
By: Mala Mandal
देवघर। दीपावली खुशियों, उमंग और रोशनी का त्योहार है। यह पर्व केवल घरों को दीपों से सजाने और मां लक्ष्मी की पूजा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और पारंपरिक कारीगरों की आजीविका से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। दीपावली आते ही बाजारों में मिट्टी से बने दीये, खिलौने और अन्य पारंपरिक उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। इस पर्व को लेकर सबसे अधिक उम्मीद कुम्हार समाज के लोगों को रहती है। पूरे वर्ष कड़ी मेहनत कर मिट्टी के दीये और अन्य उत्पाद तैयार करने वाले कुम्हार परिवार दीपावली के दौरान अच्छी बिक्री की आस लगाए रहते हैं, ताकि उनके घरों में भी खुशियों का दीप जल सके।

इस बार देवघर नगर निगम ने कुम्हार समाज के लोगों को दीपावली से पहले एक बड़ी सौगात दी है। नगर निगम की ओर से फैसला लिया गया है कि सड़क किनारे दुकान लगाकर मिट्टी के पारंपरिक दीये, मिट्टी के खिलौने और मिट्टी से बने अन्य उत्पादों की बिक्री करने वाले दुकानदारों से किसी प्रकार का नगर निगम शुल्क या टैक्स नहीं वसूला जाएगा। इस फैसले से कुम्हार समाज के लोगों और छोटे दुकानदारों में खुशी का माहौल है।

महापौर रवि कुमार राउत ने की महत्वपूर्ण घोषणा
देवघर नगर निगम के महापौर रवि कुमार राउत ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि इस बार दीपावली खुशियों वाली दीपावली होगी। कुम्हार समाज और प्रजापति समाज के लोग मिट्टी से बने पारंपरिक उत्पादों को तैयार कर बाजार में बिक्री करते हैं। उनकी मेहनत और पारंपरिक व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नगर निगम ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। महापौर ने स्पष्ट किया कि दीपावली के अवसर पर मिट्टी के दीये, मिट्टी के खिलौने और मिट्टी से बने अन्य पारंपरिक उत्पादों की बिक्री करने वाले दुकानदारों से नगर निगम की ओर से किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों को आर्थिक राहत देना और उनके पारंपरिक व्यवसाय को बढ़ावा देना है।

कुम्हार परिवारों के लिए आर्थिक राहत का फैसला
दीपावली का त्योहार कुम्हार समाज के लिए वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में से एक होता है। इस पर्व को ध्यान में रखते हुए कुम्हार परिवार कई सप्ताह पहले से ही मिट्टी के दीये, हाथी-घोड़े, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां और सजावटी सामान बनाने में जुट जाते हैं। इसके लिए उन्हें मिट्टी जुटाने से लेकर उत्पाद तैयार करने, उन्हें सुखाने और पकाने तक कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

इस काम में परिवार के लगभग सभी सदस्य अपनी भूमिका निभाते हैं। महिलाएं दीये और छोटे खिलौने तैयार करने में सहयोग करती हैं, जबकि पुरुष बाजार में दुकान लगाकर उत्पादों की बिक्री करते हैं। कई परिवारों के लिए दीपावली के दौरान होने वाली बिक्री ही अतिरिक्त आमदनी का सबसे बड़ा अवसर होती है। ऐसे में नगर निगम की ओर से टैक्स और शुल्क में राहत देने का निर्णय उनके लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे दुकानदारों को अपनी कमाई का अधिक हिस्सा बचाने का अवसर मिलेगा और वे बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के अपने उत्पादों की बिक्री कर सकेंगे।

मिट्टी के दीयों से मजबूत होगी परंपरा और स्वदेशी का संदेश
आधुनिकता के दौर में बाजारों में बिजली की झालर, एलईडी लाइट और विभिन्न प्रकार के सजावटी उत्पादों की भरमार है। इसके बावजूद मिट्टी के दीयों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व आज भी बरकरार है। दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाना भारतीय परंपरा का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। मिट्टी के दीयों का उपयोग केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि यह स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यवसायियों की आजीविका को भी सहारा देता है। जब लोग स्थानीय कुम्हारों से मिट्टी के दीये और अन्य उत्पाद खरीदते हैं, तो इससे सीधे तौर पर उनके परिवारों को आर्थिक लाभ मिलता है। नगर निगम का यह निर्णय लोगों को भी स्थानीय उत्पादों के प्रति जागरूक करने और मिट्टी से बने पारंपरिक सामानों की बिक्री को प्रोत्साहित करने की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

दुकानदारों में खुशी, नगर निगम के फैसले का स्वागत
नगर निगम की इस घोषणा के बाद सड़क किनारे मिट्टी के दीये और अन्य उत्पाद बेचने वाले दुकानदारों में खुशी देखी जा रही है। छोटे दुकानदारों के लिए त्योहारों के दौरान दुकान लगाने और बिक्री करने में कई तरह के खर्च सामने आते हैं। ऐसे में नगर निगम शुल्क से राहत मिलने पर उन्हें आर्थिक रूप से मदद मिलेगी। कुम्हार समाज के लोगों को उम्मीद है कि इस बार दीपावली के अवसर पर मिट्टी के दीयों और पारंपरिक उत्पादों की अच्छी बिक्री होगी। नगर निगम की इस पहल से उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का प्रोत्साहन भी मिलेगा।

स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन देने की दिशा में पहल
देवघर नगर निगम का यह निर्णय केवल टैक्स में छूट देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से स्थानीय कारीगरों, छोटे दुकानदारों और पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े परिवारों को सम्मान और प्रोत्साहन देने का संदेश भी दिया गया है। दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर जब शहर रोशनी से जगमगाता है, तब उन हाथों की मेहनत को याद रखना भी जरूरी है, जो मिट्टी को आकार देकर दीये बनाते हैं और दूसरों के घरों में रोशनी पहुंचाते हैं।

महापौर रवि कुमार राउत की इस पहल से कुम्हार समाज को राहत मिलने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि इस दीपावली बाजार में मिट्टी के दीयों और पारंपरिक उत्पादों की बिक्री कितनी बढ़ती है। हालांकि, नगर निगम के इस फैसले ने छोटे दुकानदारों के बीच उत्साह जरूर बढ़ा दिया है।
इस बार देवघर में दीपावली की रोशनी के साथ-साथ कुम्हार परिवारों के घरों में भी खुशियों का दीप जलने की उम्मीद जगी है।


