By: Mala Mandal
बिहार के लखीसराय जिले से NEET री-एग्जाम के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कथित मुन्नाभाई और सॉल्वर गैंग के उस नेटवर्क का खुलासा किया है, जो परीक्षा में असली अभ्यर्थियों की जगह फर्जी परीक्षार्थियों को बैठाकर परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। इस खुलासे के बाद एक बार फिर देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार, सॉल्वर गैंग लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में सक्रिय था और अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उनकी जगह योग्य सॉल्वर्स को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने का काम करता था। पुलिस को मिली गुप्त सूचना के आधार पर लखीसराय के एक परीक्षा केंद्र के आसपास निगरानी बढ़ाई गई। इसी दौरान कुछ संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया गया।

जांच में यह पता चला कि गैंग का तरीका बेहद सुनियोजित था। इसमें ऐसे लोगों को शामिल किया जाता था जो पढ़ाई में बेहतर होते थे और असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने के लिए तैयार रहते थे। फर्जी दस्तावेज, एडमिट कार्ड और पहचान संबंधी कागजात तैयार कर उन्हें परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया जाता था। कई मामलों में चेहरे की समानता और नकली पहचान पत्रों का भी इस्तेमाल किया जाता था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए संदिग्धों से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके तार बिहार के अलावा अन्य राज्यों तक फैले हुए हैं या नहीं। मोबाइल फोन, दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी जांच के लिए जब्त किया गया है।

NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में इस प्रकार की धांधली सामने आने से लाखों मेहनती छात्रों की भावनाएं प्रभावित होती हैं। हर साल लाखों विद्यार्थी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए कठिन परिश्रम करते हैं। ऐसे में यदि कुछ लोग पैसे के बल पर परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास करें, तो इससे योग्य छात्रों के अवसरों पर सीधा असर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए केवल तकनीकी उपाय पर्याप्त नहीं हैं। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस रिकॉग्निशन तकनीक, AI आधारित निगरानी और CCTV कैमरों के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भूमिका भी जरूरी है। लखीसराय में हुआ यह खुलासा दर्शाता है कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बावजूद सॉल्वर गैंग नए-नए तरीके अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।

हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, डमी कैंडिडेट और सॉल्वर गैंग से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं। यही कारण है कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियां लगातार अपनी सुरक्षा प्रणाली को अपडेट कर रही हैं। NEET री-एग्जाम में भी इस बार AI आधारित निगरानी, बड़ी संख्या में CCTV कैमरे और जैमर लगाए गए थे, जिसके बावजूद इस तरह का मामला सामने आना चिंता का विषय माना जा रहा है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में केवल परीक्षा देने वाले फर्जी अभ्यर्थियों पर ही नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इसमें शामिल दलालों, दस्तावेज तैयार करने वालों और आर्थिक लेन-देन में शामिल लोगों के खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

पुलिस फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि नेटवर्क के अन्य सदस्य सामने आते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही परीक्षा में शामिल संदिग्ध अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की प्रमुख परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निरंतर निगरानी और तकनीकी सुधारों की आवश्यकता है। परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि ऐसे मामलों पर समय रहते कार्रवाई की जाए और दोषियों को सख्त सजा मिले, तो भविष्य में इस प्रकार की धांधली करने वालों के लिए यह एक बड़ा संदेश साबित होगा।

फिलहाल लखीसराय में सामने आए इस खुलासे ने पूरे शिक्षा जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और इस नेटवर्क के पीछे छिपे अन्य लोगों की पहचान पर टिकी हुई है। छात्रों और अभिभावकों की भी यही अपेक्षा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बरकरार रह सके।


