mala Mandal
देवघर। झारखंड की राजनीति, सामाजिक चेतना और जन आंदोलनों के इतिहास में एक ऐतिहासिक अध्याय उस समय जुड़ गया, जब झारखंड आंदोलन के प्रमुख स्तंभ और दिशोम गुरु के नाम से प्रसिद्ध Shibu Soren को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया। इस सम्मान को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह के दौरान उनकी धर्मपत्नी रूपी सोरेन ने ग्रहण किया। इस अवसर पर पूरे झारखंड में खुशी और गौरव का माहौल देखने को मिला।

देवघर के महापौर रवि कुमार राउत ने इस ऐतिहासिक अवसर पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की पहचान, संघर्ष और आत्मसम्मान का सम्मान है। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अपने जीवन का हर क्षण आदिवासी समाज, गरीबों, वंचितों और झारखंड के अधिकारों के लिए समर्पित किया।

महापौर ने कहा कि गुरुजी का व्यक्तित्व राजनीति की सीमाओं से कहीं आगे था। वे झारखंड की सांस्कृतिक चेतना, जनभावनाओं और सामाजिक न्याय के प्रतीक रहे। अलग राज्य की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और जनांदोलन को मजबूत करने में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि आदरणीय गुरुजी को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान उनके दशकों लंबे संघर्षों और जनसेवा के प्रति देश की श्रद्धांजलि है। यह सम्मान उन लाखों लोगों की भावनाओं का सम्मान भी है, जिन्होंने झारखंड आंदोलन में भाग लिया और राज्य निर्माण के सपने को साकार करने में भूमिका निभाई।

महापौर रवि कुमार राउत ने कहा कि गुरुजी ने केवल राजनीतिक आंदोलन नहीं किया, बल्कि सामाजिक बदलाव को भी प्राथमिकता दी। उन्होंने महाजनी प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए रात्रि पाठशालाओं की शुरुआत की और आदिवासी समाज को जागरूक करने का अभियान चलाया।
उन्होंने कहा कि गुरुजी का मानना था कि समाज में वास्तविक बदलाव शिक्षा और सामाजिक चेतना से ही संभव है। इसी सोच के साथ उन्होंने गांवों तक जाकर लोगों को संगठित किया और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया।

महापौर ने यह भी कहा कि शराबबंदी जैसे सामाजिक अभियानों में भी गुरुजी की सक्रिय भूमिका रही। उन्होंने आदिवासी और ग्रामीण समाज में फैल रही कई सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाया। यही कारण है कि आज भी लोग उन्हें केवल नेता नहीं, बल्कि जननायक के रूप में याद करते हैं।
देवघर की जनता की ओर से महापौर ने भारत की राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सम्मान ने पूरे झारखंड को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रपति भवन में रूपी सोरेन ने यह सम्मान ग्रहण किया, तब हर झारखंडवासी ने स्वयं को इस सम्मान से जुड़ा हुआ महसूस किया।

उन्होंने आगे कहा कि झारखंड की जनता के मन में गुरुजी के प्रति जो सम्मान और श्रद्धा है, वह किसी पुरस्कार से कहीं अधिक बड़ा है। इसके बावजूद उनकी भावना है कि भविष्य में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से भी दिशोम गुरु को सम्मानित किया जाना चाहिए।

महापौर ने कहा कि गुरुजी के विचार और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। जल, जंगल और जमीन की रक्षा से लेकर सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय पहचान तक, उनके आंदोलन ने देश की राजनीति और समाज पर गहरी छाप छोड़ी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सम्मान झारखंड आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार करने का प्रतीक माना जाएगा। राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने इस सम्मान को खुशी और सम्मान के साथ स्वीकार किया।
देवघर सहित पूरे राज्य में सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे झारखंड के इतिहास का गौरवशाली क्षण बताया। लोगों का कहना है कि यह सम्मान केवल अतीत की उपलब्धि नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को संघर्ष, नेतृत्व और जनसेवा के लिए प्रेरित करने वाला संदेश भी है।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जीवन इस बात का उदाहरण रहा कि निरंतर संघर्ष, जनभागीदारी और सामाजिक समर्पण से बड़े परिवर्तन संभव होते हैं। आज उन्हें मिला यह सम्मान झारखंड की उस ऐतिहासिक यात्रा का प्रतीक बन गया है जिसने एक आंदोलन को राज्य निर्माण तक पहुंचाया।

